पश्चिम बंगाल में जय श्रीराम' के नारे से तृणमूल कांग्रेस को दिक़्क़त क्या है? क्या कहती हैं महुआ मोइत्रा

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा
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    • Author, सरोज सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 5 मिनट
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पश्चिम बंगाल चुनाव में 'राम' नाम की ना सिर्फ़ एंट्री हो चुकी है, बल्कि अब इसे एक मुद्दे के तौर पर पेश किया जा रहा है.

हालाँकि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अभी कुछ महीने दूर हैं, लेकिन बीजेपी की चुनावी रैलियों में 'जय श्रीराम' नारे हर दिन सुनने को मिल रहे हैं.

गुरुवार को गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल के दौरे पर थे. उन्होंने वहाँ जनता को रैली में संबोधित करते हुए कहा, "बंगाल के अंदर माहौल ऐसा कर दिया गया है कि 'जय श्रीराम' बोलना गुनाह है. अरे! ममता दीदी, बंगाल में जय श्रीराम नहीं बोला जाएगा, तो क्या पाकिस्तान में बोला जाएगा?"

इसके बाद उन्होंने रैली में मौजूद लोगों से 'जय श्रीराम' के नारे लगवाए और ख़ुद भी लगाए.

ये पहला मौक़ा नहीं है, जब बीजेपी 'जय श्रीराम' के नारे के सहारे तृणमूल कांग्रेस को घेरने की कोशिश कर रही है.

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा

'जय श्रीराम' नारे से तृणमूल कांग्रेस को बैर क्यों?

गुरुवार को बीबीसी ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा से आने वाले बंगाल चुनाव को लेकर एक विस्तृत इंटरव्यू किया.

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सांसद महुआ मोइत्रा से बीबीसी से पूछा, "आख़िर तृणमूल कांग्रेस को 'जय श्रीराम' के नारे से दिक़्क़त क्या है?

महुआ मोइत्रा ने जवाब दिया, "हमें दिक़्क़त नहीं हैं. लेकिन हम क्या बोलेंगे और कैसे अपने धर्म को फ़ॉलो करेंगें, ये हमारा निजी मामला है. जय श्री राम, जय माँ काली, जय माँ दुर्गा बोलने में किसी को कोई दिक़्क़त नहीं है. हम माँ दुर्गा की पूजा करते हैं, माँ काली की पूजा करते हैं, सिंह की सवारी करते हैं. कोई हमें ये नहीं बता सकता कि हम कैसे हिंदू धर्म को मानें. जिनको जय श्रीराम बोलना है, उनको बोलने दें. लेकिन आप आज जय श्रीराम क्यों कहते हैं? आप ख़ुद को हिंदू स्थापित करने के लिए नहीं कहते हैं. आप ये इसलिए बोलते हो क्योंकि देश के अल्पसंख्यक घबरा कर, डर कर दुम पीछे करके छिप जाएँगे. हमें दिक़्क़त इस बात से है."

साफ़ है उनका इशारा बीजेपी की तरफ़ था.

पहली बार लोकसभा में चुन कर आई महुआ मोइत्रा, संसद में अपने भाषणों की वजह से हमेशा से चर्चा में रहती हैं.

ममता बनर्जी

कब-कब नाराज़ हुईं ममता

संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान उन्होंने जो भाषण दिया, उसमें 'जय श्रीराम' का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, "आज केंद्र सरकार ने सुभाष चंद्र बोस के 'जय हिंद' के नारे को एक धार्मिक नारे से बदल दिया है."

पिछले महीने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125 जयंती के मौक़े पर आयोजित भारत सरकार के कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री इस नारे से इतना नाराज़ हो गई कि उन्होंने अपना भाषण ही नहीं दिया.

जब महुआ मोइत्रा से इस बारे में पूछा गया कि क्या ममता बनर्जी का ऐसा करना ठीक था, तो उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री पर मैं टिप्पणी नहीं कर सकती हूँ. लेकिन उन्होंने जो किया वो बिल्कुल सही थी. ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं. जिस कार्यक्रम में वो शामिल हो रही थीं, वो केंद्र सरकार का कार्यक्रम था. केंद्र सरकार चाहती है तो संविधान में संशोधन करे, उनके पास बहुमत है. 'सेक्युलर' शब्द को संविधान से हटा दे. हिंदू राष्ट्र बना दे, फिर कोई दिक़्क़त नहीं होगी. जब तक हमारे संविधान में सेक्युलर शब्द है, आप किसी सरकारी कार्यक्रम में धार्मिक नारे नहीं लगा सकते."

ममता बनर्जी के क़रीबी शुभेन्दु अधिकारी बीजेपी में शामिल हो गए
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ग़ौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में राम के नाम पर राजनीति पिछले कुछ समय से चल रही है.

वर्ष 2018 में रामनवमी के मौक़े पर पश्चिम बंगाल के आसनसोल, रानीगंज, पुरुलिया, 24 परगना में हिंसा फैली थी, जिसने सांप्रदायिक रंग ले लिया था. इसमें कई लोगों की जान भी गई थी.

2019 में ममता बनर्जी तृणमूल के एक धरना कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उत्तर 24-परगना ज़िले के नैहाटी जा रही थीं, उस समय भी उनके काफ़िले के गुज़रते समय जय श्रीराम का नारा लगाया गया था. जिसके बाद वो काफ़ी ग़ुस्से में आ गई थी. उससे पहले पूर्वी मिदनापुर में भी ऐसा ही वाक़या सामने आया था.

जय श्रीराम

'हरे कृष्णा हरे हरे, तृणमूल घोरे घोरे'

लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में 'जय श्रीराम' के नारे का काट भी ढूँढ लिया है.

चुनाव से पहले तृणमूल ने नारा दिया है, 'हरे कृष्णा हरे हरे, तृणमूल घोरे घोरे'.

इस बारे के विधानसभा चुनाव में बीजेपी अगर 'राम' नाम के सहारे है, तो तृणमूल कांग्रेस 'कृष्ण' के नाम के सहारे चल रही है.

पार्टी का नया नारा, हिंदू वोट बैंक को अपने तरफ़ करने का नया तरीक़ा तो नहीं हैं?

इस सवाल के जवाब में महुआ कहती हैं, "ये केवल चुनावी नारा है, इलेक्शन स्लोगन है. हमें आपका (बीजेपी का) स्लोगन नहीं बोलना है. हम अपना स्लोगन कहेंगे. मैं जिस ज़िले से आती हूँ, नदिया से, वहाँ श्री चैतन्या हर घर में वास करते हैं."

राम किसी एक के नहीं हैं. वो बीजेपी के नहीं हैं. वो आरएसएस के नहीं हैं. राम सबके हैं. लेकिन सब अपना निर्णय ले सकते हैं कि राम की पूजा वो कैसे करना चाहते हैं. घर में बोलना चाहें या सड़क पर बोलना चाहें. लेकिन जब हम चाहेंगे, तब हम बोलेंगे, कोई हमें इस बात के लिए विवश नहीं कर सकता कि वो जब चाहेंगे तब ही हमें राम बोलना हैं."

जय श्रीराम

अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण का आरोप

हालाँकि बीजेपी ममता की जय श्रीराम के नारे से नाराज़गी को अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ रही है. ममता बनर्जी की सरकार पर इससे पहले भी ऐसे आरोप लगते रहे हैं.

महुआ ने इसका भी जवाब दिया.

उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल में एक भी स्कीम ऐसा नहीं है, जो सिर्फ़ मुसलमानों के लिए हो. अल्पसंख्यकों के लिए बंगाल में जो बजट है, वो आंध्र प्रदेश और केरल जैसे राज्यों से बहुत कम है. हमारे यहाँ 28 फ़ीसदी मुसलमान रहते हैं. हम किसी का तुष्टिकरण नहीं करते. करीमपुर इलाक़े में मुसलमान बहुसंख्यक हैं. तो किसी स्कीम में ग़रीब को घर देंगें और मुसलमानों को मिलेगा, तो आप ये नहीं कह सकते कि हमने मुसलमानों को घर दिया है. हम ये नहीं कह सकते आपका नाम राम है, तो घर देंगे और रहीम है, तो नहीं देंगे. 10 में छह घर अगर मुसलमानों को मिला, तो ये तुष्टिकरण नहीं है. ये सबकी देखभाल करने की एक प्रक्रिया का हिस्सा है."

आने वाले विधानसभा चुनाव में कई जानकारों का मानना है कि बंगाल में लड़ाई बीजेपी और तृणमूल के बीच ही सिमट कर रह गई है. हालाँकि लेफ़्ट और कांग्रेस ने भी अपने गठबंधन की घोषणा कर दी है. लेकिन महुआ को भी लगता है कि लेफ़्ट और कांग्रेस का इन चुनावों में कोई भविष्य नहीं हैं.

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बीबीसी के साथ इंटरव्यू में उन्होंने माना कि बंगाल में बीजेपी नंबर दो पार्टी हो गई है. और तृणमूल का मुक़ाबला सिर्फ़ बीजेपी से है.

महुआ मोइत्रा का मानना है कि नए कृषि क़ानून का नुक़सान बीजेपी को पश्चिम बंगाल में भी होगा. इनसे पश्चिम बंगाल के किसान भी नाराज़ है. दिल्ली से दूर होने के कारण वहाँ के किसान भले ही दिल्ली आकर धरना नहीं दे रहे हों, लेकिन नाराज़गी वहाँ भी है.

BBC ISWOTY

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