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दावत-ए-इस्लामः पाकिस्तान का वो संगठन जिसका उदयपुर की घटना में सामने आया नाम
राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या के मामले में पाकिस्तान स्थित दावत-ए-इस्लामी संगठन का नाम सामने आया है. कन्हैया लाल की हत्या के अभियुक्तों की पाकिस्तान से कनेक्शन की बात भी सामने आ रही है.
राजस्थान में अधिकारियों ने कहा है कि कन्हैया लाल की हत्या के आरोप में गिरफ़्तार एक अभियुक्त गौस मोहम्मद ने आठ साल पहले पाकिस्तान का दौरा किया था और वो वहाँ फ़ोन करते रहते थे. राजस्थान के डीजीपी एम एल लाठर ने कहा है कि गौस कराची स्थित दावत-ए-इस्लामी के दफ़्तर गए थे.
दावत-ए-इस्लामी एक सुन्नी इस्लामिक संगठन है. इसका गठन पाकिस्तान में 1981 में मोहम्मद इलियास अत्तार क़ादरी ने किया था.
कराची स्थित दावत-ए-इस्लामी अपनी पहचान एक ग़ैर राजनीतिक संस्था के तौर पर ज़ाहिर करती है. संस्था के मुताबिक़, वह दुनिया भर में मुसलमानों के धार्मिक ग्रंथ क़ुरान और पैग़ंबर मोहम्मद की बातों का प्रचार करती है.
1981 में शुरू हुई संस्था का मुख्यालय कराची में है. दावत-ए-इस्लामी वेबसाइट के मुताबिक़, मोहम्मद इलियास अत्तार क़ादरी ने संस्था की स्थापना लोगों को अल्लाह के बताए रास्ते पर चलने, इस्लाम की सीख देने और समाज की गंदगी को साफ़ करने के उद्देश्य से की थी.
स्थापना के बाद से ही संस्था सुन्नी मुसलमानों के बरेलवी समुदाय के हज़ारों लोगों को सीख दे चुकी है. संस्था के संस्थापक नियमित तौर पर संस्था के टीवी चैनल और पत्रिका के माध्यम से लोगों को धार्मिक सीख देते हैं. इसके अलावा संस्था अपने वॉलेंटियर्स की मदद से दूसरे सामाजिक काम भी करती है.
दावत-ए-इस्लामी का दावा है कि उसने पाकिस्तान के 820 स्कूलों में 55 हज़ार से ज़्यादा छात्रों को इस्लामी पाठ्यमक्रम दर्स-ए-निज़ामी की मुफ़्त शिक्षा दी है. वहीं, देश के 3500 मदरसों में 1.75 लाख छात्रों को क़ुरान की शिक्षा दी है. संस्था के ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा और दूसरे देशों में भी शाखाएं हैं.
बरेलवी समुदाय की संस्था
सामरिक और राजनीतिक विश्लेषक मोहम्मद आमिर राणा के मुताबिक़, दुनिया भर में पहुंच रखने के बावजूद संस्था का नाम इससे पहले किसी हिंसक गतिविधि से नहीं जुड़ा था, संस्था के प्रमुख ने किसी भी सार्वजनिक मंच से कभी हिंसा का समर्थन नहीं किया है.
मोहम्मद आमिर राणा ने कहा, "इन लोगों ने अब तक ख़ुद को हिंसा और राजनीति से दूर ही रखा है. यह पूरी तरह से धार्मिक संस्था है जो इस्लाम की सीख देती है और लोगों के कल्याण का काम करती है."
आमिर के मुताबिक़, ''कोई भी संस्था का सदस्य बन सकता है लेकिन जमात-ए-इस्लामी और दूसरे धार्मिक संगठनों की तरह यहां सदस्यता नहीं दी जाती है. कोई भी आकर सीधे जुड़ सकता है.''
यह संस्था बरेलवी समुदाय के लोगों की संस्था है और इस समुदाय की दूसरी संस्थाओं से भी जुड़ी है. परंपरागत तौर पर बरलेवी समुदाय को शांतिपूर्ण और इस्लाम की अध्यात्मिकता में भरोसा रखने वाला माना जाता है. लेकिन ऐसे कट्टरपंथी बरलेवी समूह भी हैं जो हिंसक गतिविधि कर सकते हैं, ख़ासकर तब जब बात पैग़ंबर मोहम्मद के अपमान से जुड़ी हो. यह समुदाय ख़ुद को आशिक़-ए-रसूल यानी पैग़ंबर मोहम्मद से प्यार करने वाला कहता है.
बढ़ा है कट्टरपंथ
पाकिस्तान के धार्मिक संगठनों को बीते दो दशक से कवर करने वाले कराची स्थित पत्रकार ज़ियाउर रहमान भी मोहम्मद आमिर राणा की बातों से सहमति जताते हैं.
ज़िया कहते हैं, "मेरा बचपन कराची में ही बीता है इसलिए दावत-ए-इस्लामी मेरी ज़िंदगी का भी हिस्सा है. आस-पड़ोस में इनके केंद्र और मदरसे हैं. लेकिन इनका नाम किसी विवाद में सुनने को नहीं मिला."
ज़िया के मुताबिक़, परंपरागत तौर पर बरेलवी समुदाय भले कहीं ज़्यादा शांतिप्रिय रहा हो लेकिन पिछले कुछ सालों में इस समुदाय के अंदर भी पैग़ंबर मोहम्मद को लेकर कट्टरपंथ बढ़ा है.
ज़िया कहते हैं, "पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गवर्नर सलमान तासीर की हत्या के जुर्म में मुमताज़ क़ादरी को फांसी दिए जाने के बाद बरेलवी संगठनों में कट्टरपंथ बढ़ा है. पैग़ंबर मोहम्मद से जुड़े मामले को लेकर वे कहीं ज़्यादा हिंसक हो रहे हैं."
मुमताज़ क़ादरी, सलमान तासीर के अंगरक्षक थे और उन्होंने 2011 में उनकी हत्या कर दी थी क्योंकि उन्हें लग रहा था कि पंजाब के गवर्नर ने पैग़ंबर मोहम्मद का अपमान किया है. क़ादरी को 2016 में फांसी दी गई, उनके जनाज़े में बरलेवी समुदाय के हज़ारों लोग शामिल हुए थे.
दावत-ए-इस्लामी संगठन के सदस्य भी क़ादरी के लिए प्रार्थनाओं में शामिल हुए थे.
ज़िया के मुताबिक़, संस्था के लोगों पर अभी तक तो कोई आरोप नहीं लगा है लेकिन हो सकता है कि संस्था के कुछ समर्थकों में भी कट्टरपंथ बढ़ा हो.
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
राजस्थान के उदयपुर में मंगलवार को कन्हैया लाल नाम के एक दर्ज़ी की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी. अभियुक्तों, मोहम्मद रियाज़ और गौस मोहम्मद ने हत्या का वीडियो बनाया था और कहा था कि पैग़ंबर के अपमान करने वालों को यही सज़ा मिलेगी.
इन दोनों ने हत्या की बात को स्वीकार किया है. कन्हैया लाल पर आरोप था कि उन्होंने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में सोशल पोस्ट डाली थी.
नूपुर शर्मा ने मई महीने के आख़िर में एक टीवी डिबेट में पैग़ंबर मोहम्मद को लेकर विवादित टिप्पणी की थी. बाद में बीजेपी ने नूपुर शर्मा को पार्टी से निलंबित कर दिया था.
भारत में हो रही जांच के बाद लगे इस आरोप पर प्रतिक्रिया लेने के लिए लगातार कोशिशों के बाद भी बीबीसी दावत-ए-इस्लामी के प्रवक्ता से संपर्क नहीं कर सकी है.
वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों का खंडन किया है.
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा, ''हमने भारतीय मीडिया में रिपोर्ट देखी है, जिसमें उदयपुर की घटना को पाकिस्तान से जोड़ा जा रहा है. हम इस आरोप को ख़ारिज करते हैं. भारत में बीजेपी-आरएसएस की सरकार हमेशा से अपने आंतरिक मुद्दों के लिए पाकिस्तान पर उंगली उठाती रही है. इस तरह बदनाम करने वाले अभियान काम नहीं आएंगे.''
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