'जनसंख्या नियंत्रण का तरीक़ा है गर्भपात'

सामाजिक विज्ञान की किताब, छत्तीसगढ़
    • Author, आलोक प्रकाश पुतुल
    • पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

गर्भपात को जनसंख्या नियंत्रण का उपाय बताने वाली 10वीं कक्षा की किताब को लेकर छत्तीसगढ़ में विवाद शुरू हो गया है.

शिक्षा से जुड़े संगठन इसके लिए सरकार की आलोचना कर रहे हैं. सामाजिक संगठन सोशल एंड ज्यूडीशियल एक्शन ग्रुप इस मामले में राज्य सरकार के ख़िलाफ़ हाई कोर्ट में याचिका लगाने की तैयारी कर रहा है.

असल में, छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में जनसंख्या विस्फोट पाठ में जनसंख्या नियंत्रण के लिए गर्भपात को एक तरीक़ा बताया गया है.

पुस्तक के मुताबिक़, "भारत में सुरक्षित गर्भपात के लिए आवश्यक अस्पताल और नर्सिंग रूम की संख्या वृद्धि की आश्वयकता है. इसके द्वारा जन्मदर में कमी की जा सकती है."

इससे पहले भी इसी पाठ्यपुस्तक का एक पाठ विवादों में आया था, जिसमें बेरोज़गारी का एक बड़ा कारण 'महिलाओं द्वारा नौकरी' को बताया गया था.

सामाजिक विज्ञान की किताब, छत्तीसगढ़

इस पाठ में कहा गया था, ''स्वतंत्रता से पूर्व बहुत कम महिलाएं नौकरी करती थीं लेकिन आज सभी क्षेत्रों में महिलाएं नौकरी करने लगी हैं, जिससे पुरुषों में बेरोज़गारी का अनुपात बढ़ा है.''

किताब को लेकर राज्य सरकार से शिकायत करने वाली जशपुर की शिक्षिका सौम्या गर्ग का कहना है कि सरकारी पाठ्य पुस्तकों में इस तरह की गंभीर लापरवाही चिंताजनक है.

सौम्या कहती हैं, ''पिछले 67 सालों में जिन बच्चों को भी यह पढ़ाया गया और उन पर जो प्रभाव हुआ, उनके जो विचार बने होंगे वो समाज के लिए कितने घातक होंगे, इसे समझना मुश्किल नहीं है.''

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के संचालक संजय ओझा के मुताबिक़ यह पाठ्यपुस्तक छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने तैयार की थी.

गौतम बंदोपाध्याय

उनका दावा है कि परिषद नए सिरे से पाठ्यक्रम तैयार करवा रहा है. लेकिन राइट टू एजुकेशन फ़ोरम छत्तीसगढ़ के संयोजक गौतम बंदोपाध्याय इसे नाकाफ़ी मानते हैं.

गौतम बंदोपाध्याय का मानना है कि बाल मनोवैज्ञानिक, शिक्षाविद और समाजशास्त्री संयुक्त रूप से इन पाठ्यक्रमों को तैयार करें, यह तो ज़रूरी है ही लेकिन शिक्षकों का प्रशिक्षण भी ज़रूरी है. इसके अलावा पाठ्यक्रम में महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अतिरिक्त संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए.

इन पाठ्यक्रमों को लेकर महिला संगठनों में भी नाराज़गी है.

वसुधा महिला मंच की डॉक्टर सत्यभामा अवस्थी कहती हैं, ''गर्भपात को जनसंख्या नियंत्रण का उपाय बताना एक ख़तरनाक सोच है. यह महिला अधिकारों का भी हनन है. इसे तत्काल पाठ्यक्रमों से हटाया जाना चाहिए.''

वे मांग करती हैं, "इसके लेखन, प्रकाशन और वितरण करने वाले लोगों की ज़िम्मेदारी तय करके उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई भी होनी चाहिए.''

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