पहले सूखे अब बाढ़ ने किसानों को किया बर्बाद

बाढ़ से सौराष्ट्र में तबाह हुए किसान
    • Author, अंकुर जैन
    • पदनाम, अमरेली से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र की सबसे बड़ी तबाहियों में से एक का सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को झेलना पड़ा है.

भारी बारिश की वजह से अमरेली और भावनगर के करीब 8 सौ गांव पानी में डूबे हुए हैं.

सौराष्ट्र में 8 घंटे के अंदर करीब 35 इंच तक बारिश हुई.

बड़ा नुकसान

बारिश और बाढ़ से सौराष्ट्र में हुई तबाही

बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित अमरेली जिला है, जहां खेती की डेढ लाख हेक्टयर जमीन को बुरी तरह नुकसान हुआ है.

भारी बारिश की वजह से आई बाढ़ के चलते 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई.

इस आपदा में 5 हज़ार से ज्यादा जानवरों ने भी जान गंवाई.

अमरेली के अध्यापक और पर्यावरण के लिए काम करने वाले मनोज जोशी कहते हैं, "सावरकुंडला और लिम्बडी जैसे इलाकों में 10 से 15 फुट तक गाद जमा हो गई है. ज्यादातर मामलों में किसान अगले 5 से 10 साल तक खेती नहीं कर पाएंगे."

किसान तबाह

सौराष्ट्र में बाढ़ से खेतों को हुआ नुकसान

पानी की कमी और खारी मिट्टी होने की वजह से इस क्षेत्र के किसान ज्यादातर एक ही फसल उगाते हैं, जो मानसून के पहले लगाई जाती है.

सावरकुंडला के मगन सालिया कहते हैं, " ये क्षेत्र कपास और मूंगफली के लिए पहचाना जाता है. कई लोगों ने आम भी उगाने शुरु कर दिए हैं लेकिन ये कुछ गांवों तक सीमित है. लेकिन, इस बार मानसून सबकुछ बहाकर ले गया."

खिजाडिया गांव में एक फॉर्म के मालिक नानजीभाई पटेल कहते हैं, " मैंने कपास की खेती के लिए बीज और दूसरा सामान खरीदने के लिए एक लाख रुपये का कर्ज लिया था. लेकिन बाढ़ ने खेत को तबाह कर दिया, मेरा घर और मेरे जानवर बहा ले गई. "

मानसून के आने के 11 दिन के अंतर क्षेत्र में औसतन सालाना होने वाली बारिश का 37.37 फीसदी पानी पड़ चुका है. इस क्षेत्र के अधिकतर डैम में पानी ओवरफ्लो की स्थिति में है.

मुआवजा

राज्य सरकार ने बारिश और बाढ़ में मरने वाले लोगों के परिजन के लिए 4 लाख मुआवजे के एलान किया है.

अमरेली के कलक्टर एचआर सुतार कहते हैं, " हम जानते हैं कि इस आपदा में सबसे ज्यादा नुकसान किसानों का हुआ है. हम नुकसान का जायजा लेने के लिए सर्वे शुरु कर चुके हैं और हम उन्हें समुचित मुआवजा देंगे. "

राज्य की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने भी एलान किया है कि किसानों को किसानों को जो नुकसान हुआ है, उसकी भऱपाई की जाएगी.

कपास की खेती करने वाले कालूभाई परमार कहते हैं, " किसानों को उम्मीद है कि स्थानीय निकाय के चुनाव करीब होने की वजह से सरकार उन्हें समुचित मुआवजा देगी"

चुनाव से आस

बाढ़ से सौराष्ट्र में नुकसान

253 नगरपालिकाओं, 208 तालुका पंचायतों, 26 जिला पंचायतों और 6 महापालिकाओं के चुनाव इस साल अक्टूबर में होने की उम्मीद है.

फिलहाल, राज्य सरकार बाढ़ पीड़ित परिवारों को प्रति व्यक्ति 60 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दे रही है.

वन्यजीव और पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य करने वाले राजन जोशी कहते हैं," सौराष्ट्र गुजरात में किसानों की खुदकुशी की राजधानी है. किसानों ने बरसों सूख जैसी स्थिति से संघर्ष किया है. अभूतपूर्व बाढ ने उन्हें सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई है. अगर सरकार इस नुकसान को नहीं झेलती तो उनके लिए परिवार का पेट भरना मुश्किल हो जाएगा क्योंकि उनमें से कई ने ऊंची दर पर कर्ज लिया है."

बीते चार सालों में गुजरात में करीब 90 किसानों ने खुदकुशी की है. इनमें से सौराष्ट्र के जामनगर, जूनागढ़ और अमरेली में 66 किसानों ने खुदकुशी की है.

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