मातृभाषा क्यों नहीं सीखते नवीन पटनायक?

    • Author, संदीप साहू
    • पदनाम, भुवनेश्वर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

नवीन पटनायक ने भारतीय राजनीति में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं लेकिन सबसे चौंकाने वाला यह है कि पूरे देश में वह अकेले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो राज्य की भाषा न बोल पाते हैं न पढ़-लिख सकते हैं.

इससे भी ज़्यादा आश्चर्य की बात यह है कि ओड़िया से परहेज़ के बावजूद यहां के लोग पिछले 15 साल में उन्हें लगातार चार बार जिता चुके हैं और हर बार पहले के मुक़ाबले अधिक मतों से.

'और थोड़ा वक़्त लगेगा'

आम सभाओं में जब नवीन कागज़ पर रोमन लिपि में लिखा हुआ 'ओड़िया' भाषण अपने दून स्कूल के लहज़े में पढ़ते हैं तो अलग ही नज़ारा पेश करते हैं.

हर दूसरे वाक्य में वह ओड़िया भाषा का कबाड़ा करते हैं. कभी बारिपदा (एक शहर का नाम) को बाड़ीपड़ा (जो ओड़िया में एक गाली है) कहते हैं, तो कभी 'प्रतारणा' (धोखा) को 'प्रार्थना' पढ़ जाते हैं.

यह हाल तब है जब कि उनके ओड़िया भाषण लिखने वाले अधिकारी इस बात का पूरा ख़्याल रखते हैं कि जिस भी शब्द के उच्चारण में उन्हें तकलीफ की तनिक भी सम्भावना है, वह अंग्रेज़ी में हो.

हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान कागज़ के सहारे के बिना वह एक वाक्य ज़रूर कहते हैं, "भाई ओ भौणि माने, आपण मानंकु समस्तंकू मोर नमस्कार" (बहनों और भाइयों, आप सभी को मेरा नमस्कार).

अगर आप सोच रहे हैं कि ओड़िया भाषा की इस तरह 'तौहीन' से लोग उनसे नाराज़ होते हैं, तो आप कभी उनकी सभा में आइए, आपका भ्रम दूर हो जाएगा.

कोई अन्य राजनेता अगर स्थानीय भाषा की तौहीन करता तो शायद उस पर पथराव होता या अंडे पड़ते लेकिन नवीन के भाषण पर पत्थर नहीं, बल्कि तालियां गूँजती हैं.

मज़े की बात यह है कि सन 1997 में अपने पहले चुनाव प्रचार में, जब वह अपने पिता बीजू पटनायक के देहांत के बाद आस्का लोकसभा क्षेत्र से उपचुनाव लड़ रहे थे, नवीन एक और वाक्य भी हर आम सभा में बग़ैर किसी मदद के कहते थे.

वह था 'आउ टिके समय लाग़िब' (और थोड़ा वक़्त लगेगा). उनका आशय ओड़िया सीखने से था.

उस उपचुनाव के बाद नवीन ने यह वाक्य कभी इस्तेमाल नहीं किया, जिससे लगता है कि अब ओड़िया सीखने का उनका कोई इरादा ही नहीं है.

'यूएसपी'

हालांकि ऐसा नहीं है कि नवीन ने ओड़िया सीखने की कोशिश नहीं की.

सन 2000 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने अंग्रेजी साहित्य के सेवानिवृत प्रोफेसर राजकिशोर मिश्र को अपना ओड़िया शिक्षक नियुक्त किया था. लेकिन उनकी मुख्यमंत्री से कभी कभार ही भेंट होती थी.

मुझे आज भी याद है कि 2000 में ही किसी समय जब मैं नवीन निवास (मुख्यमंत्री का निवास) गया हुआ था तो मैंने प्रोफेसर मिश्र को बाहर के कमरे में अख़बार पढ़ते हुए पाया.

जब मैंने उनसे पूछा कि वह बाहर क्यों हैं तो उन्होंने कहा कि 'बुलावा' नहीं आया. पता चला कि आम तौर पर यही होता था.

प्रोफेसर मिश्र अपने 'वीआईपी शिष्य' के 'बुलावे' का इंतज़ार करते हुए सभी अखबार पढ़ डालते थे और फिर चले जाते थे.

इसके कुछ ही दिन बाद पता चला कि प्रोफेसर मिश्र ने अपनी इस 'नौकरी' से इस्तीफ़ा दे दिया.

जब इटली से ओडिशी नृत्य सीखने ओडिशा आई इलिआना सीतारिष्टि फर्राटे से ओड़िया बोल लेती हैं तो नवीन क्यों नहीं?

मेरा यह मानना है कि इस सवाल का जवाब नवीन की राजनीति से जुड़ा हुआ है. वह समझ चुके हैं कि ओड़िया न बोल पाना उनकी यूएसपी है और उनकी अपील का एक बड़ा कारण.

नवीन पटनायक निवास

उन्हें लगता है कि जिस दिन वह ओड़िया बोलने लगेंगे, उनमें और दूसरे नेताओं में कोई फ़र्क़ नहीं रह जाएगा.

इस सोच के लिए नवीन को कतई दोषी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि हर चुनाव में नवीन को वोट देकर लोगों ने बार-बार यह साबित किया है कि उनका आकलन बिलकुल सही है.

विडंबना

मनोवैज्ञानिक शायद इसे ओड़िया लोगों की हीन भावना क़रार दें, दूसरी पार्टियों के नेता इसे ओड़िया लोगों की भावनाओं के प्रति नवीन की उदासीनता बताएं - लेकिन लोगों को इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.

सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) के नेता उनके बचाव में कहते हैं कि नवीन ओड़िया भले ही पढ़ न पाते हों, लेकिन वे लोगों की 'मन की भाषा' अच्छी तरह से पढ़ लेते हैं और यही उनकी कभी न घटने वाली लोकप्रियता का कारण है.

विडम्बना यह है कि ओड़िया न जानने वाले नवीन की सरकार में ही ओड़िया भाषा को शास्त्रीय भाषा की मान्यता मिली.

यह बात तय है की जब तक वह चुनाव जीतते रहेंगे, ओड़िया नहीं सीखेंगे. लेकिन अगर कभी हार गए तो हो सकता है कि उन्हें फिर किसी प्रोफेसर मिश्र की ज़रूरत पड़ जाए. और तब शायद 'गुरुजी' का अंदर से बुलावा भी आ जाए.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> आप यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>