आख़िर असम में राहुल के साथ हुआ क्या था?

    • Author, दिलीप कुमार शर्मा
    • पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का 12 दिसंबर को असम के बरपेटा से जनिया विधानसभा क्षेत्र के मेदेरटरी तक करीब सात किलोमीटर पदयात्रा का कार्यक्रम था.

गुवाहाटी से हेलीकाप्टर के जरिए राहुल स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 11 बजकर 15 मिनट पर बरपेटा के रामराय स्टेडियम के हैलीपैड पर उतरे.

70 फ़ीसदी मुस्लिम आबादी वाले निचले असम का बरपेटा ज़िला कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था. लेकिन अब यहा ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) का बोलबाला है.

राहुल जिस हैलीपैड पर उतरे वो बरपेटा सत्र (मठ) के परिसर के बिलकुल पास था. लेकिन वे मेदेरटरी जाते समय सत्र (मठ) में नहीं गए.

करीब सवा तीन घंटे की पदयात्रा के बाद दोपहर ढाई बजे राहुल मेदेरटरी पहुंचे और वहां एक आम सभा को संबोधित किया.

यहीं वह 'मंदिर' है जिसका जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि संघ के कार्यकर्ताओं ने महिलाओं की मदद से उन्हें मंदिर में नहीं जाने दिया.

असम के मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने रविवार को एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया था.

उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कहने पर कुछ भाजपा समर्थक महिलाएं बरपेटा सत्र के मुख्य द्वार के पास बैठ गईं और इनका मकसद राहुल का विरोध करने था.

मुख्यमंत्री को अपने खुफिया तंत्र से इस बात की ख़बर राहुल के दौरे से एक दिन पहले ही पता चल गई थी.

उन्होंने कहा, "अगर हम चाहते तो राहुल को लेकर सत्र में प्रवेश कर सकते थे, क्योंकि हमारे साथ महिला पुलिस भी थी. लेकिन पदयात्रा से पहले हम टकराव की किसी भी स्थिति का सामना करना नहीं चाहते थे. इसलिए हम उस समय सत्र में नहीं गए. लेकिन वापस लौटने के दौरान शाम को हम राहुल को लेकर सत्र में गए."

राहुल ने वहां माथा टेका और आशीर्वाद लिया. मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राहुल को बरपेटा के लिए रवाना होने से पहले गुवाहाटी में ही इस बात की जानकारी दे दी गई थी.

मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि ज़िला प्रशासन के स्तर पर क्या कमी रही और इस घटना के पीछे किसका हाथ है, इस बात की भी जांच होगी.

दरअसल असम के बरपेटा सत्र (मठ) की स्थापना करीब 500 साल पहले वैष्णव संत श्री श्री माधव देव ने की थी. असम में छोटे-बडे कुल मिलाकर 926 सत्र है. संत महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव और श्री श्री माधव देव ने असम में इन सत्रों की स्थापना की थी.

बाद में उनके अनुयायियों ने कुछ सत्र बनवाए. सत्र के प्रमुख को सत्राधिकारी कहते है. धार्मिक भावनाओं से जुड़े इन सत्रों की बड़ी मानयता है और ये बिना किसी दखलअंदाजी के निश्चित नियम और कायदे के तहत चलाए जाते हैं.

इस पद यात्रा के दौरान राहुल ने रास्ते में पार्टी कार्यकर्ताओं समेत कई लोगों के साथ मुलाकात की और बैठक भी की. उन्होंने बरपेटा और मेदेरटरी के बीच नारायणपुर में स्थित बरपेटा आवासीय विशेष प्रशिक्षण केंद्र में बच्चों के साथ दोपहर का खाना भी खाया.

जबकि बरपेटा सत्र के सत्राधिकारी वशिष्ठ देव शर्मा ने मुख्यमंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है. उन्होंने मीडिया के एक वर्ग से बातचीत में कहा कि सत्र को लेकर राजनीति अच्छी बात नहीं है, सत्र के नियमों को ध्यान में रख कोई भी व्यक्ति यहां आ सकता है.

उन्होंने मुख्यमंत्री की उस बात पर नाराजगी जताई जिसमें कहा गया था कि आरएसएस समर्थित महिलाओं ने सत्र के गेट के पास राहुल का रास्ता रोकना था.

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