रामपुर धर्मांतरण मुद्दा: असल फ़ायदा किसका?

रामपुर में वाल्मीकि समुदाय के लोग
    • Author, अतुल चंद्रा
    • पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

उत्तर प्रदेश के रामपुर में वाल्मीकि समुदाय का अपने घरों को बचाने का आंदोलन छह अप्रैल से 16 अप्रैल तक चला.

दस दिन तक चले इस संघर्ष में न केवल अखिलेश सरकार के शहरी विकास मंत्री मोहम्मद आज़म खान की तीखी आलोचना हुई बल्कि इस मामले को शहर में वाल्मीकि समुदाय की जीत के तौर पर भी देखा गया.

ये सब उस रामपुर शहर में हुआ जहां आज़म खान का वर्चस्व माना जाता है.

वाल्मीकि समुदाय के लोगों के मकान गिराए जाने वाला मसला धर्म परिवर्तन के मामले में ऐसा बदला कि संघर्ष का रंग ही बदल गया.

इस पूरे मुद्दे में जहाँ एक ओर दलित राजनीति का पहलू था तो धर्म परिवर्तन की धमकी से उसमें हिंदुत्व का पक्ष ज़ुड़ गया. तो फिर असल जीत किसकी हुई.

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रामपुर में वाल्मीकि समुदाय के लोगों का आंदोलन

वाल्मीकि समुदाय के लोगों को उम्मीद थी कि अगर वो इस्लाम धर्म स्वीकार कर लेंगें तो 'आज़म खान मान जाएंगे' और उनके घरों को तोड़ा नहीं जाएगा.

जिस दिन प्रशासन ने वाल्मीकि समुदाय के लोगों की सभी मांगें मान लीं, उस दिन आज़म को ये कहना पड़ा कि अगर देश को उनसे इतना ख़तरा है तो वे अपने परिवार के साथ किसी और देश में पनाह लेने को तैयार हैं.

ये पहला मौका नहीं था जब आज़म विवादों में आए, चाहे दलित लेखक कँवल भारती का मामला हों या फिर फेसबुक पर आज़म के विरुद्ध टिप्पणी करने वाले ग्यारहवीं कक्षा के छात्र की गिरफ्तारी का मसला हो, कहते हैं आज़म ने जैसा चाहा वैसा ही हुआ.

दलित वोट

अखिलेश यादव

यहां तक कि गलत वजहों से चर्चा में रही उत्तर प्रदेश पुलिस ने कुछ ही दिनों में चोरी की गई आज़म ख़ान की भैंसों को भी खोज निकाला था.

लेकिन इस बार वाल्मीकि समुदाय के लोगों के आगे प्रशासन को झुकना पड़ा. और उनकी इस हार से समाजवादी पार्टी ने भी दलित वोटों को आकर्षित करने का मौका खो दिया.

2017 में होने वाले चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक दलों ने दलितों को जीतने के लिए 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के मौके का पूरा फायदा उठाया.

धर्म परिवर्तन

धर्मांतरण
इमेज कैप्शन, उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण राजनीतिक रूप से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है.

समाजवादी पार्टी भी उसमें पीछे नहीं रही. 2012 में अखिलेश ने अंबेडकर की पुण्यतिथि पर छह दिसंबर को होने वाले जिस सार्वजनिक अवकाश को निरस्त कर दिया था उसे दोबारा शुरू करने की घोषणा उन्होंने अंबेडकर जयंती पर कर दी.

लेकिन अखिलेश वाल्मीकि समुदाय के लोगों के घर गिराए जाने या उनके धर्म परिवर्तन के बारे में खामोश रहे. वहीं कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी उनकी मदद में आगे रहीं.

वैसे तो उत्तर प्रदेश में वाल्मीकि समुदाय के लोगों की संख्या बहुत कम है लेकिन चुनाव के वक्त दलित वोटों की अहमियत बढ़ जाती है.

'साध्वी ने हमारी मदद की'

मुलायम सिंह के साथ आज़म खान.

यह पूछने पर कि उनके संघर्ष में सबसे ज़्यादा साथ किसने दिया, एक व्यक्ति कुमार एकलव्य ने कहा, "हमारे संघर्ष में सबसे ज्यादा मदद भाजपा ने की. साध्वी निरंजन ज्योति ने तो बुर्का पहन कर तोपखाने में प्रवेश करने की कोशिश भी की लेकिन प्रशासन ने उनको रोक दिया. फिर भी उन्होंने जो भाषण दिया उससे हमें बहुत हिम्मत मिली."

आज़म को समाजवादी पार्टी का मुस्लिम चेहरा कहा जाता है लेकिन सच तो यह है कि मुसलमानों की पसंद के बारे में पक्के तौर से कुछ नहीं कहा जा सकता.

धर्मांतरण

देखा गया है कि आज़म खान से जुड़ी किसी बात पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव या सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव उनसे कुछ भी कहने से कतराते हैं.

रामपुर के वाल्मीकि समुदाय के लोगों का संघर्ष यदि एक तरफ दलित राजनीति का पहलू था तो धर्म परिवर्तन की धमकी ने उसमें हिंदुत्व का पक्ष भी जोड़ दिया.

दोनों ही दृष्टिकोण से समाजवादी पार्टी को नुक़सान पहुंचेगा. फिलहाल तो भाजपा अपनी इस छोटी जीत पर खुश है.

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