फ़ाइलों में दफ़न है नेताजी की मौत का राज़?

नेता जी बोस
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केंद्र सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी सौ फ़ाइलें सार्वजनिक कर दी हैं.

आज़ाद हिंद फ़ौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी फ़ाइलों में क्या है. क्या इनके सार्वजनिक होने के बाद बोस के जीवन के बारे में मौजूद सवालों से पर्दा उठेगा. पर्यटन और संस्कृति मंत्री महेश शर्मा मानते हैं कि ये फ़ाइलें उनका जवाब दे सकती हैं.

बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय ने संस्कृति मंत्री महेश शर्मा से बात की. पढ़ें -

नेता जी सुभाष चंद्र बोस

आज़ादी के महानायक रहे सुभाष चंद्र बोस के बारे में बहुत सारे प्रश्नचिह्न थे, बहुत सारे रहस्य थे. आम देश की जनता और ख़ासकर युवा पीढ़ी, जिसके लिए वे प्रेरणा स्रोत थे, उनके बारे में जानने की इच्छा रखते है.

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके परिजनों से मिले थे, तो उन्होंने वायदा किया कि बहुत जल्दी ही हम नेताजी से जुड़ी सौ फ़ाइलें प्रथम चरण में सार्वजनिक करेंगे. लगभग पांच-सात दिन से मैं उन फ़ाइलों को देख रहा था. उनमें नेताजी के जीवन से संबंधित बहुत सारी बातें, उनके जीवन के संघर्ष उनकी मृत्यु से जुड़े जो बहुत सारे प्रश्नचिह्न थे.

उनके भाई ने लिखा है कि क्या आप मुझे बता सकते हैं कि उनकी मृत्यु कब हुई, कहां पर हुई, किस कारण हुई और देश के प्रधानमंत्री तक ने ये जवाब दिया है कि उनके पास इस बारे में कोई ठोस सबूत नहीं है. जो भी है, परिस्थितिजन्य सबूत है. उनके पास उसके बारे में कोई पुख़्ता जानकारी उपलब्ध नहीं थी.

तो ऐसे बहुत सारे सवाल थे लोगों के मन में, उनके जवाब इन फ़ाइलों में मिल सकते हैं. और फिर मैं समझता हूँ कि हम एक लोकतांत्रिक देश हैं.

आज़ादी की लड़ाई में नेताजी का योगदान कम नहीं था तो उनके बारे में जानने का हक देश की जनता को है.

नेता जी बोस की फ़ाइलें

इन फ़ाइलों में नेता जी की मृत्यु के बारे में जो पत्राचार हुआ वह है. फिर तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने नेताजी की नेशनल आर्मी (आज़ाद हिंद फ़ौज) के ख़ज़ाने में कितना पैसा था, इस पर एक चिट्ठी लिखी है कि मैं समझता था कि इसमें बहुत कुछ निकलेगा लेकिन इसमें कुछ नहीं निकला.

इसके अलावा इन फ़ाइलों में प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री को लिखा नेताजी के भाई का एक पत्र है, उनके संघर्ष के बारे में जानकारी है कि वो किन रास्तों से कहां-कहां गए.

नेता जी परिजन
इमेज कैप्शन, प्रधानमंत्री मोदी के साथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिजन

खोसला और मुखर्जी कमीशन की 990 फ़ाइलें थीं. फिर कुछ और फ़ाइलें हमारे पास गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से भी आ रही हैं. अभी हमने फ़ैसला लिया है कि नेशनल आर्काइव 25 फ़ाइलें प्रतिमाह डिजिटाइज़ करेगा और फिर हम उन्हें सार्वजनिक करेंगे.

प्रधानमंत्री ने इन फ़ाइलों को सार्वजनिक करके हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मज़बूत किया है. अब कांग्रेस उसमें राजनीति ढूंढने का प्रयास करती रहे, तो यह उनके काम करने का तरीका है.

मैं देख रहा था कि नेताजी के रिश्तेदार 30 मिनट तक प्रधानमंत्री से एकांत में गुफ़्तगू करते रहे.

मैं समझता हूं कि सुभाष चंद्र बोस ने देश के लिए जो योगदान दिया है, देश की युवा पीढ़ी को उसे जानने का हक़ है.

(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित)

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