परिवार को रेनू पर गर्व है

रेनू खटोर, डलास अमरीका
इमेज कैप्शन, रेनू खटोर अपने भाई राजन माहेश्वरी के साथ
    • Author, अतुल चंद्रा
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

रेनू खटोर को अमरीका के डलास फ़ेडरल रिज़र्व बैंक की नई चेयरमैन बनाए जाने से सबसे ज़्यादा खुशी उत्तर प्रदेश में रहने वाले उनके परिजनों को है.

फर्रुखाबाद ज़िले में रह रहे उनकी माँ स्वर्णलता माहेश्वरी और छोटे भाई राजन माहेश्वरी रेनू की इस नियुक्ति से गर्व महसूस कर रहे हैं क्योंकि "आर्ट साइड (राजनीति शास्त्र) से पढ़ी रेनू डलास के फ़ेडरल रिज़र्व बैंक की चेयरमैन हैं."

वे ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी की पहली महिला चांसलर थीं और पहली प्रवासी थीं जिन्हें यह पद मिला था.

भाई राजन पेशे से वकील हैं. वे अपनी बहन की प्रतिभा और स्वभाव की तारीफ़ करते नहीं थकते.

पढ़ाई में तेज़

अमरीका का झंडा

उन्होंने बीबीसी हिन्दी से कहा, "वो पढ़ने में शुरू से ही तेज़ थीं. 1975 में जब उनकी शादी दिल्ली आईआईटी के टॉपर सुरेश खटोर से हुई तो वे एमए प्रथम वर्ष में थीं. अपने पति की मदद से उन्होंने पर्डयू यूनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र में अपनी पढ़ाई पूरी की."

वो कहते हैं, "उनकी क़ाबलियत के बल पर उन्हें ना सिर्फ़ ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी के चांसलर का पद मिला बल्कि चार अमरीकी विश्वविद्यालयों के प्रेसिडेंट का भी पद सौंपा गया."

अपनी बहन की अभूतपूर्व सफलता के लिए राजन अपने जीजाजी को भी श्रेय देते हैं. वो कहते हैं, "जीजाजी ने दीदी को बहुत सपोर्ट किया और दीदी भी हमेशा इस बात को स्वीकारती हैं."

रोज़ करती हैं बात

रेनू खटोर, राजन माहेश्वरी
इमेज कैप्शन, रेनू खटोर अपने परिवार से सदस्यों के साथ

समय निकालकर रेनू रोज़ अपने परिजनों से बात करती हैं. वो कहते हैं, "उनकी एक ख़ास बात ये भी है की उन्होंने भारतीय सभ्यता को नहीं छोड़ा है. दीदी शुरू से मंगल का व्रत रखती थीं और आज भी मंगल और नवरात्रि के व्रत वो नियम से रखती हैं."

19 नवंबर को जब उन्हें इस नए महत्वपूर्ण पद के लिए नियुक्त किया गया तो उन्होंने उसी दिन अपने घर फ़ोन किया.

राजन कहते हैं कि उस वक़्त भारतीय समय के अनुसार रात के दो बज रहे थे इसलिए उन्होंने अपनी माँ को जगाना उचित नहीं समझा और उनको ही ये ख़ुशख़बरी दी.

फ़ैशन की प्रतीक

शाकाहारी रेनू सिर्फ पढ़ाई में ही प्रतिभावान नहीं हैं. वे फ़ैशन के प्रतीक के रूप में भी ह्यूस्टन के मैगज़ीन के कवर पर आ चुकी हैं.

जब वो फर्रुखाबाद के एनएकेपी डिग्री कॉलेज में पढ़ रही थीं तो वो वहाँ के छात्रसंघ की निर्विरोध अध्यक्ष चुनी गई थीं.

लगभग हर साल भारत आने वाली रेनू अपने अपने विनम्र स्वभाव के लिए सबकी प्रिय हैं.

भारत, अमरीका, झंडा

राजन कहते हैं कि वो इसका इंतज़ार नहीं करती हैं कि लोग उनसे मिलने आएं.

यहां तक कि घर में काम करने वालों के यहां भी यह कह कर चल देती हैं कि "चलो देखें तुम्हारे यहां क्या हाल है."

रेनू पिछले वर्ष अपने भाई राजन के लड़के की शादी में आई थीं और खूब धूम मचाई थी. अब अगले साल मार्च में वो फिर हिंदुस्तान आने वाली हैं.

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