'बस रोहतक से दुल्हन दिल्ली आ जाए'

जाट प्रदर्शनकारी
इमेज कैप्शन, जाट आरक्षण आंदोलन से हरियाणा के कई ज़िलों में तनावपूर्ण माहौल है.
    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

दिल्ली के रहने वाले पार्थ शर्मा की बारात 24 फ़रवरी को रोहतक जानी है. लेकिन जाट आरक्षण आंदोलन ने उनकी शादी का कार्यक्रम खटाई में डाल दिया है.

यूँ तो रोहतक दिल्ली से सिर्फ़ 80 किलोमीटर दूर है, पर हिंसा और डर के माहौल और बंद रास्तों ने रोहतक को उनकी पहुँच से दूर कर दिया है.

पार्थ चाहते हैं कि उनकी दुल्हन और उसका परिवार ही दिल्ली आ जाए और किसी तरह तय समय पर शादी हो जाए. लेकिन ऐसा होता भी मुश्किल दिख रहा है.

पार्थ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर और मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर समेत तमाम बड़े नेताओं को मदद के लिए ट्वीट किए हैं.

पार्थ शर्मा

लेकिन अभी किसी से कोई भरोसा उन्हें नहीं मिल सका है. पार्थ कहते हैं, "रोहतक जाना तो अब हमारे लिए मुमकिन नहीं है बस किसी तरह दुल्हन के परिवार के ही चार-पाँच लोग दिल्ली आ जाएं और शादी पूरी हो जाए."

ट्वीट करने के सवाल पर वो कहते हैं, "मुझे उम्मीद है कि मदद का कोई रास्ता निकलेगा."

उन्हें लगता है कि उनकी शादी अब वैसी तो नहीं हो पाएगी, जैसा उन्होंने चाहा था, लेकिन अब वो यही चाहते हैं कि जैसे-तैसे शादी हो जाए.

रोहतक बचाओ

उनके ससुर राजीव पांडे रोहतक के मॉडल टाउन इलाक़े में रहते हैं, जो आगज़नी से सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाक़ों में हैं.

पांडे कहते हैं, "मेरी दुकान जल गई. बेटी की शादी की सारी तैयारियां पूरी थीं. सभी को एडवांस दे चुका हूँ. बस चाहता हूँ जैसे-तैसे बेटी की शादी हो जाए. रोहतक में तो मुमकिन नहीं है. बस दिल्ली पहुँचने का कोई रास्ता निकल आए."

रोहतक में जली दुकानें

वह कहते हैं, "सेना के हेलीकॉप्टर बल्लभगढ़ और दिल्ली के लिए खाली उड़ान भर रहे हैं. उन्हीं से कोई मदद मिल जाए या फिर सेना का कोई वाहन दिल्ली जा रहा है, तो उसमें जगह मिल जाए."

पांडे कहते हैं, "यह हमारे परिवार की पहली शादी है. हम बस यही चाहते हैं कि जैसे भी हो चार-पांच लोग 24 तारीख़ से पहले दिल्ली पहुँच जाएं."

उन्हें अफ़सोस है कि दुकानें जलती रहीं और कोई बचाने नहीं आया. पांडे कहते हैं, "अब रोहतक में रहने का मन नहीं है. इस शहर से भरोसा उठ गया है."

वाणी ने लगाई मदद की गुहार

दोस्त के लिए चिंतित

सिर्फ़ पार्थ ही नहीं और भी बहुत लोग हैं जो प्रधानमंत्री और बाक़ी मंत्रियों से मदद की गुहार लगा रहे हैं.

नोएडा में रहने वाली वाणी रोहतक में फँसे अपने दोस्त विशाल सिंह के लिए चिंतित हैं.

उन्होंने प्रधानमंत्री को कई बार ट्वीट करके मदद की गुहार लगाई है.

वाणी बताती हैं, "मेरे दोस्त विशाल सिंह को शीला बाईपास इलाक़े से आगज़नी के कारण भागना पड़ा है. उन्होंने कुछ अन्य लोगों के साथ शरण ली है. अब उनके पास खाने-पीने की चीज़ें नहीं हैं. वह अपने नए ठिकाने की बारी-बारी से रक्षा कर रहे हैं."

वाणी को उम्मीद है कि सरकार उनके दोस्त तक मदद पहुँचा सकेगी.

वे वर्दी पहनने से डर रहे थे

उधर, भारत सरकार के एक मंत्रालय में कार्यरत महिला अधिकारी ने बीबीसी को बताया, "पूरे हरियाणा में यातायात सेवाएं ठप हैं. हमें करनाल से दिल्ली आना था. 12 घंटे से अधिक लग गए."

उन्होंने बताया, "हम करनाल से यमुनानगर होते हुए उत्तर प्रदेश में दाख़िल हुए और फिर दिल्ली आए."

उनके साथ 35 लोगों का प्रतिनिधिमंडल था, जिनमें कुछ विदेशी नागरिक भी थे. सुरक्षा के सवाल पर उनका कहना था, "हमें सुरक्षा तो मिली, लेकिन पुलिसकर्मी सादी वर्दी में थे. वे अपनी वर्दी पहनने से डर रहे थे."

आमतौर पर करनाल से दिल्ली आने में ढाई घंटे का वक़्त लगता है लेकिन हालात ख़राब होने से उन्हें 12 घंटे लगे.

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