'वो डराना चाहते हैं, वो माइंड गेम खेल रहे हैं'

उमर खालिद
इमेज कैप्शन, उमर ख़ालिद इतिहास में पीएचडी कर रहे हैं.
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"मेरा नाम उमर ख़ालिद है और मैं एक चरमपंथी नहीं हूं." यह कहना है देशद्रोह का आरोप झेल रहे जेएनयू के छात्र उमर ख़ालिद का.

ख़ालिद उन पांच छात्रों में हैं, जिन पर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में कथित तौर पर देश विरोधी नारे लगाने के कारण देशद्रोह का आरोप लगा है.

उन्होंने अपने अन्य साथी समेत मंगलवार रात पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया. फ़ोटोग्राफ़र रोनी सेन ने सभी आरोपियों से राष्ट्रवाद को लेकर उनकी समझ के बारे में बात की.

इतिहास में पीएचडी कर रहे ख़ालिद का कहना है, "वह कह रहे हैं कि मैं एक राष्ट्रद्रोही हूँ. अगर हम राष्ट्रद्रोही हैं, तो मैं कहूँगा कि दुनिया के राष्ट्रद्रोहियों एक हो जाओ. हमारा लोगों के प्रति प्यार और संघर्ष किसी सीमा में बंधा हुआ नहीं है."

मीडिया के एक धड़े ने उन पर पाकिस्तान के चरमपंथी समूह के साथ संबंध होने का आरोप लगाया था. हालांकि सरकार ने बाद में इस रिपोर्ट से इनकार किया.

अनिर्बान कहते हैं कि एक मार्क्सवादी के रूप में वह राष्ट्रवाद में यक़ीन नहीं रखते.
इमेज कैप्शन, अनिर्बान कहते हैं कि एक मार्क्सवादी के रूप में वह राष्ट्रवाद में यक़ीन नहीं रखते.

"वे (सरकार) हमें डराना चाहते हैं और वे माइंड गेम खेल रहे हैं. हम यह चुनौती स्वीकार करते हैं. हम डरेंगे नहीं. हम लड़ेंगे. हमारे कैंपस में हर छात्र को किसी धमकी से डरे बिना अपनी आवाज़ रखनी चाहिए."

पांच छात्र जो पुलिस कार्रवाई में नाम आने के बाद से ग़ायब थे, रविवार रात कैंपस में वापस आ गए थे.

आलोचकों ने राष्ट्रद्रोह के इन आरोपों को अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बताते हुए इसकी निंदा की है पर सरकार ने पीछे हटने से मना कर दिया है और जिन्हें वह 'राष्ट्रविरोधी तत्व' बता रही है, उन्हें सज़ा देने की बात पर अडिग है.

अनिर्बान भट्टाचार्या की भी मंगलवार रात उमर ख़ालिद साथ गिरफ़्तारी हुई है.

अनिर्बान कहते हैं, "एक मार्क्सवादी के रूप में मैं राष्ट्रवाद में यक़ीन नहीं रखता. मैं अंतरराष्ट्रीयवाद में यक़ीन रखता हूँ."

अनिर्बान अपनी पीएचडी चाय बागान के कामगारों पर कर रहे हैं.

अनंत प्रकाश का कहना है कि सरकार देश की विविधताएं ख़त्म करने की कोशिश कर रही है.
इमेज कैप्शन, अनंत प्रकाश का कहना है कि सरकार देश की विविधताएं ख़त्म करने की कोशिश कर रही है.

वह कहते हैं, "अगर कोई मुझसे पूछता है कि मैं राष्ट्रवादी हूँ तो मैैं कहूँगा कि नहीं, मैं राष्ट्रवादी नहीं हूँ. अगर कोई कहता है कि मैं राष्ट्रविरोधी हूँ तो मुझे लगता है कि यह सवाल वाजिब नहीं है."

वह आगे कहते हैं, "हमारी सरकार और राज्य व्यवस्था चाहती है कि छात्र सोचना बंद कर दें. हम एक ऐसे समय में रह रहे हैं, जिसमें हम जैसे ही सोचना शुरू करते हैं, हम राष्ट्रविरोधी हो जाते हैं."

एक और आरोपी अनंत प्रकाश जेएनयू के लॉ ऑफ़ गर्वनेंस से पीएचडी कर रहे हैं.

उनका कहना है, "पूरी दुनिया में इसे लेकर बहस है कि राष्ट्रवाद का मतलब क्या है? इसे लेकर तरह-तरह की परिभाषाएं हैं और दृष्टिकोण हैं."

"कुछ लोगों का कहना है कि पहले राष्ट्र बना और तब राष्ट्रवाद आया. दूसरा दृष्टिकोण यह है कि पहले राष्ट्रवाद था और फिर उससे राष्ट्र की उत्पत्ति हुई."

"कुछ लोगों के लिए राष्ट्रवाद प्रतीकों से जुड़ा है. आप सीमा पर झंडा फहराते हैं तो आप राष्ट्रवादी हैं. फ़ासीवादी सरकारें राष्ट्रवाद से प्रतीकों को जोड़ती हैं."

"भारत में कई राष्ट्रीयताएं हैं लेकिन सरकार सभी चीज़ों को एक करने और विविधताएं ख़त्म करने की कोशिश कर रही है."

रामा नागा जेएनयू छात्र संघ के महासचिव हैं.
इमेज कैप्शन, रामा नागा जेएनयू छात्र संघ के महासचिव हैं.

"हम प्रतीकवाद और राष्ट्रवाद के संकीर्ण विचार से निकलना चाहते हैं. मैं राष्ट्रवाद की अवधारणा को मज़दूर वर्ग और उनके संघर्ष, शोषितों और दलितों (जिन्हें पहले अछूत के रूप में जाना जाता था) और दूसरे वंचित समुदायों की लड़ाई से जोड़कर देखता हूँ.''

रामा नागा राजनीतिशास्त्र के छात्र हैं और जेएनयू छात्र संघ के महासचिव हैं.

वह कहते हैं, "मैं नहीं मानता कि हमें सिर्फ़ देश से प्यार करना चाहिए. हमें इस देश के लोगों से भी प्यार करना चाहिए. मैं तो राष्ट्रवाद के मायने यही समझता हूँ. जेएनयू में हम सभी के लिए लड़ते हैं, जिनमें दलित, मुसलमान और समाज के सभी वंचित तबक़े के लोग शामिल हैं."

"समस्या यह है कि जो कोई भारतीय जनता पार्टी और उनके वैचारिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सोच में फ़िट नहीं बैठता, उन्हें राष्ट्र-विरोधी का तमग़ा दे दिया जाता है."

आशुतोष के मुताबिक़ हम ऐसे समाज के बारे में सोचते हैं, जहां कोई सीमा न हो.
इमेज कैप्शन, आशुतोष के मुताबिक़ हम ऐसे समाज के बारे में सोचते हैं, जहां कोई सीमा न हो.

आशुतोष कुमार जेएनयू के इंटरनेशनल स्टडीज़ में पीएचडी छात्र हैं. उनका कहना है, "मार्क्सवाद के एक छात्र के तौर पर हम दुनिया भर के मज़दूरों की एकता की बात करते हैं. जब हम कहते हैं कि 'दुनिया के मज़दूरों एक हो' तब यह हमारी राष्ट्रवाद की परिकल्पना होती है."

"हम एक ऐसे समाज के बारे में सोचते हैं, जहां कोई सीमा न हो. आज हमारे पास एक ऐसा समाज है, जिसमें एक प्रतिशत लोगों के पास सब कुछ है और वो 99 फ़ीसदी जनता का शोषण करते हैं."

"वही लोग राष्ट्रवाद की परिभाषा तय करते हैं और हमारे ऊपर लादते हैं. हम उनके ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं. बीजेपी और आरएसएस मानती है कि जो कोई भी भारत में पैदा हुआ और धर्म से हिंदू है, भारतीय हो सकता है. हम राष्ट्रवाद की इस अवधारणा को ख़ारिज करते हैं."

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