उदयपुर का दिव्य मदर मिल्क बैंक

    • Author, आभा शर्मा
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

26 वर्षीय रेखा छेड़वाल साल भर से हर रोज़ सुबह अपने घर से पैदल चलकर काम पर जाती हैं. बिला नागा- ये कोई ऐसा काम नहीं जिनसे उन्हें तनख़्वाह मिलती हो. हां, सुख ज़रूर मिलता है- मुस्कराते हुए कहती हैं रेखा. उनका काम है उदयपुर के दिव्य मदर मिल्क बैंक में जाकर अपना दूध दान देना.

क्या उन्हें हिचक नहीं होती अपना दूध किसी और बच्चे को देते हुए.

" बिल्कुल नहीं, यह काम तो हर माँ कर सकती है जिसे दूध उतर रहा हो. मेरे दूधदान से मेरे बच्चे के लिए कभी दूध कम नहीं हुआ."

कंकु बाई, राजस्थान
इमेज कैप्शन, कंकू बाई को दूध बैंक से लाभ मिला है.

रेखा कई औरतों के लिए किसी फ़रिश्ते से कम नहीं है. चित्तौड़गढ़ की 25 वर्षीय कंकू बाई दो साल पहले अपनी पहली संतान खो चुकी हैं. दूसरी बच्ची अभी हुई है पर बेहद कमज़ोर है और उस पर मुश्किल यह है कि वो उसे अपना दूध भी नहीं पिला पा रही हैं. डाक्टर की सलाह है कि बच्ची को माँ का दूध ही देना बेहतर होगा.

कंकू बाई कहती , "एक छटपटाहट मुझे दिन-रात रहती है कि कब मैं उसे दूध पिला सकूंगी. हालांकि मैं शुक्रगुज़ार हूँ उन माँओं का जिनके दूध से मेरी बच्ची ज़िंदा तो है."

26 वर्षीय सीता कंवर को जब बेटी हुई तो उन्हें दूध की कमी नहीं थी पर बच्ची इतनी कमज़ोर थी कि स्तनपान नहीं कर पाई. जब ताकत आई तब तक सीता का दूध सूख चुका था.

जागरूकता की कमी

दूध बैंक, राजस्थान

पेशे से फ़िज़ियोथेरेपिस्ट डॉक्टर ज्योति जैन कहती हैं, "पहले महीने में तो हर स्वस्थ माँ के पास इतना दूध होता है कि वो बहुत आराम से इसका कम से कम 25 प्रतिशत दान कर सके. आखिर इसमें तो देने वाले और पाने वाले दोनों का ही भला है."

सीसारमा गाँव की दो बेटियों की 24 वर्षीय माँ सोनू नागदा भी एक साल से अपने दूध का दान कर रही है.

उनका कहना है, "मेरी आँखों में उन बच्चों की तस्वीर रहती है जो माँ के दूध को तरसते हैं. मुझे बहुत सुकून मिलता है यह सोचकर कि मेरा दूध किसी बच्चे के शरीर में जान फूंक देगा. उसे 'जिवा' देगा."

मिल्क बैंक, राजस्थान

मिल्क बैंक के संस्थापक योगगुरु देवेन्द्र अग्रवाल कहते हैं कि दो साल में 1700 माँओं की मदद से करीब 890 नवजात शिशुओं की जान बचाई गई है.

भारत मे शिशु मृत्यु दर एक बड़ी चुनौती है. जानकार कहते हैं कि नवजात शिशुओं को अगर माँ का दूध कम से कम पहले छ महीने तक दिया जाए तो इस दर को बदलने में भारी मदद मिल सकती है.

ऐसे में ये मिल्क बैंक और यहां बिना किसी नफ़ा- नुकसान की परवाह किए बगैर नौजवान माँए एक नई तरह की क्रांति के बीज बो रही है.

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