'...क्योंकि सरकारें कभी झूठ नहीं बोला करतीं'

    • Author, वुसतुल्लाह ख़ान
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू संवाददाता, कराची
  • प्रकाशित

हम बचपन से सुनते आ रहे हैं और अपने बच्चों को भी यही बताएंगे कि झूठ बोलना अच्छा नहीं होता, सत्य में ही जीत है.

अगर वाकई ये कोई सच है तो फिर हमारे और आपके साथ व्यक्तिगत स्तर पर ही क्यों लागू होता है? राज पाट को इस बात पर इतना विश्वास क्यों नहीं?

राज अपने लोगों से ये उम्मीद क्यों रखता है कि राष्ट्रीय हित में जो भी बोला जाए, उसे सच और झूठ की बहस में पड़े बगैर एकदम कबूल कर लो, इसमें सबका भला है.

मसलन यही कि परमाणु बम, शांति बनाए रखने के लिए ज़रूरी है. अरे साहब डरिए नहीं, ये कोई तोप टैंक थोड़े ही, ये तो बस हिफ़ाज़ती उपकरण है.

ये कोई युद्धपोत थोड़े है, स्ट्रैटजिक नेवल प्लेटफ़ॉर्म है. बस एक दो तोपें-वोपें लगा लेते हैं, ताकि कोई परिंदा पास नहीं फटके.

अरे इसे फ़ाइटर जेट मत समझिए, ये तो एयर बोर्न प्लेटफ़ॉर्म यानी हवाई मंच है. जिसमें एक दो मिसाइल भी फ़िट हो जाते हैं, वो भी आक्रमण के लिए नहीं, बल्कि अपनी रक्षा के लिए.

हम किसी देश के अंदरूनी मामलों में दखलंदाज़ी नहीं करते. हम अच्छे हमसायों की तरह रहना चाहते हैं, जियो और जीने दो.

राज और क़ानून की नज़र में सब बराबर हैं. राज किसी से भेदभाव नहीं करता. हम सबका विकास चाहते हैं, ये एक ही राष्ट्र है.

हिंदू, मुसलमान, सिख और ईसाई तो इस राष्ट्रीय गुलदस्ते के फूल हैं, जिनकी अपनी अपनी खुशबू है.

हमारे यहां मानवाधिकारों का पूरा पूरा पालन किया जाता है. आप क़ानून के दायरे में रहेंगे तो राज भी आपको तंग नहीं करेगा.

अब देखिए ना, इक्का दुक्का घटनाएं तो हर जगह घट ही जाती हैं. पाँचों उंगलियाँ बराबर नहीं होतीं, मगर राज्य के लिए सभी बच्चों की तरह हैं.

जितना नवाज़ शरीफ या नरेंद्र मोदी का इस देश और यहां की सुविधाओं पर हक़ है, उतना ही उनके चपरासी का भी हक़ है. अब थोड़ी बहुत ऊँच नीच तो हो ही जाती है, वो तो घर के अंदर भी हो जाती है.

भारत भी चाहता है कि आपसी संबंधों को बढ़ावा मिले, पाकिस्तान भी यही चाहता है.

ईरान में भी मानवाधिकारों को पूरा पूरा सम्मान दिया जाता है और चीन में भी सुरक्षा बल कभी किसी बेगुनाह को निशाना नहीं बनाती.

अमेरिका भी पूरे विश्व में अमन, शांति, ख़ुशहाली और कुशल मंगल चाहता है और फ्रांस भी हर देश को फलते-फूलते देखना चाहता है.

अगर ये वाकई सच है और ये सब सच बोल रहे हैं तो फिर झूठ कौन बोल रहा है, ज़ाहिर है कि मैं.

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