रेप की घटनाओं पर ममता क्यों उदासीन?

बलात्कार, विरोध प्रदर्शन
    • Author, शुभज्योति घोष
    • पदनाम, बीबीसी बांग्ला संवाददाता
  • प्रकाशित

पश्चिम बंगाल के नदिया ज़िले के राणाघाट में एक मिशनरी स्कूल में नन के साथ हुई बलात्कार की शर्मनाक घटना के बाद पूरे भारत में बहस छिड़ी हुई है.

कई लोग इसे सीधे तौर पर ईसाई समुदाय पर हमला क़रार दे रहे हैं.

लेकिन राणाघाट में 70 साल से भी ज़्यादा उम्र की एक नन के साथ हुए बलात्कार को सिर्फ ईसाई समुदाय पर हमले के तौर पर देखा जाना शायद ठीक नहीं होगा.

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बलात्कार, अभियुक्त, विरोध, सीसीटीवी फुटेज़
इमेज कैप्शन, राणाघाट की घटना के सीसीटीवी फुटेज़.

हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल में बलात्कार के जितने भी मामले हुए हैं, उनके मद्देनज़र ये सवाल उठता है कि इन मामलों की जांच, अभियुक्तों को सज़ा दिलाने की हद तक क्यों नहीं बढ़ पाती है.

जिन्होंने बलात्कार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई, उल्टे उन्हीं के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है.

अतीत में खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बलात्कार का विरोध करने वालों को 'माओवादी' कहकर ख़ारिज करने की कोशिश की.

'रेप कल्चर'

बलात्कार, विरोध प्रदर्शन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, राणाघाट बलात्कार मामले को अंज़ाम देने वाले अभियुक्तों के तौर तरीके कुछ इस तरह से थे, मानो उन्हें किसी का डर ही नहीं हो.

ये मामला पश्चिम बंगाल में बलात्कार में शामिल अभियुक्तों को मिल रहे कथित सरकारी संरक्षण की ओर इशारा करता है.

तीन साल पहले कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में <link type="page"><caption> सुज़ेट जॉर्डन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2015/03/150313_suzzette_jordan_va.shtml" platform="highweb"/></link> नाम की एक महिला के बलात्कार को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 'मनगढंत घटना' क़रार दिया था.

पार्क स्ट्रीट मामला

सुज़ैट जॉर्डन
इमेज कैप्शन, पार्क स्ट्रीट मामले की पीड़िता सुज़ैट जॉर्डन का पिछले हफ्ते देहांत हो गया.

ममता बनर्जी की पार्टी की एक महिला सासंद ने इस वाकये को 'ग्राहक और खरीदार के बीच पैैसे को लेकर हुई अनबन का नतीजा' बताया था.

सुज़ेट जॉर्डन की पिछले हफ्ते मौत हो गई, लेकिन पुलिस इस मामले में किसी भी प्रमुख अभियुक्त को अभी गिरफ़्तार नहीं कर पाई है.

कई लोगों का ये भी आरोप है कि सरकार बलात्कार के अभियुक्तों को बचाती हुई दिखती है.

तापस पाल प्रसंग

तृणमूल सांसद और फिल्म अभिनेता तापस पाल, विरोध प्रदर्शन

पार्क स्ट्रीट की घटना के बाद बंगाल में बलात्कार के जितने भी मामले हुए हैं, जैसे कामदुनी, बारासात या धूबगुड़ी, सभी में प्रशासन पर अभियुक्तों के प्रति नरमी बरतने के आरोप लगे.

ममता जब कामदुनी गई थीं तो गांव के लोगों ने उनके सामने विरोध मार्च किया था. लेकिन मुख्यमंत्री ने उन्हें वामपंथियों और माओवादियों का एजेंट क़रार दे दिया.

तृणमूल के एक सांसद और फ़िल्म अभिनेता तापस पाल ने पिछले साल अपने विरोधियों के घर लड़के भेजकर बलात्कार करवाने की धमकी दी थी.

विरोध का माहौल

ममता बनर्जी

बाद में तापस पाल ने पार्टी से एक चिट्ठी लिखकर इसके लिए माफी मांग ली. हालांकि इस मामले में अदालत के निर्देश के बाद उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराई गई थी.

बलात्कार की घटनाओं के सिलसिलों को देखें तो पश्चिम बंगाल में इसको लेकर विरोध का माहौल बनता जा रहा है. राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि सरकार इसकी आंच में झुलस भी सकती है.

राणाघाट में ममता जब संवेदना प्रकट करने गईं तो उन्हें लोगों के घेराव और 'ममता वापस जाओ' जैसे नारों का सामना करना पड़ा.

सीबीआई जांच

सीबीआई

ममता ने इसे पहले की तरह बीजेपी और सीपीएम की साजिश बताया. लेकिन बाद में उन्होंने राणाघाट मामले की जांच की ज़िम्मेदारी सीबीआई को सौंप दी.

पश्चिम बंगाल में एक महिला मुख्यमंत्री का शासन है और लोगों को बलात्कार के मामले में उनसे अधिक संवेदनशील बर्ताव की उम्मीद रहती है, लेकिन वे इसमें खरी साबित होने में नाकाम होती हुई अब तक दिखी हैं.

राणाघाट की शर्मनाक घटना के बाद सरकार का रुख बदलेगा या नहीं, यह लाख टके का सवाल है और इसका जवाब केवल ममता बनर्जी के पास ही है.

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