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भारत की अग्नि-5 मिसाइल का इस क्षेत्र में क्या असर हो सकता है
भारत ने बुधवार शाम को ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप से पांच हज़ार किलोमीटर की दूरी तय करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का सफल परीक्षण किया.
भारतीय मीडिया में आई रिपोर्टों के मुताबिक परीक्षण 'नाइट ऑपरेशन मोड' में किया गया. इस दौरान मिसाइल की दिशा और गति तय मानकों पर थी और ये पंद्रह मिनट के भीतर ही अपने लक्ष्य को भेदने में कामयाब रही.
पांच हज़ार किलोमीटर की रेंज वाली ये मिसाइल किसी इंटरकांटिनेंटल (अंतर-महाद्वीपीय) मिसाइल की क़रीब है जिनकी रेंज कम से कम 5500 किलोमीटर होती है.
इस कामयाब टेस्ट का मतलब ये भी है कि अब ये मिसाइल इस्तेमाल में लाने के लिए बिलकुल तैयार है.
भारत और चीन के बीच जारी तनाव के मद्देनज़र रक्षा विशेषज्ञ इस मिसाइल टेस्ट को अहम घटनाक्रम के रूप में देख रहे हैं.
क्या है अग्नि-5 मिसाइल?
भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय की तरफ़ से जारी बयान के मुताबिक ये एक लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है जो पांच हज़ार किलोमीटर दूर अपने लक्ष्य को कामयाबी से भेद सकती है.
यानी इस मिसाइल की रेंज में लगभग पूरा चीन, अफ़्रीका और यूरोप के कुछ हिस्से आ जाएंगे.
परमाणु हथियार ले जाने में सक्षण पचास हज़ार किलो की ये मिसाइल 1500 किलो के हथियार ले जा सकती है.
यानी ये भारत की सबसे शक्तिशाली मिसाइलों में से एक है.
कैनिस्टराइज़ेशन मिसाइल
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक ये मिसाइल कैनिस्टराइज़्ड (डिब्बाबंद) है यानी इसे सड़क और रेल दोनों से लॉन्च किया जा सकता है.
इस मिसाइल की एक और अहम बात ये है कि इस कम समय में आसानी से लॉन्च किया जा सकता है.
कैनिस्टराइज़ेशन मिसाइल को हर मौसम और हालात में सुरक्षित रखने और इसे लांच करने में मदद देता है.
अग्नि-5 का पहली बार परीक्षण साल 2012 में किया गया था. अभी तक इस मिसाइल के लगभग आधा दर्जन टेस्ट किए जा चुके हैं.
लेकिन हालिया लॉन्च बेहद अहम है क्योंकि इसे 'स्ट्रेटजिकल फॉर्सेज़ कमांड' नाम के भारत सरकार के विभाग ने बिना किसी बाहरी मदद के किया है.
स्ट्रेटजिकल फॉर्सेज़ कमांड भारत में परमाणु हथियारों के लिए ज़िम्मेदार है.
भारत ने साल 1989 में अग्नि-1 मिसाइल के साथ अग्नि श्रंखला की मिसाइलों का परीक्षण शुरू किया था. अग्नि-1 मध्यम दूरी की मिसाइल है जिसकी मारक क्षमता लगभग एक हज़ार किलोमीटर है.
उस दौर में सिर्फ़ अमेरिका, पूर्व सोवियत संघ, चीन और फ्रांस के पास ही बैलिस्टिक मिसाइलें थीं.
अब तक भारतीय रक्षा बलों के पास 700 किलोमीटर की रेंज वाली अग्नि-1, 2000 किलोमीटर की रेंज वाली अग्नि-2, 2500 किलोमीटर की रेंज वाली अग्नि-3 और 3500 किलोमीटर की रेंज वाली अग्नि-4 मिसाइलें हैं.
अग्नि-5 की लंबी दूरी और परमाणु क्षमता की वजह से विशेषज्ञों को लगता है कि इस मिसाइल को चीन को ध्यान में रखकर बनाया गया है.
वहीं विशेषज्ञों का ये भी मानना है कि पुरानी अग्नि मिसाइलें पाकिस्तान जैसे करीबी ठिकानों के लिए पर्याप्त हैं.
इसका भारत और क्षेत्र पर क्या असर पड़ेगा?
भारत के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि अग्नी-5 का सफल परीक्षण भारत की 'क्रिटिकल मिनिमम डिटेरेंस' यानी 'विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक' प्रदान करने और पहले इस्तेमाल न करने की नीति के अनुरूप है.
भारत हमेशा से कहता रहा है कि उसका परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम रक्षात्मक है और वो 'फ़र्स्ट स्ट्राइक' के लिए नहीं है.
चीन ने अभी तक भारत के कामयाब मिसाइल टेस्ट पर प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन सितंबर में अग्नि-5 के लांच की मीडिया रिपोर्टों पर टिप्पणी करते हुए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जियो लिजियान ने कहा था कि शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने सभी के हित में है.
उन्होंने कहा था, "हमें उम्मीद है कि सभी पक्ष इसके लिए सकारात्मक प्रयास करेंगे."
मिसाइल लांच को भारत में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है लेकिन कुछ रक्षा विशेषज्ञ इसे बहुत ध्यान से देख रहे हैं.
क्या कहते हैं विश्लेषक
रक्षा विश्लेषक और 'डोरस्टेपः मैनेजिंग चाइना थ्रू मिलिट्री पॉवर' के लेखक प्रवीण साहनी कहना है कि अग्नि-5 का ये कामयाब टेस्ट इस लिए अहम है क्योंकि अब ये मिसाइल सेना के उपयोग के लिए उपलब्ध होगी.
साहनी कहते हैं, "लेकिन सवाल ये है कि चूंकि इसका मुख्य उद्देश्य चीन के ख़िलाफ़ प्रतिरोध प्रदान करना था तो क्या भारत ऐसा करने में कामयाब रहा?"
साहनी कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि ऐसा हुआ है क्योंकि हम ने देखा कि मई 2020 में चीन की सेना आई और भारत की ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर लिया. वो बिलकुल भी बाज़ नहीं आए."
अग्नि-5 भारत को सेकंड स्ट्राइक यानी जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता भी प्रदान करती है.
लेकिन साहनी कहते हैं, "डिटेरेंस ने काम नहीं किया है. जहां तक सेंकड स्ट्राइक की क्षमता का संबंध है, ये भी एक साधारण वजह से काम नहीं करेगा कि चीन के पास भारत के मुक़ाबले काफी अधिक परमाणु क्षमता है."
वो कहते हैं, "तथ्य ये है कि अब ये मिसाइल सेवा में आ जाएगी और इसकी हमें ख़ुशी है लेकिन मुझे लगता है कि भारत को अपने डिलीवरी सिस्टम और अपनी पूरी परमाणु नीति पर पुनर्विचार करने की ज़रूरत है."
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