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बिहार में महिला के साथ सरेआम यौन हिंसा के बाद एसआईटी का गठन, गांव वालों ने क्या बताया?
- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 9 मिनट
बिहार में नालंदा ज़िले के एक गांव में एक महिला के साथ हुई यौन हिंसा मामले में पुलिस ने अभियुक्तों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज़ कर कार्रवाई शुरू कर दी है.
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में गुस्सा है.
सोशल मीडिया पर कई लोग 2023 में मणिपुर में हुई यौन हिंसा के साथ इसकी तुलना कर रहे हैं. इस वीडियो के वायरल होने के बाद आठ लोगों की गिरफ़्तारी हुई है.
बिहार के सभी राजनीतिक दलों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और विपक्षी दलों ने राज्य में क़ानून व्यवस्था बिगड़ने के लिए सत्तारूढ़ सरकार पर निशाना साधा है.
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नालंदा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) भारत सोनी ने बीबीसी को बताया, "इस मामले में महिला की तरफ़ से स्थानीय थाने में बीती 27 मार्च को एफ़आईआर दर्ज़ कराई गई थी. जिसमें गाँव के ही तीन लोग नामजद अभियुक्त थे."
भारत सोनी ने बताया, "इनमें से अशोक यादव और मतलू महतो की गिरफ़्तारी हो गई है. बाक़ी अभियुक्तों की गिरफ़्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है. वायरल वीडियो के आधार पर अन्य छह लोगों को भी चिह्नित करके उनकी गिरफ़्तारी हुई है. इनके अलावा दो से तीन लोगों पर पुलिस की नज़र है."
क्या है पूरा मामला?
बीती 30 मार्च को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था. इसमें कुछ पुरुष एक महिला के साथ यौन हिंसा करते दिख रहे हैं.
कुछ लोग महिला को पीटने की कोशिश कर रहे हैं तो कुछ उन्हें बचाने की कोशिश करते दिख रहे हैं. वीडियो में महिला के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल भी हो रहा है.
दरअसल ये घटना 26 मार्च की है. महिला ने 27 मार्च को स्थानीय थाने में इस बारे में एफ़आईआर दर्ज कराई थी.
महिला ने एफ़आईआर में कहा, "शाम छह से सात बजे के बीच मैं दुकान से सामान लेने गई थी. इस बीच गाँव के ही अशोक यादव, मतलू महतो और रविकांत कुमार ने मुझे पकड़ लिया. शोर शराबा होने पर ग्रामीण जमा हो गए और मैं मुश्किल से अपनी जान बचा पाई."
महिला ने आरोप लगाया है कि उनके साथ 'बलात्कार करने की कोशिश हुई.'
27 मार्च को हुई एफ़आईआर के बाद घटना का वीडियो वायरल हुआ. इसके बाद नालंदा पुलिस ने 31 मार्च को एक प्रेस रिलीज़ जारी करके दो अभियुक्तों की गिरफ़्तारी की सूचना दी.
इस मामले में बीबीसी ने महिला से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया.
महिला ने स्थानीय मीडिया को क्या बताया?
महिला के तीन बच्चे हैं और उनके पति राज्य से बाहर मज़दूरी करते हैं. महिला पर अपने घर की रोज़मर्रा की ज़रूरतों को पूरा करने की ज़िम्मेदारी है. उनके ससुर की मृत्यु हो चुकी है और सास बीमार रहती हैं.
इस घटना के बाद महिला के पति गांव वापस आ गए हैं, लेकिन वो भी घर पर मौजूद नहीं थे. उनसे भी संपर्क नहीं हो पाया.
महिला ने 31 मार्च को कई मीडिया संस्थानों से बात की थी. इस बातचीत में वो बता रही हैं कि उनकी बड़ी बेटी नानी के पास रहती है.
वो घटना के बारे में बताती हैं, "मुझे अपनी बेटी के पास 1000 रुपए भेजने थे. इसके लिए मैं गाँव के ही लड़के के पास गई थी. ये लड़का पैसा ट्रांसफ़र करता है."
"मैंने पैसा भेजने के लिए लड़के को फ़ोन किया लेकिन उसने मेरा नंबर ब्लॉक कर रखा था. मैं उसकी दुकान पर गई. लेकिन वो दुकान पर नहीं था. वो एक दालान में तीन-चार लड़कों के साथ बैठा था. मैंने उससे पूछा कि उसने मेरा नंबर क्यों ब्लॉक कर रखा है?"
"लड़के से बात करते हुए मुझे गाँव के कुछ लोगों ने देख लिया और हंगामा करने लगे...पूरा समाज जुट गया. हम जिस कमरे में बातचीत कर रहे थे वो आधा खुला हुआ था. लेकिन इन लोगों ने गेट पर ताला लगा दिया...इस कमरे में एक खिड़की है, जिसमें ईंट लगी हुई थी. लड़के ने ईंट को बाहर धकेल दिया. उसके बाद लोग मारपीट करने लगे."
गांव में सन्नाटा
इस घटना के बाद गाँव में सन्नाटा पसरा है. गाँव में ज़्यादातर महिलाएँ दिखती हैं और पुरुष बहुत कम दिखते हैं. महिला के घर के ठीक बाहर तीन पुलिसवाले बैठे हैं.
ये पुलिसवाले मीडियाकर्मियों, यूट्यूबर और सामाजिक कार्यकर्ताओं से बार -बार कह रहे हैं, "वो किसी से बात नहीं कर रही हैं. उन्हें परेशान मत कीजिए."
कुछ दूरी पर ही बड़ी संख्या में महिलाएं भी हैं. गांव की महिलाएं घटना के बारे में कोई जानकारी होने से इनकार करती हैं. इनमें से कुछ महिलाओं के घर से पुरुष गिरफ़्तार भी हुए हैं.
नामजद अभियुक्त मतलू महतो की बेटी मौसमी कुमारी ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी से कहा, "मेरे पापा तो उस वीडियो में कहीं दिख भी नहीं रहे. मेरे पापा को लगा कि गाँव की लड़की है, उसकी रक्षा करनी चाहिए. उन्होंने ही प्रशासन को फ़ोन किया. लेकिन उनको भलाई का ये इनाम मिला है. क़ानून तो कहता है कि जो निर्दोष है, उसको सज़ा नहीं दी जाए. लेकिन यहाँ तो ऐसा नहीं हो रहा है."
इस मामले में नामजद अभियुक्त रविकांत कुमार भी हैं.
उनकी माँ देवंती देवी ने बताया, "मेरा बेटा बीए कर रहा है. उसकी पढ़ाई को बर्बाद कर दिया. दोनों देवर-भौजाई लगते हैं. मेरा लड़का तो उसको बचाने गया था. वो उसे वहाँ से निकाल रहा था. बचाते समय मेरे लड़के ने उसे पकड़ा तो उसने उस पर एफ़आईआर कर दी."
लेकिन क्या महिला के साथ ग़लत नहीं हुआ?
इस सवाल पर देवंती देवी कहती हैं, "ग़लत तो हुआ है उस महिला के साथ. जिसने उसके साथ ग़लत किया, लोग उसकी निंदा कर रहे हैं."
वीडियो शेयर किया तो होगी कार्रवाई
इस मामले में नालंदा पुलिस ने एसआईटी का गठन किया है. एसपी भारत ने बताया कि इस केस में 30 दिन के अंदर चार्जशीट दायर कर, मामले का स्पीडी ट्रायल करवाया जाएगा.
नालंदा पुलिस ने घटना के बाद जो प्रेस रिलीज़ जारी की है, उसमें 'छेड़खानी' शब्द का इस्तेमाल हुआ है. क्या महज़ छेड़खानी शब्द सही है?
इस सवाल पर भारत सोनी कहते हैं, "हम लोगों ने प्रेस रिलीज़ महिला के स्टेटमेंट के आधार पर जारी की थी. लेकिन उसके बाद हम लोगों ने टीम भेजकर पूछताछ की है. इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की कठोर धाराएं लगाई गई है. अभी जांच चल रही है और जाँच में अगर और कोई तथ्य सामने आता है, तो सुसंगत धाराएं लगाएंगे."
इस मामले में बीएनएस की धारा 74/75/76/115(2)/126(2)/3(5) के तहत मामला दर्ज़ किया गया है.
नालंदा पुलिस ने सोशल मीडिया से वीडियो हटाए हैं. साथ ही आम लोगों से वीडियो फ़ारवर्ड, रीट्वीट, शेयर नहीं करने की अपील की है.
पुलिस वीडियो को प्रचारित करने वाले अकांउट्स को चिह्नित करके लीगल नोटिस भेज रही है.
महिलाएं कितना सुरक्षित?
इस घटना के बाद सत्तारूढ़ पार्टी जेडीयू की प्रदेश उपाध्यक्ष प्रमिला प्रजापति भी महिला से मिलने पहुंची थीं. वो बताती हैं कि महिला बहुत डरी-सहमी है.
महिला सुरक्षा के सवाल पर वो अपनी सरकार का बचाव करते हुए कहती हैं, "कुछ घटनाएं हो रही हैं, लेकिन हमारी महिलाएं सुरक्षित हैं. इन घटनाओं पर क़ानून अपना काम कर रहा है. लेकिन हमारी सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए बहुत काम किया है."
लेकिन मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल से जुड़े समाजविज्ञानी पुष्पेन्द्र बीबीसी से कहते हैं, "इस मामले में पूरा गांव ही महिला के ख़िलाफ़ खड़ा हो गया है. उनका जिस तरह से सार्वजनिक अपमान हुआ है वो गंभीर अपराध है."
"साथ ही इस पूरी घटना का गंभीर असर उसके जीवन पर पड़ेगा. उसके जीवन का बड़ा हिस्सा शर्म में बीतेगा. पुलिस अगर एफ़आईआर दर्ज होने के बाद ही कार्रवाई करती तो महिला शायद इस शर्म से बच जाती. उसका वीडियो वायरल नहीं होता."
राजद और बीजेपी ने क्या कहा
इस घटना के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों से प्रतिक्रियाएँ आई हैं.
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा है, "बीजेपी-जेडीयू सरकार के महा-चौपटराज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह ज़िले में एक महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म का प्रयास किया गया. एनडीए सरकार में अपराधियों के हौसले दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं. महिलाओं के ख़िलाफ अपराध में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है और सरकार मूक दर्शक बनी हुई है."
बीजेपी ने भी इस घटना की निंदा की है.
बीजेपी प्रवक्ता दानिश इक़बाल ने कहा, "इस घटना की जितनी निंदा की जाए कम है. लेकिन हमारी सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मामले में संलिप्त अपराधियों की गिरफ़्तारी की है. कोई भी दोषी बच नहीं पाएगा और उनको कठोर सज़ा मिलेगी."
उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन उनके 15 साल के शासन काल में तो लड़कियाँ स्कूल तक नहीं जा पाती थीं और महिलाएं घर में शाम को बंद हो जाती थीं.
दानिश इक़बाल ने कहा, "एक संवेदनशील और सुशासन की सरकार को जो कार्रवाई किसी घटना के बाद करनी चाहिए, वो हमारी सरकार ने की है."
ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वीमेन्स एसोसिएशन (ऐपवा) की टीम भी महिला से मिलने नालंदा गई थी.
ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी बीबीसी न्यूज़ हिंदी से कहती हैं, "ये विचलित करने वाली घटना है. इसको देखकर शर्म भी आती है और ग़ुस्सा भी. हमारे समाज में नैतिक पहरेदार खड़े हो गए हैं, जो ये तय कर रहे हैं कि औरतों को क्या करना चाहिए और क्या नहीं?"
"भयावह बात ये है कि इन नैतिक पहरेदारों, स्वयंभू ठेकेदारों को मान्यता मिल रही है. सरकार की विफलता के चलते ये अपराधी बेलगाम हैं. बल्कि सरकार पहले से ही समाज में स्थापित पितृसत्तात्मक मूल्यों को और ज़्यादा स्थापित कर रही है. हम इसके ख़िलाफ़ आवाज उठाते रहेंगे."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.