माहवारी के समय औरतों को छुट्टी मिले या नहीं?

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ब्रिटेन की एक कंपनी ने माहवारी के दौरान अपनी महिला कर्मियों को छुट्टी देने और काम के घंटों में बदलाव करने की भी सुविधा दी है.

बीबीसी ने इस पर अपने पाठकों से राय मांगी कि क्या भारत में भी महिलाओं को माहवारी के दौरान छुट्टी मिलनी चाहिए?

बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक पन्ने पर हमें इस पर कई कमेंट्स मिले और महिलाओं ने भी इस बहस में हिस्सा लिया.

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अनीता प्रियदर्शिनी लिखती हैं, "हां छुट्टी बिलकुल मिलनी चाहिए. इसके विरोध में जो भी हैं उन्हें अपना ज्ञान बढ़ाने की ज़रूरत है. जो नारी आपको इस दुनिया में लेकर आती है आपका अस्तित्व जिसकी देन है उसके लिए आप थोड़ा भी सहयोग करने को तैयार नहीं?"

मनीषा खत्री लिखती हैं, "हां, माहवारी के दौरान महिलाओं को बिलकुल छुट्टी मिलनी चाहिए. लेकिन भारत में प्राइवेट कंपनियां महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान तक तो छुट्टियां देती नहीं, ऐसे में उनसे ये उम्मीद करना बेकार है कि माहवारी की छुट्टियां मिलेंगी."

संजय सिलस्वाल लिखते हैं, "माहवारी के दौरान छुट्टियां ज़रूर मिलनी चाहिए. इससे महिलाओं की कार्यक्षमता बढ़ेगी. जो पुरुष इस तरह के प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं वो उनका अहम मात्र है. महिलाओं को भी इस सोच से उबरना पड़ेगा कि ये कोई छिपाने वाली बात है. मेरे हिसाब से ऑफ़िस के फर्स्टएड बॉक्स में पैड्स रखने का सुझाव अच्छा है."

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आशुतोष कुमार सिंह भी मानते हैं कि माहवारी के दौरान महिलाओं को छुट्टी मिलनी चाहिए. उन्होंने लिखा,"महिला स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह बहुत ज़रूरी है कि सरकार इसका ध्यान रखे. स्वस्थ भारत अभियान का राष्ट्रीय संयोजक होने के नाते मै सरकार से मांग करता हूं कि वो माहवारी के दौरान महिलाओं को छुट्टी दे."

लेकिन कई पाठक महिलाओं को छुट्टियां देने के पक्ष में नहीं हैं और इनमें महिलाएं भी शामिल हैं.

शोभा कौल कहती हैं,"इसमें नियम बनाने जैसी कोई बात नहीं. जिसे उन दिनों में ज़्यादा तकलीफ़ हो, वो महिला छुट्टी ले सकती है लेकिन सोचिए अगर सभी महिला कर्मियों को हर महीने पांच-पांच दिन सिर्फ़ माहवारी के नाम पर छुट्टी दी जाय, तो ये कितना ग़लत होगा."

भारतीय ऑफ़िस

डॉक्टर अनीता जैन कहती हैं, "इसमें एक व्यवहारिक समस्या ये है कि इसका निर्धारण कैसे होगा कि किसी महिला को ये वाकई समस्या है. छुट्टी लेने के लिए इसका दुरुपयोग हो सकता है."

किया राय ने लिखा, "मुझे लगता है जब लड़कियां स्कूल और कॉलेज जा सकती हैं तो माहवारी होने पर ऑफ़िस भी जा सकती हैं. मुझे नहीं लगता कि छुट्टियों की ज़रूरत है. महिला बहुत ताकतवर होती है. इस समस्या का सामना करना उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं."

प्रियेश सहाय भी महिलाओं को छुट्टी देने के पक्ष में नहीं हैं. उन्होंने लिखा, "माहवारी एक प्राकृतिक चक्र हैं अतः ये तो हर महीने आना ही है, तो इससे हर महीने अनावश्यक छुट्टी देनी पड़ेगी. दूसरे पुरुष सहकर्मियों पर काम का भार बढ़ेगा. ऐसा होने पर सहकर्मियों में भेदभाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है."

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