अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप और मेक्सिको के नए राष्ट्रपति ओब्राडोर साथ चल पाएंगे?

Donald Trump, López Obrador
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डोनल्ड ट्रंप को उस वक़्त अमरीका का राष्ट्रपति बने महज 10 दिन हुए थे जब आंद्रेस मेनुएल लोपेज़ ओब्राडोर ने 'प्रवासियों की रक्षा' के लिए के लिए अमरीका का दौरा करने का ऐलान किया था. ये जनवरी, 2017 की बात है.

इस दौरे पर वो अमरीका के अलग-अलग शहरों में गए और ट्रंप पर आरोप लगाया कि वो मेक्सिको के लोगों के बारे में ठीक वैसे ही बात कर रहे हैं जैसे 'हिटलर यहूदियों के बारे में' करते थे. लोपेज़ ने ट्रंप पर मेक्सिको के लोगों के ख़िलाफ़ नफ़रत भरा अभियान चलाने का आरोप भी लगाया है.

बाद में उन्होंने अपनी इस यात्रा के अनुभवों पर 'हे ट्रंप' नाम की एक किताब भी लिखी. जब लोपेज़ ये सब कर रहे थे तब मेक्सिको के मौजूदा राष्ट्रपति एनरिक पेना निएटो ख़ामोश थे.

साल 2010 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पेरू के लेखक और पत्रकार मारियो वर्गास लियोसा ने कहा था कि ट्रंप ने मेक्सिको की जनता का अपमान करके लोपेज़ की राह आसान कर दी है

López Obrador

रविवार को आए राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों में लोपेज़ को मिली जीत के बाद अब दो बड़े सवाल सामने हैं:

1. क्या वाक़ई लोपेज़ की जीत के पीछे ट्रंप हैं?

2. क्या अब दोनों नेता आमने-सामने होंगे?

फ़िलहाल दोनों नेताओँ ने सोमवार को हुई आपसी बातचीत की पुष्टि की है. उन्होंने फ़ोन पर तक़रीबन आधे घंटे तक बात की. बातचीत के दौरान उन्होंने पलायन रोकने और सुरक्षा बढ़ाने पर चर्चा की.

इससे पहले डोनल्ड ट्रंप ट्वीट करके मेक्सिको ने नव-निर्वाचित राष्ट्रपति यानी लोपेज़ को बधाई दे चुके थे. अपने ट्वीट में उन्होंने दोनों देशों के अच्छे भविष्य के लिए उनके साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई.

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उन्होंने कहा, "मैं आंद्रेस मेनुअल लोपेज़ ओब्राडोर को मेक्सिको का अगला राष्ट्रपति बनने की बधाई देता हूं. मुझे उनके साथ काम करने का इंतज़ार है. अमरीका और मेक्सिको के फ़ायदे के लिए हमें अभी बहुत कुछ करना है."

'ट्रंप ने मेक्सिको चुनाव पर असर डाला'

मेक्सिकन काउंसिल ऑफ़ इंटरनेशनल अफ़ेयर्स के अध्यक्ष लुइस रुबियो का मानना है कि ट्रंप का मेक्सिको चुनाव पर अप्रत्यक्ष तौर पर असर पड़ा है.

रुबियो ने बीबीसी से कहा, "मेक्सिको के बहुत से लोग ट्रंप के अपमानजनक बयानों से खफ़ा हैं. वो इसलिए भी ख़फ़ा हैं कि मेक्सिको का कोई नेता न तो ट्रंप को जवाब दे रहा है और न ही कुछ ऐसा कर रहा है जो आम जनता को समझ में आए."

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हाल के दिनों में मेक्सिको से अमरीकी सीमा में आने वाले अवैध प्रवासियों और उनके बच्चों को लेकर दोनों देशों की तल्ख़ियां और बढ़ गई हैं. प्रवासियों से उनके बच्चों को अलग करने और बच्चों को 'डिटेन्शन सेंटर' में रखे जाने के ट्रंप प्रशासन की काफ़ी आलोचना हुई थी.

विवाद इतना बढ़ गया था कि ट्रंप को बच्चों को परिवार से जुदा न करने का आदेश जारी करना पड़ा.

'ट्रंप वजह नहीं थे'

हालांकि ट्रंप ने खुलकर मेक्सिको चुनाव के बारे में कुछ नहीं बोला. कुछ विशेषज्ञ भी मेक्सिको चुनाव के नतीजों में ट्रंप की भूमिका को ख़ारिज करते हैं.

एक चुनावी फ़र्म के डायरेक्टर जॉर्ज वेडिंया कहते हैं, "मेक्सिको चुनावी अभियान का विषय ट्रंप नहीं थे. मुझे उनका असर भी नहीं दिखता."

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उनका मानना है कि मेक्सिको के चुनावी मैदान में उतरे सभी उम्मीदवार ट्रंप के बारे में लोपेज़ के विचार से इत्तेफ़ाक रखते हैं. ट्रंप को मेक्सिको की जनता बहुत नापसंद करती है. वहां, हर 10 में से आठवां मतदाता ट्रंप के बारे में नकारात्मक राय रखता है.

कइयों का यह भी मानना है कि लोपेज़ की जीत के पीछे भ्रष्टाचार और हिंसा जैसे मुद्दों से जनता की परेशानी भी है. लोपेज़ ने इन स्थानीय मुद्दों पर काम करने वादा किया था.

ट्रंप और लोपेज़: समानताएं और अंतर

दोनों नेता विदेशी देशों से रिश्तों के बजाय देश की राजनीति पर ज़्यादा ध्यान देते हैं.

ट्रंप की तरह ही लोपेज़ ने भी अमरीका से 'भ्रष्टाचारी सत्ता' को बाहर करने का वादा किया था. यह बात और है कि अमरीका का झुकाव 'दक्षिण' और मेक्सिको का झुकाव 'वाम' की तरफ़ माना जाता है.

Mexico Election, anti Trump protest

कुछ जानकारों का मानना है कि लोपेज़ और ट्रंप को एक दूसरे को समझने में मुश्किल होगी क्योंकि दोनो दोनों ही एक-दूसरे से काफ़ी अलग हैं. वहीं, कुछ राजनीतिक जानकार ऐसे भी हैं, जिन्हें लगता है कि दोनों में अच्छा तालमेल रहेगा.

अमरीका में मेक्सिको के पूर्व राजदूत जॉर्ज ग्वाहार्डो कहते हैं, "मुझे लगता है कि कुछ अजीब वजहों से दोनों एकसाथ काम करने का प्रभावी तरीका ढूंढ लेंगे."

अमरीका और मेक्सिको के बीच एक अहम द्विपक्षीय अजेंडा है, नॉर्थ अमरीकन फ़्री ट्रेड अग्रीमेंट (NAFTA) जो दोनों देशों और कनाडा के बीच है.

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