इमरान ख़ान को क्यों याद आई भारत में मैच जीतने वाली बात - पाकिस्तान उर्दू प्रेस रिव्यू

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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने एक बार फिर मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की सरकार पर हमला किया है. इसके लिए उन्होंने अपने क्रिकेट करियर की भी मिसाल दी.

अख़बार जंग के अनुसार, शनिवार को इस्लामाबाद के परेड ग्राउंड में पार्टी की रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जब वो पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कप्तान थे तो उन्होंने भारत जाकर उनके अम्पायरों की मौजूदगी में भारत को हराया था.

इमरान ख़ान ने कहा कि वो सियासी मैदान में भी अपने विरोधियों के साथ ऐसा ही करेंगे.

उनकी पार्टी ने शहबाज़ शरीफ़ के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की नीतियों और ख़ासकर बढ़ती महंगाई के ख़िलाफ़ शनिवार को रैली का आह्वान किया था.

इमरान ख़ान ख़ुद रावलपिंडी से एक रैली के साथ परेड ग्राउंड पहुंचे थे. रैली को संबोधित करते हुए इमरान ख़ान ने कहा, "केंद्र सरकार के साथ जनता नहीं है, 'अम्पायर' उनके साथ हैं फिर भी वो केंद्र सरकार को हरा देंगे."

इमरान ख़ान ने कहा कि जब उनकी सरकार थी तो उन्होंने ढाई साल तक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) के साथ डील की थी लेकिन कभी भी महंगाई को बढ़ने नहीं दिया.

इमरान ख़ान ने कहा कि केंद्र सरकार चाहती है कि वो सेना और न्यायपालिका के सामने खड़े हो जाएं.

उनका कहना था, "मैं सभी संस्थानों को यह संदेश देना चाहता था कि जनता किधर खड़ी है. मैं अपनी ही संस्थानों के ख़िलाफ़ जंग करने नहीं निकला हूं, मैं उनका नुक़सान करने नहीं निकला हूं. सरकार चाहती है कि मैं सेना और न्यायपालिका से लड़ पड़ूं और उनके सामने खड़ा हो जाऊं, तो आप सुन लें कि मेरा जीना मरना, पाकिस्तान में है."

इस अवसर पर उन्होंने अमेरिका पर भी निशाना साधा.

इमरान ख़ान ने कहा, "अगर अमेरिकियों की ही ग़ुलामी करनी थी तो फिर आज़ादी की जंग क्यों लड़ी? अमेरिका के ग़ुलामों को यह क़ौम कभी स्वीकार नहीं करेगी."

केंद्र सरकार के लिए जुलाई का महीना बहुत अहम है: शेख़ रशीद

पाकिस्तान के पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री और इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) के एक वरिष्ठ नेता शेख़ रशीद ने कहा है कि शहबाज़ शरीफ़ की सरकार के लिए जुलाई का महीना बहुत अहम है.

अख़बार जंग के अनुसार, पीटीआई की रैली को संबोधित करते हुए शेख़ रशीद ने कहा, "यह लोग सरकार नहीं चला सकते हैं. 'इम्पोर्टेड' सरकार के लिए जुलाई महीना बहुत अहम है."

शेख़ रशीद ने कहा कि पाकिस्तानी सेना की तरह इमरान ख़ान भी अब पाकिस्तान की आवाज़ बन गए हैं.

उन्होंने गठबंधन सरकार के एक प्रमुख समर्थक मौलाना फ़ज़लुर्रहमान पर हमला करते हुए कहा कि वो अपने भाई को ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह का गवर्नर बनवाना चाहते हैं.

आईएमएफ़ को अब पाकिस्तान पर भरोसा नहीं: मरियम नवाज़

पाकिस्तान मुस्लिम लीग(नवाज़ गुट) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज़ ने कहा है कि आईएमएफ़ ने नवाज़ शरीफ़ को साफ़तौर पर बता दिया है कि इमरान ख़ान के कारण उसे अब पाकिस्तान पर विश्वास नहीं है.

शनिवार को लाहौर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मरियम नवाज़ ने कहा, ''इमरान ख़ान 2018 में जनादेश को चुराकर ख़ुद गद्दी पर बैठ गए और ख़ज़ाने को ख़ाली कर दिया.''

इमरान पर हमला करते हुए मरियम नवाज़ ने कहा, "इमरान ख़ान हर जगह जाकर अपनी सरकार के गिरने का रोना रोते हैं. क्या जनता ने उन्हें पाकिस्तान ठेके पर दिया था कि उन्हें लूट खसोट करने देते. अगर आज हमें क़ीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं तो इसकी वजह 'फ़ितना ख़ान' (उपद्रवी) हैं."

मरियम नवाज़ ने कहा कि उनकी सरकार को दिल पर पत्थर रखकर पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमत बढ़ानी पड़ रही है.

उन्होंने विश्वास दिलाया कि नवाज़ शरीफ़ और शहबाज़ शरीफ़ मिलकर पूरी मेहनत के साथ जनता को इन परेशानियों से निजात दिलाएंगे.

इस्लामी देश अफ़ग़ानिस्तान की सरकार को स्वीकार करें: तालिबान

अफ़ग़ानिस्तान के धार्मिक नेताओं ने पूरी दुनिया और ख़ासकर इस्लामी देशों से अपील की है कि वो अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार को स्वीकार करें.

अख़बार डॉन के अनुसार, राजधानी काबुल में हुई धार्मिक और क़बायली नेताओं की एक बैठक (जिरगा) के बाद बयान जारी कर कहा गया, "हम क्षेत्रीय, अंतरराष्ट्रीय जगत और ख़ासकर इस्लामी देशों से कहते हैं कि वो अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार को स्वीकार करके तमाम पाबंदियों को ख़त्म कर दें. वो विदेशी बैंकों में जमा अफ़ग़ानिस्तान की संपत्ति को हमें वापस दे दें और अफ़ग़ानिस्तान के विकास में सहयोग करें.

यह बैठक तीन दिनों तक चली थी जिसमें चार हज़ार से ज़्यादा धार्मिक नेताओं ने हिस्सा लिया था.

तालिबान ने स्वीकृति और पैसे वापस देने की बात तो की लेकिन लड़कियों के स्कूल खोलने के लिए की जा रही मांगों के बारे में कुछ नहीं कहा.

तालिबान के उपनेता और केंद्रीय गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक़्क़ानी ने कहा कि दुनिया अफ़ग़ानिस्तान में एक नेशनल गवर्नमेंट बनाने और शिक्षा (लड़कियों के लिए) की मांग करती है लेकिन इन सब चीज़ों में समय लगता है.

तालिबान के प्रमुख हैबतुल्लाह अख़ुंदज़ादा जो कंधार में रहते हैं और आमतौर पर किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में कम ही नज़र आते हैं, वो भी इस बैठक में शामिल हुए थे.

उन्होंने कहा कि तालिबान दूसरे देश के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे इसलिए दूसरे देशों को भी अफ़ग़ानिस्तान के अंदरूनी मामलों में दख़ल नहीं देना चाहिए.

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