फ़्रांस के राष्ट्रपति आख़िर चंडीगढ़ क्यों आए?

    • Author, संजय शर्मा
    • पदनाम, चंडीगढ़ से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

फ़्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद गणतंत्र दिवस पर बतौर मेहमान भारत पहुँच गए हैं और रविवार को वह सबसे पहले सीधे चंडीगढ़ पहुँचे.

उनका मक़सद फ्रांस और चंडीगढ़ के बीच पुराने संबंधों को और मज़बूत करना है.

जब भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने चंडीगढ़ नाम से पंजाब की नई राजधानी बनाने के बारे में सोचा था तो फ़्रांसीसी आर्किटेक्ट ला कार्बूज़िए को चंडीगढ़ शहर का आर्किटेक्चर तैयार करने की ज़िम्मेदारी सौंपी.

कार्बूज़िए 1952 से 1959 तक रहे और नए शहर की रूपरेखा उन्होंने ही अपनी टीम के साथ तैयार की थी.

फ्रांस्वा ओलांद, फ्रांसीसी राष्ट्रपति

हालाँकि पंजाब से फ्रांस का रिश्ता ला कार्बूज़िए तक ही सीमित नहीं. पहले विश्वयुद्ध के दौरान जर्मन सेना के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए सिख सिपाहियों का जत्था गया था.

वो ब्रिटिश इंडियन आर्मी के सिपाही थे.

यही नहीं, तक़रीबन 200 साल पहले महाराजा रणजीत सिंह ने जब ब्रिटिश इंडयन आर्मी के ख़िलाफ़ अपनी सेना को तैयार करना शुरू किया तो उन्होंने फ्रांसीसी जनरल ज्यां फ्रांस्वा अलार्द की सेवाओें का इस्तेमाल किया था.

ला कार्बूज़िए, फ्रांसीसी वास्तुकार
इमेज कैप्शन, ला कार्बूज़िए, फ्रांसीसी वास्तुकार

जनरल अलार्द रणजीत सिंह के साथ 1822 में ही जुड़े और उनके साथ 1839 में मृत्यु तक रहे.

अलार्द ने चंबा की राजकुमारी भानु पान देई से विवाह किया था और उनके सात बच्चे थे.

रणजीत सिंह की सेना को यूरोपीय तौर तरीके से गठित करने और उस स्तर तक ले जाने का श्रेय जनरल अलार्द को ही जाता है. रणजीत सिंह का राज्य संयुक्त पंजाब से लेकर अफ़ग़ानिस्तान तक फैला हुआ था.

आज का चंडीगढ़
इमेज कैप्शन, चंडीगढ़ एरियल फ़ोटो

जानकार मानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ला कार्बूज़िए से लगाव निज़ी वजहों से भी है. कार्बूज़िए ने मोदी के गृह राज्य गुजरात के अहमदाबाद शहर के आधुनिकीकरण का खाका तैयार कर काम शुरू किया था. उसके साल भर बाद ही चंडीगढ़ की रूपरेखा तय करने के लिए वहां गए थे.

चंडीगढ़ में फ्रांस के साथ रिश्ते का जश्न बड़े स्तर पर मनाया जा रहा है. ये कार्बूज़िए की विरासत को बचाने की कोशिश है.

यहां फ्रांस के साथ मिलकर इस विरासत की सूची तैयार की जा रही है, जिसे यूनेस्को को सौंपा जाएगा. कोशिश यह है कि यूनेस्को चंडीगढ़ को 'हेरिटेज सिटी' का दर्जा दे.

ला कार्बूज़िए की तैयार की हुई डिज़ाइन
इमेज कैप्शन, ला कार्बूज़िए की तैयार की हुई डिज़ाइन

चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ़ आर्किटेक्चर के प्रिंसपल प्रदीप भगत ने बीबीसी से बताया, "यूनेस्को को जून तक काग़ज़ात सौंप देने की संभावना है. यूनेस्को को सौंपी जाने वाला हेरिटेज बिल्डिंग्स की सूची में पंजाब-हरियाणा सचिवालय, विधानसभा और हाई कोर्ट वाला क्षेत्र है जो कैपिटॉल कॉमप्लेक्स के नाम से जाना जाता है."

भगत कहते हैं, "यूनेस्को की मान्यता मिलने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा."

पूरी दुनिया में फैले ला कार्बूज़िए के समर्थकों के लिए चंडीगढ़ दूसरी वजहों से भी महत्वपूर्ण है. इस शहर को सिंधु घाटी सभ्यता के समय तक जोड़ा जा सकता है.

ला कार्बूज़िए का मानना था कि समाज की संरचना में राज्य की भूमिका नहीं हो. उनका मत था कि आर्थिक अफ़सरशाही केवल शहर के प्रशासन की देखरेख करे.

फ्रांस इस शहर को स्मार्ट सिटी बनाना चाहता है. वह एक तकनीकी सर्वेक्षण कर रहा है, जिसका मक़सद दिल्ला -चंडीगढ़ के बीच सेमी-हाई स्पीड ट्रेन चलाना है.

चंडीगढ़ की सुखना झील की पुरानी तस्वीर
इमेज कैप्शन, चंडीगढ़ की सुखना झील की पुरानी तस्वीर

सेमी हाई स्पीड ट्रेन 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चल सकती है. कुछ छोटे मोटे बदलाव कर मौजूदा रेल लाइनों पर ही ये ट्रेनें चलाई जा सकती हैं.

फ्रांस की दिलचस्पी चंडीगढ़ में शुरू से ही रही है. इसने यहां अपनी संस्कृति और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 1983 में ही अलेयांस फ्रांस्वा की स्थापना की थी.

अलेयांस के राजीव भारद्वाज ने बीबीसी को बताया, "इस संस्था में सालाना एक हज़ार लोग फ्रांसीसी भाषा सीखते हैं. वे बाद में मैनेजमेंट और होटल मैनेजमेंट की उच्च शिक्षा के लिए फ्रांस भी जा सकते हैं."

ला कार्बूज़िए के डिज़ाइन के मुताबिक बनाई गई पंजाब विधानसभा (फ़ाइल फ़ोटो)
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ला कार्बूज़िए के डिज़ाइन पर तैयार हो रहा पंजाब-हरियाणा सचिवालय और हाई कोर्ट (फ़ाइल फ़ोटो)
इमेज कैप्शन, ला कार्बूज़िए के डिज़ाइन पर तैयार हो रहा पंजाब-हरियाणा सचिवालय और हाई कोर्ट (फ़ाइल फ़ोटो)

पंजाब विश्वविद्यालय में फ्रांसीसी भाषा का एक अलग विभाग है. प्रोफ़ेसर सिसिलिया एंटनी ने कहा, "यहां 300 छात्र मास्टर स्तर तक फ्रांसीसी भाषा की पढ़ाई करते हैं."

कई स्कूलों में भी फ्रांसीसी भाषा पढ़ाई जाती है.

फ्रांसीसी रिश्ते की छाप पंजाब के कपूरथला में भी दिखती है. यहां मरसयी पैलेस से हूबहू मिलता जुलती एक इमारत है जिसमें फ़िलहाल सैनिक स्कूल चल रहा है.

चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ़ आर्किटेक्चर
इमेज कैप्शन, चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ़ आर्किटेक्चर

चंडीगढ़ ललित कला अकादमी के पूर्व अध्यक्ष और जाने-माने फ़ोटोग्राफ़र दीवान मन्ना बताते हैं कि कुछ साल पहले यहाँ एक ख़ास फ़ोटो प्रदर्शनी लगाई गई थी जिसमें फ्रांस के फ़ोटोग्राफ़रों ने भी हिस्सा लिया था. बाद में ऐसी ही प्रदर्शनी फ्रांस में भी लगाई गई थी.

इस तरह की कोशिशें पहले भी हुई हैं.

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