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बदायूं: महिला की गैंगरेप के बाद हत्या, मंदिर के पुजारी मुख्य अभियुक्त
- पढ़ने का समय: 3 मिनट
उत्तर प्रदेश के बदायूं ज़िले के उघैती इलाक़े में 50 वर्षीय एक महिला की गैंगरेप के बाद जघन्य हत्या कर दी गई.
यह घटना उस वक़्त हुई, जब महिला मंदिर में रविवार शाम पूजा करने गई थी.
आरोप मंदिर के पुजारी और उनके दो साथियों पर लगा है.
पुलिस ने दो अभियुक्तों को गिरफ़्तार करने का दावा किया है, जबकि मुख्य अभियुक्त मंदिर के पुजारी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं.
इस बीच राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले में यूपी पुलिस से रिपोर्ट माँगी है.
घटना के बारे में बदायूं के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा ने बीबीसी को बताया, "उघैती थानांतर्गत 50 वर्षीय महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. परिजनों की तहरीर और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आईपीसी की धारा 302 और 376डी के तहत मुक़दमा पंजीकृत किया गया था. दो अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर लिया गया है. संबंधित मामले में प्रारंभिक जाँच में लापरवाही बरतने का दोषी पाए जाने के कारण थाने के प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है."
मंदिर से घर नहीं लौटीं
महिला के परिजनों के मुताबिक़, रविवार शाम वो मंदिर में पूजा करने गई थीं, लेकिन काफ़ी देर होने के बावजूद घर वापस नहीं आईं, तो घर के लोग परेशान हो गए.
महिला के पति ने बीबीसी को बताया, "रात साढ़े 11 बजे महात्मा (मंदिर के पुजारी) गंभीर अवस्था में महिला को घर लेकर आए. उनके शरीर से ख़ून बह रहा था. ख़ून बहते-बहते उनकी मौत हो गई. महात्मा सत्यनारायण के साथ वेदराम और ड्राइवर जसपाल भी थे."
परिजनों का आरोप है कि थाने में इस बात की शिकायत की गई, लेकिन पुलिस ने कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की.
मंगलवार को जब पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट आई और उसमें गैंगरेप के अलावा जघन्य तरीक़े से हत्या की बात सामने आई, तब जाकर पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज की और बुधवार को दो लोगों को गिरफ़्तार किया.
मुख्य अभियुक्त और मंदिर के पुजारी सत्यनारायण अब भी फ़रार हैं.
बदायूं के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर यशपाल ने मीडिया से बातचीत में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बारे में जानकारी दी.
उनका कहना था, "पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में प्राइवेट पार्ट्स में माइनर इंजरीज़ हैं और फ़्रैक्चर है. एक पैर में भी फ़्रैक्चर है. बाक़ी ऐसी चोटें हैं, जैसे छड़ से लगती हैं. वो कहीं भी हो सकता है. उसी की वजह से बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग हुई है और ब्लीडिंग की वजह से मरीज़ शॉक में चला गया जिससे उनकी मौत हो गई. प्रथम दृष्ट्या तो बलात्कार हुआ लगता है, क्योंकि प्राइवेट पार्ट्स पर जिस तरह की चोटें हैं, उससे यही पता चल रहा है. बाक़ी विसरा जाँच के लिए भेजा गया है. रिपोर्ट आने पर और बातें स्पष्ट हो जाएंगी."
परिजनों और स्थानीय लोगों के मुताबिक़ उघैनी थाने की पुलिस ने पहले मामले को हादसे का रूप देने की कोशिश की, लेकिन जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में जघन्यता की बात पता चली तो हत्या और गैंगरेप का केस दर्ज किया गया.
महिला के बेटे के मुताबिक़, उन लोगों ने रात में ही पुलिस को सूचना दी थी लेकिन पुलिस अगले दिन वहाँ पहुँची.
पुजारी के बयान ने किया गुमराह
परिजनों के मुताबिक़, सोमवार को ही तहरीर देने के बावजूद एफ़आईआर दर्ज नहीं की गई. एफ़आईआर तब दर्ज की गई, जब पोस्टमॉर्टम हो गया.
स्थानीय पत्रकार चितरंजन सिंह बताते हैं कि मुख्य अभियुक्त मंदिर के पुजारी सत्यनारायण दो दिन तक मीडिया में बयान देते रहे कि महिला की कुएँ में गिरने से मौत हो गई.
उनके मुताबिक़, पुलिस पहले पुजारी सत्यनारायण के ही बयान के आधार पर कार्रवाई करती रही, जबकि परिजन अपनी तहरीर में गैंगरेप और हत्या का आरोप लगा रहे थे.
घटना के बाद मीडिया से बातचीत में पुजारी ने कहा था, "महिला कुएँ में गिर गई थी. मैंने वेदराम और जसपाल को मदद के लिए बुलाया. उन लोगों की मदद से जब निकाला, तो उनकी मौत हो चुकी थी. फिर हम लोग उनके घर पहुँचा आए."
स्थानीय पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट न आने तक पुजारी सत्यनारायण के बयान के आधार पर यही मानकर चल रही थी कि वो सही कह रहे थे.
स्थानीय लोगों के मुताबिक़, जिस कुएँ में गिरने की बात पुजारी ने बताई थी, वहाँ पहुँचना ही कठिन है. ऐसे में उसमें गिरने की बात किसी के गले नहीं उतर रही है.
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