गोरक्षक दल के साथ एक रात

गोरक्षा दल
    • Author, सौतिक बिस्वास
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

आधी रात के बाद राजस्थान के एक सुनसान गांव के चौराहे पर अंधेरे में वो बाहर निकलता है.

सर्दियों की आहट लिए यह चांदनी के उजाले वाली एक रात है. पूरा इलाक़ा पहाड़ियों और पेड़ों की छाया में डूबा है.

तभी एक दर्जन से ज़्यादा आदमी भूतों की तरह अंधेरे से प्रकट होते हैं.

राजस्थान के इस इलाक़े में जांच पड़ताल करने वाले नवल किशोर शर्मा चिल्लाते हैं, ''आस पड़ोस में किसी गाड़ी की कोई सूचना?''

बाक़ी आदमी सिर हिला देते हैं और उनमें से एक कहता है, ''अभी तक तो कुछ भी नहीं मिला, आज सब कुछ शांत लगता है.''

किशोर शर्मा

मोटरसाइकिल पर सवार शर्मा गठीले बदन के आदमी हैं. उनके बाल तेल से चमक रहे हैं और उनकी साफ़सुथरी दाढ़ी है. डेनिम की पैंट और हल्के पीले रंग की शर्ट के साथ ख़ाकी रंग का जूता पहन रखा है. उनकी दो पत्नियां और पांच बच्चे हैं.

दिन में वो आजीविका के लिए संगमरमर से देवी देवताओं की छोटी-छोटी मूर्तियां बनाते हैं. रात को वो क़रीब 70 गांवों वाले रामगढ़ इलाक़े में गाय बचाने वाले एक कट्टरपंथी हिंदू समूह के फ़ायर ब्रांड नेता बन जाते हैं.

सप्ताह में वो इसी तरह कई रातें गाय तस्करों पर निगरानी करने वाले अपने 'सिपाहियों' की अगुवाई करते हैं.

भारत में बीफ़ खाने और गायों के क़त्ल पर होने वाली हिंसा के कारण इसी तरह के ग्रुप बढ़ रहे हैं.

पिछले साल सत्ता में आने के बाद सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार ने बीफ़ खाने और गोहत्या पर क़ानून को और सख़्त कर दिया है.

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गाय अब देश में सबसे अधिक ध्रुवीकरण करने वाला जानवर बन चुकी है.

शर्मा के ये 'सिपाही' निम्नवर्ग से हैं, लेकिन निगरानी करने वाले उग्र हिंदू संगठनों बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और शिवसेना के सदस्यों के प्रति समर्पित हैं.

ये सभी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखाओं में जाते हैं.

इनमें से कुछ तो 15 साल की उम्र तक के हैं. इनमें किसान, दुकानदार, अध्यापक, छात्र, डॉक्टर और बेरोज़गार सभी तरह के लोग शामिल हैं.

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जिस रात इस समूह के साथ मैं बाहर गया, मैंने एक टीवी बनाने वाले, एक संस्कृत के टीचर और एक टीवी जर्नलिस्ट को इस समूह में पाया. इनमें दो पॉलिटेक्निक के छात्र भी थे.

वो मुख्यतः शाकाहारी हैं और अधिकांश ने कहा कि वो सेहतमंद ज़िंदगी के लिए गाय का मूत्र पीते हैं.

शर्मा समेत अधिकांश का मानना था कि दादरी की घटना में जिस मुस्लिम आदमी को पीट-पीट कर मार डाला गया उसने वाक़ई में बीफ़ का सेवन किया था और ‘जब लड़ाई होती है तो लोग मरते हैं.’

इन सभी का भरोसा है कि 'गाय माता' ख़तरे में है.

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इनमें से एक सूरज भान गुर्जर का कहना था, 'अगर हमने अभी नहीं रक्षा की तो गाय 20 सालों में ही ग़ायब हो जाएगी.'

ये अलग बात है कि भारत में 10 करोड़ गाय और भैंस हैं और यह दुनिया का अग्रणी दुग्ध उत्पादक देश है.

इसी तरह के मिथकों और जोशो ख़रोश के साथ ये रात-रात भर गाय तस्करों को खोजते फिरते हैं.

वो कहते हैं कि गायों को पिकअप ट्रकों, एसयूवी और यहां तक कि एंबुलेंस और बसों में भरकर पड़ोसी राज्यों में बूचड़ख़ाने तक ले जाया जाता है.

ये सभी लोग लाठी, डंडो, बेसबॉल बैट, हॉकी, पत्थरों, माचिस और डंडों पर हंसिया लगे हथियारों से लैस होते हैं.

कीलों वाली लकड़ी

ये लोग गाड़ियों को रोकने के लिए सड़क पर कीलें बिछा देते हैं और अपनी मोटरसाइकिल पर तस्करों का पीछा करते हैं.

गाय को बचाने की यह लड़ाई थोड़ी अव्यवस्थित सी दिखती है. तस्कर अंधेरे में इनकी ओर फ़ायर करते हैं और अक्सर ही उनकी तेज़ रफ़्तार गाड़ियों का पीछा किया जात है.

टीवी बनाने वाले बाबूलाल प्रजापति कहते हैं, ''हम गोलियों से बचने में एक्सपर्ट हैं. जब तस्कर फ़ायर करते हैं तो हम ज़मीन पर झुक जाते हैं.''

हालांकि इस रात को ऐसी कोई नाटकीय घटना नहीं घटी.

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एक जगह से ग़लत सूचना मिली, किसी ने कुछ दूरी पर जलती रोशनी देखी और ये लोग ज़मीन पर झुक गए. जब टिमटिमाती रोशनी बुझ गई तब पता चला कि यह किसी गाड़ी की नहीं थी.

एक और निगरानी ग्रुप ने एक ट्रक को रोका. लोगों में उत्तेजना बढ़ गई और सभी लोग उस ट्रक पर चढ़ गए लेकिन उन्हें हताशा हाथ लगी. इसमें दिल्ली के बाज़ार के लिए सूअर भर कर ले जाया जा रहा था.

ट्रक के ड्राइवर ज़ाकिर हुसैन से इन लोगों ने पूछा, ''तुम एक मुस्लिम हो और सूअर ले जा रहे हो?''

हुसैन ने व्यंग में कहा, ''मैं जीने के लिए हर चीज़ ढोता हूँ.''

गाय की खोज ख़त्म होने ही वाली थी कि गांव के रास्ते पर चांदनी रात में एक ऊंट गाड़ी आती दिखी. उसे देखकर निगरानी करने वाले उस तरफ़ दौड़ पड़े.

गोशाला

इस समूह का दावा है कि उन्होंने अबतक 18 हज़ार गायों को बचाया है. इन गायों को 1992 में शुरू हुई एक गोशाला में रखा गया.

अधिकांश तस्कर अंधेरे की आड़ में भागने में सफल रहे. इन गायों को ज़िले की दो गोशालाओं में भेजा जाता है.

हालांकि स्थानीय पुलिस स्टेशन का रिकॉर्ड बताता है कि इस साल गाय तस्करी के आधे दर्जन दर्ज हुए और चार तस्कर गिरफ्तार किए गए. पिछले साल इस तरह के सात मामले सामने आए थे.

तस्करों से पकड़े गए क़रीब दर्जन भर वाहन पुलिस स्टेशन में खड़े हैं.

ध्रुव सिंह नाम के एक पुलिसकर्मी कहते हैं, ''गो तस्करी की शिकायतों को हम बहुत गंभीरता से लेते हैं और गाय सुरक्षा दल इसमें हमारी मदद करते हैं.''

हालांकि स्थितियां राज्य की भाजपा सरकार की वजह से और बेहतर हो रही हैं.

बीजेपी नेता

शर्मा कहते हैं, ''हम इन दिनों कड़ी मेहनत कर रहे हैं. हमारी कोशिश लोगों से समर्थन लेने की है. स्थानीय भाजपा विधायक और पार्टी के नेता हमारे इस मिशन में मदद कर रहे हैं. पुलिस हमे गंभीरता से लेती है और अधिकारी हमारी बातों को सुनते हैं.''

पड़ोसी कस्बे अलवर के स्थानीय भाजपा विधायक विधायक ज्ञान देव आहूजा इन गो रक्षकों की मदद करने को लेकर किसी तरह की शर्म महसूस नहीं करते हैं.

उन्होंने मुझे बताया, ''मैं उनको पैसे देता हूँ, उनको समर्थन देता हूँ और गाय के धार्मिक महत्व पर कक्षाएं लेता हूँ.''

गोरक्षा दल

उनकी कक्षाओं में बताया जाता है कि कैलिफ़ोर्निया पूरी तरह गाय के गोबर या गोबरगैस से बनी बिजली से युक्त हो गया है, गाय के दूध में सोना पाया जाता है और विदेशी विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में गायों के मारने से ज्वालामुखी फूटेगा, भूकंप आएगा और सूखा पड़ेगा.

वो कहते हैं, ''फिर भी, भारत में गाय को पर्याप्त अहमियत नहीं दी जा रही है. इसीलिए मैं इन गोरक्षकों का समर्थन करता हूँ. उनका एक मिशन है. यह भारत की आत्मा बचाने का मिशन है. यह हिंदुत्व के बारे में है.''