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अर्श से फ़र्श पर दक्षिण अफ्रीका का गुप्ता परिवार?
बेल पोटिंगर और केपीएमजी जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड की प्रतिष्ठा को दक्षिण अफ्रीका में विवादित गुप्ता परिवार के संबंधित कामकाज की वजह से नुकसान हुआ है. क्या गुप्ता परिवार का बिज़नेस अब बच सकता है? पढ़िए बीबीसी अफ़्रीका के बिज़नेस संपादक मैथ्यू डेविस की ये रिपोर्ट.
दक्षिण अफ्रीका में कई व्यवसायों के मालिक गुप्ता परिवार के कथित संदिग्ध व्यापारिक लेनदेन की वजह से उनके कई बैंक खाते बंद कर दिए गए हैं. गुप्ता परिवार इन दिनों इसी वजह से परेशानियों से घिरा हुआ है.
बैंक खाते न होने की वजह से गुप्ता परिवार अपने 8000 कर्मचारियों को वेतन भी नहीं दे पा रहा है. सवाल ये कि गुप्ता परिवार के लिए ये नौबत आई कहां से?
गुप्ता बंधु राष्ट्रपति जैकब ज़ुमा के क़रीबी दोस्त थे. 1990 के दशक में भारत से साधारण आप्रवासियों के रूप में वो दक्षिण अफ्रीका पहुंचे.
विवादों में गुप्ता परिवार
गुप्ता बंधुओं ने शुरुआत कम्प्यूटर व्यापार से की. बाद में खनन और इंजीनियरिंग कंपनियों से लेकर, एक लक्ज़री गेम लाउंज, एक समाचार पत्र और 24 घंटे के समाचार टीवी स्टेशन में हिस्सेदारी ख़रीदी.
लेकिन अब उनके ये आकर्षक व्यवसाय नहीं चल रहे हैं और हालत ये है कि इसे सरकार ज़ब्त करने की कगार पर है.
उन पर आरोप है कि भ्रष्ट सौदों के माध्यम से परिवार ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर लाखों डॉलर के सरकारी ठेके लिए.
गुप्ता परिवार में तीन भाई हैं. अतुल, राजेश और अजय. तीनों भाई हमेशा से इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं.
दक्षिण अफ्रीका के चार बड़े बैंक एबीएसए, एफ़एनबी, स्टैंडर्ड और नेडबैंक ने मार्च 2016 में गुप्ता परिवार को बता दिया था कि वो अब उनके ओकबे कंपनी और उसके सहायक कंपनियों को बैंकिंग सुविधा नहीं दे पाएगी.
अफ़्रीकी नेशनल कांग्रेस पर निशाना
कुछ लोगों का मानना है कि ये घोटाले दक्षिण अफ्रीका में सत्ताधारी अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस के लिए बड़ी समस्या की ओर इशारा करते हैं.
दक्षिण अफ्रीका कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख ब्लेड नजीमांडे ने कहा कि ये घोटाला सरकार के भीतर संरक्षण नेटवर्क की ओर इशारा करता है.
उन्होंने कहा, "हम केवल गुप्ता परिवार को दोष नहीं दे सकते. सरकार के भीतर उनकी पकड़ और हमारे आंदोलन में उनकी पैठ को भी दोष देना होगा. जब तक हम इससे निपट नहीं सकते, हम ढलान पर हैं."
गुप्ता भाइयों और ज़ुमा के बीच संबंध राष्ट्रपति के बेटे, दुदुज़ेन के माध्यम से बढ़े थे.
दुदुज़ेन ने गुप्ता परिवार के साथ काम की शुरूआत 13 साल पहले उनकी कंपनी सहारा कम्प्यूटर में एक ट्रेनी के तौर पर की थी.
नकारात्मक प्रचार
बीबीसी से बात करते हुए दुदुज़ेन ने कहा कि 'गुप्ता परिवार ने मेरे साथ बिज़नेस इसलिए किया क्योंकि मैं एक अच्छा आदमी हूं.'
कॉरपोरेट दस्तावेज़ बताते हैं कि गुप्ता परिवार के साथ दुदुज़ेन कम से कम 11 कंपनियों के बोर्ड में एक साथ काम कर चुके हैं.
राष्ट्रपति ज़ुमा की एक पत्नी ने गुप्ता परिवार की ख़नन कंपनी के लिए काम किया है और उनकी बेटी सहारा कम्प्यूटर की डायरेक्टर भी रह चुकी हैं.
गुप्ता परिवार अरबों रुपयों की संपत्ति का मालिक है. साल 2016 के जोहान्सबर्ग स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के आधार पर, अतुल गुप्ता दक्षिण अफ्रीका के सातवें सबसे अमीर व्यक्ति हैं. उनकी कुल सम्पत्ति 770 मिलियन डॉलर है.
हाल के दिनों में ये सवाल कई बार पूछा गया है कि एक परिवार इतने कम समय में इतनी सारी सम्पत्ति का मालिक कैसे बन सकता है. इस तरह के नकरात्मक प्रचार के बाद गुप्ता परिवार के साथ बिज़नेस करने वाले कई व्यापारी परेशान होना शुरू हो गए.
ज़ुमा और गुप्ता मिल कर बना 'ज़ुप्ता'
राष्ट्रपति की पत्नी बोंगी नग्मा- ज़ुमा गुप्ता परिवार के जेआईसी माइनिंग सर्विस में जनसंपर्क अधिकारी के रूप में काम करती थीं. राष्ट्रपति की बेटी दुदुज़िल ज़ुमा सहारा कम्प्यूटर में एक डायरेक्टर थीं.
राष्ट्रपति के बेटे दुदुज़ेन ज़ुमा गुप्ता परिवार के कई कंपनियों में निदेशक रह चुके हैं, लेकिन 2016 में सार्वजनिक दबाव में आकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. जुलाई तक गुप्ता परिवार दक्षिण अफ्रीका के दो बैंक- बैंक ऑफ़ चाइना और बैंक ऑफ़ बड़ौदा के ज़रिए ही काम कर पा रहे थे.
उनके पास कंपनियों को बेचने के अलावा कोई और चारा नहीं था. अगस्त में गुप्ता परिवार ने अपने ओकबे और दूसरी कंपनियों पर 'फ़ॉर सेल' का बोर्ड लगा दिया.
दो दिन के भीतर, गुप्ता परिवार की मीडिया संपत्तियां - 24 घंटे का समाचार चैनल एएनएन और समाचार पत्र 'द न्यू एज' अख़बार - पूर्व सरकार के प्रवक्ता मज़वनेले मान्यी ने 34 मिलियन डॉलर में खरीद लिया. मान्यी को राष्ट्रपति ज़ुमा का समर्थक माना जाता है.
लेकिन इस डील के ज़रिए खरीदार का इरादा गुप्ता परिवार को फ़ायदा पहुंचाने का था.
गुप्ता परिवार दक्षिण अफ्रीका छोड़ना चाहता था
मीडिया सम्पत्तियों के बाद बारी थी खनन संपत्तियों की बिक्री की. गुप्ता परिवार की खनन कंपनी टिगीटा को चार्ल्स किंग नाम के व्यापारी ने 228 मिलियन डॉलर में खरीदा.
चार्ल्स किंग स्विट्ज़रलैंड में रहने वाले व्यापारी थे जिनका खनन व्यवसाय से कोई लेना-देना नहीं था. उनकी कंपनी इससे पहले फ़ैशन व्यापार के लिए पंजीकृत थी. गुप्ता परिवार ने घोषणा की कि वो इस साल के अंत तक दक्षिण अफ्रीका छोड़ना चाहते हैं.
उन्होंने एक बयान में कहा, "एक परिवार के रूप में, हमारे बिज़नेस के शेयर से हमारे निकलने का वक्त आ गया है. हमें लगता है कि इससे हमारे मौजूदा कर्मचारियों को फ़ायदा होगा."
लेकिन गुप्ता परिवार अपने बिज़नेस से कितना दूर रह पाता है, ये देखना होगा. कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है कि इन सबके बावजूद सभी बिज़नेस में भविष्य के निर्णय में भी गुप्ता परिवार की अहम भूमिका रहेगी.
ज़ुमा समर्थक के बीच
लेकिन इससे वो और उनके सहयोगी इनकार करते हैं.
उधर, उभरते बाज़ारों के एक विशेषज्ञ पीट अटर्ड मोंटलतों कहते हैं, "एक समय ऐसा आएगा जब अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस में ज़ुमा समर्थकों द्वारा इन्हें डंप कर दिया जाएगा, लेकिन वो 2019 के पहले नहीं होगा."
गुप्ता परिवार और ज़ुमा समर्थक के बीच सार्वजनिक तौर पर दूरियां बढ़ती दिख रही हैं, लेकिन पर्दे के पीछे ज्यादा कुछ नहीं बदला है.
दक्षिण अफ्रीका के कॉरपोरेट जगत में गुप्ता परिवार के साथ संबंधों की वजह से भूंकप आ गया है जिसके झटके आने वाले दिनों में महूसस होते रहेंगे. कई बड़ी कंपनियां पूरी तरह से हिल गई हैं और वरिष्ठ स्टाफ़ ने इस्तीफा दे दिया है या निलंबित कर दिया गया है.
इतना ही नहीं ब्रिटिश प्रशासन में बेल पटेलिंगर, अंतरराष्ट्रीय लेखा फर्म केपीएमजी, वित्तीय सलाहकार फर्म मैकिंज़ी - सब पर इसका असर साफ़ देखने को मिला.
कंपनी की प्रतिष्ठा
जर्मन सॉफ्टवेयर कंपनी एसएपी ने दक्षिण अफ्रीका में अपने चार प्रबंधकों को निलंबित कर दिया है जबकि आंतरिक जांच कथित तौर पर रिश्वत में की जाती है.
फिलहाल लंबे समय में, कंपनी की प्रतिष्ठा को होने वाले नुकसान को मापना मुश्किल है.
राजनीतिक फ्यूचर्स कंसल्टेंसी के डैनियल सिल्के का मानना है कि पूरी कहानी ने वास्तव में दक्षिण अफ्रीका के निजी क्षेत्र की स्थिति को और मज़बूत किया है.
ये घटना अपने आप में इकलौती ऐसी घटना है. निजी क्षेत्र ने दिखाया है कि यह शीघ्र ही कार्यवाई कर सकता है. लेकिन इसके बाद क्या? ये एक ऐसा सवाल है जो कई दक्षिण अफ्रीकी लोग पूछ रहे हैं.
विपक्ष के नेता और पार्टियां इस पूरे मामले में पूछताछ और जांच की मांग कर रहे हैं. देश की संसद में जांच के लिए चार समितियों को आदेश दिया गया है.
केवल एक समिति ने अभी जनसभा की है. राष्ट्रीय अभियोग प्राधिकरण का कहना है कि उनकी जांच चल रही है, लेकिन कई मुद्दों पर उनकी जांच में विस्तृत विवरण नहीं है.
गुप्ता परिवार के ख़िलाफ़
मुख्य अभियोजन शॉन अब्राहम ने संसद से कहा, "मेरी चुप्पी का मतलब यह नहीं है कि कोई काम नहीं किया जा रहा है."
अभी तक, गुप्ता से जुड़े भ्रष्टाचार के किसी भी आरोप के सिलसिले में किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है और न ही आरोप लगाया गया है.
वो आज भी आरोपों से इनकार कर रहे हैं. उनका कहना है कि उनके खिलाफ कोई मामला ही नहीं बनता है. उनका ये भी मानना है कि निराधार मीडिया रिपोर्ट के आरोपों के सामने वो अपना नाम साफ़ करने की प्रक्रिया में हैं.
भविष्य में ये पता चल पाएगा कि क्या गुप्ता परिवार ने पूरी तरह दक्षिण अफ्रीका को छोड़ दिया है. सम्पत्ति को पूरी तरह बेचने में और उससे मिली रकम को देश से बाहर निकालने में थोड़ा समय जरूर लगेगा.
उनके व्यापार ने दक्षिण अफ्रीका के भीतर और बाहर कई लोगों, कंपनियों और संस्थानों को प्रभावित किया है. इस कहानी के अंत में कौन कहां खड़ा होगा ये फिलहाल कहना मुश्किल है. पूरी तस्वीर को उभरने में कई साल लग सकते हैं.
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