'लक्ष्मण रेखा लांघने से बच रहे हैं उत्तर कोरिया और अमरीका'

उत्तर कोरिया ने कहा कि उसने सफलतापूर्वक परमाणु परीक्षण किया है.उत्तर कोरिया ने पिछली बार पांचवां टेस्ट तब किया था जब दक्षिण कोरिया और अमरीका का संयुक्त युद्धाभ्यास ख़त्म हुआ था. इस बार भी 'उल्ची-फ़्रीडम गार्डियन' ज्वाइंट एक्सरसाइज़ के बाद छठा परीक्षण किया.

दरअसल कोरिया यह संदेश देना चाहता है कि आप संयुक्त युद्धाभ्यास से हमें डराने की कोशिश कर रहे हैं तो हम डरने वाले नहीं हैं और अपने कार्यक्रम जारी रखेंगे.

नहीं होगा प्रतिबंधों का असर

उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों का ख़ास असर नहीं होगा. इनका असर उन देशों पर होता है जिनका अंतरराष्ट्रीय जगत से व्यापार या लेन-देन होता है.

उत्तर कोरिया ऐसा देश है जिसका कुल विदेशी व्यापार 8 से 10 अरब डॉलर का है. इसमें भी 80 से 85 फ़ीसदी व्यापार चीन से होता है. चीन के साथ कारोबार पूरी तरह बंद होगा नहीं और बाकी 10 फ़ीसदी पर जितने भी प्रतिबंध लगा दें, उनका ख़ास असर नहीं होगा.

बस बातें कर रहे हैं उत्तर कोरिया और अमरीका

उत्तर कोरिया और अमरीका के बीच यह जो मुकाबला चल रहा है, उसमें दोनों एक-दूसरे को आंखें दिखा रहे हैं. दोनों एक-दूसरे को झुकाना चाहते हैं. उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग-उन को समझना आसान नहीं है. ट्रंप ने भी यही नीति अपनाई है.

उत्तर कोरिया को अमरीका यह दिखाना चाह रहा है कि हम भी आपकी तरह 'अन-प्रिडिक्टेबल' हैं. इसीलिए अमरीका कई विरोधाभासी बयान दे रहा है. उनका विदेश मंत्री कुछ कहता है और रक्षा मंत्री कुछ और कहता है.

इस मुकाबले में दोनों देश एक बात का ध्यान रख रहे हैं. बातें तो बड़ी-बड़ी कर रहे हैं, लेकिन कोई भी देश लक्ष्मण रेखा को नहीं लांघना चाहता.

अगर अमरीका पहले युद्ध छेड़ता है तो हालात काफ़ी बदल जाएंगे. चीन कभी भी अमरीका का साथ नहीं देगा और वह उत्तर कोरिया के बचाव में आ सकता है. इसी तरह अगर उत्तर कोरिया पहले अमरीका पर हमला करता है तो चीन उत्तर कोरिया का समर्थन नहीं कर पाएगा.

(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित)

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