क़तर को लेकर कंफ़्यूज़न में क्यों हैं डोनल्ड ट्रंप?

ट्रंप और टिलरसन
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क़तर संकट पर अमरीकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और पेंटागन के अलग-अलग बयान आने से भ्रम की स्थिति बन गई है.

सऊदी अरब और अन्य देशों की ओर से क़तर के साथ सारे राजनयिक संबंध तोड़ लेने और सीमा को सील करने से पैदा हुए हालात के बीच डोनल्ड ट्रंप भी क़तर के ख़िलाफ़ खड़े नज़र आए.

ट्रंप ने कहा, "बदक़िस्मती से क़तर बहुत उच्च स्तर पर आतंकवाद को प्रायोजित करता रहा है. विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन, अपने दिग्गज जनरलों और सेना के साथ मिलकर हमने तय किया है कि अब समय आ गया है कि क़तर से इस फ़ंडिंग को बंद करने के लिए कहा जाए."

रोमानियाई राष्ट्रपति के व्हाइट हाउस दौरे पर ट्रंप ने क़तर के ख़िलाफ़ अरब देशों के गठबंधन की कार्रवाई को 'कड़ा लेकिन ज़रूरी' बताया.

अरब देशों के नेताओं के साथ अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन और ट्रंप

टिलरसन का बयान अलग?

जबकि इसके ठीक पहले अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने रियाद और अन्य अरब देशों से क़तर के ख़िलाफ़ प्रतिबंध में ढील देने की बात कही थी.

दिलचस्प बात ये है कि ट्रंप ने टिलरसन को आधिकारिक रूप से मध्यस्थ बनाया था.

टिलरसन ने इस इलाक़े के अन्य देशों से बातचीत में जल्द समाधान निकालने की बात कही और क़तर के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों में तत्काल ढील देने की अपील की थी.

बीबीसी संवाददादात बारबारा प्लेट उशेयर के अनुसार, "'ट्रंप ने अपने विदेश मंत्री से उलट बात की."

मध्य-पूर्व और अरब जगत के मामलों के जानकार हैज़ाम अमिरा-फ़र्नांडिस का कहना है कि ये 'विरोधाभास ख़तरनाक़' है.

अमरीकी एयर बेस

पेंटागन भी चिंतित

मध्य-पूर्व में क़तर अमरीका का महत्वपूर्ण सैन्य साझेदार है. अमरीका का यहां मुख्य एयरबेस है जहां उसके 10,000 सैनिक तैनात हैं.

उत्तरी अफ़्रीका से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया तक के 17 देशों तक अमरीका यहीं से सैन्य अभियानों को अंजाम देता है.

इसी एयरबेस से वो सीरिया, इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में तथाकथित इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ कार्रवाई करता है.

ट्रंप के बयान से ठीक पहले पेंटागन ने एक बयान जारी कर अमरीकी सैन्य पार्टनर के रूप में क़तर के महत्व पर ज़ोर दिया और संकट पर चिंता ज़ाहिर की.

पेंटागन के प्रवक्ता ने कहा कि इससे इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ लड़ाई पर असर पड़ेगा.

क्या क़तर-अमरीका की साझेदारी संकट में है?

क़तर

यह संकट पिछले सोमवार को तब शुरू हुआ जब सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, यमन और लीबिया ने ये कहते हुए क़तर से सारे संबंध तोड़ लिए कि वो क्षेत्र में अशांति फैला रहा है और चरमपंथी समूहों को मदद दे रहा है.

इसके दूसरे दिन ट्रंप ने ट्विटर पर कई संदेश पोस्ट किए. माना जाता है कि इन संदेशों में सऊदी अरब और अन्य देशों का असर था.

इससे कई हलकों में ये संदेश गया कि दोनों देशों के बीच साझेदारी संकट में है.

हैज़ाम अमिरा-फ़र्नांडिस के अनुसार, दोहा को लेकर अमरीका की ओर से आए अलग-अलग बयानों के कारण पसोपेश की स्थिति बन गई है, जो ख़तरनाक़ है.

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