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किसानों से 'शांति भंग की आशंका', भरवाए जा रहे हैं 50 लाख रुपये के बॉन्ड
किसान आंदोलन में शामिल होने से रोकने की शिकायतों के बीच उत्तर प्रदेश के संभल ज़िले में कुछ किसान नेताओं को 'शांति भंग' की आशंका के कारण 50 लाख रुपये के बॉन्ड भरने संबंधी नोटिस जारी किया गया है.
हालाँकि प्रशासन का कहना है कि बॉन्ड की राशि को कम करके 50 हज़ार कर दिया गया है लेकिन जिन नेताओं को ये नोटिस दिए गए हैं, उन्होंने इस बात से इनकार किया है.
संभल के उप जिलाधिकारी दीपेंद्र यादव कहते हैं कि ये नोटिस सीआरपीसी की धारा 107 और 116 को तामील करने के संबंध में भेजे गए हैं जिसमें शांति भंग की आशंका होती है.
एसडीएम दीपेंद्र यादव ने बीबीसी को बताया, "यह एक निरोधात्मक कार्रवाई है जो कि पुलिस रिपोर्ट के आधार पर शांतिभंग की आशंका के चलते की जाती है. सीआरपीसी की धारा 111 के तहत ये नोटिस जारी किए गए हैं. यह एक औपचारिक कार्रवाई है ताकि किसी आंदोलन या प्रदर्शन के दौरान कोई आक्रामक कार्रवाई न हो."
संभल ज़िले में भारतीय किसान यूनियन (असली) के ज़िलाध्यक्ष राजपाल सिंह के साथ ही किसान नेता जयवीर सिंह, सतेंद्र उर्फ़ गंगाफल, ब्रह्मचारी, वीर सिंह और रोहतास को 50-50 लाख रुपये के निजी मुचलके से पाबंद करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं.
एसडीएम दीपेंद्र यादव ने बताया कि हयातनगर थाने की पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर ये नोटिस जारी किए गए हैं. रिपोर्ट में बताया गया था कि ये लोग गाँव-गाँव जाकर दिल्ली और अन्य स्थानों पर चल रहे किसान आंदोलन का प्रचार कर रहे हैं जिससे शांति भंग होने का ख़तरा है.
'ना नोटिस का जवाब देंगे, न बॉन्ड भरेंगे'
किसान आंदोलन में शामिल होने से शांति भंग का ख़तरा कैसे हो सकता है?
इसके जवाब में एसडीएम दीपेंद्र यादव कहते हैं, "दरअसल, यह प्राथमिक और औपचारिक कार्रवाई होती है. नोटिस जारी करने का मतलब ही यही है कि लोग जो भी आंदोलन या प्रदर्शन करें, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से करें. यदि आक्रामक होंगे, तो ये लोग ज़िम्मेदार होंगे. हालांकि बाद में जब रिपोर्ट मिली कि मुचलके की राशि ज़्यादा है तो इसे कम करके अब 50 हज़ार रुपया कर दिया गया है."
इन सभी छह नेताओं को 50-50 लाख रुपये के व्यक्तिगत मुचलके भरने और इतनी ही राशि की दो-दो ज़मानतें दाखिल कराने के लिए नोटिस दिया गया है. एसडीएम दीपेंद्र यादव कह रहे हैं कि बॉन्ड की राशि कम करके पचास हज़ार कर दी गई है लेकिन जिन नेताओं को नोटिस मिले हैं, वो इस बात से इनकार कर रहे हैं.
इसके अलावा कुछ अन्य किसान नेताओं को भी कम राशि के बॉन्ड भरने संबंधी नोटिस जारी किए गए हैं. हालांकि किसान नेताओं का कहना है कि वो नोटिस का जवाब नहीं देंगे और न ही बॉन्ड भरेंगे.
संभल ज़िले में भारतीय किसान यूनियन (असली) के ज़िलाध्यक्ष राजपाल सिंह को भी 50 लाख रुपये के बॉन्ड भरने का नोटिस मिला है.
हालाँकि राजपाल सिंह इस समय दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में भाग लेने आए हुए हैं, लेकिन उनका कहना है कि वो लोग गांव में किसानों को इस क़ानून के बारे में बता रहे हैं और इसके विरोध में लगातार प्रदर्शन भी कर रहे हैं.
बीबीसी से बातचीत में राजपाल सिंह कहते हैं, "सीधी सी बात है सरकार हमें डराने-धमकाने के लिए ये सब कर रही है. किसान अपनी बात भी नहीं रख सकता. 50 लाख रुपये की ज़मानत हम ग़रीब किसानों से ली जा रही है. किसान क़ानून के विरोध को किसानों को भड़काना बता रहे हैं."
वो कहते हैं "अरे, किसान तो ख़ुद ही भड़का हुआ है. कितनों को आप 50 लाख रुपये का नोटिस देंगे और कितनों को जेल में बंद करेंगे? किसानों को दिल्ली तक आने नहीं दिया जा रहा है और अब डराने के लिए यह नया काम शुरू कर दिया है प्रशासन ने. पर हम डरने वाले नहीं हैं. एसडीएम ग़लत कह रहे हैं कि बॉन्ड की राशि 50 लाख से कम करके 50 हज़ार कर दी गई है. ऐसा नहीं हुआ है."
उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों से किसान दिल्ली के पास चिल्ला और ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर किसान क़ानूनों के ख़िलाफ़ धरना दे रहे हैं. धरने पर मौजूद कई किसानों का आरोप है कि उन्हें जगह-जगह रोकने की कोशिश की गई जिसकी वजह से उन लोगों को छिपकर यहाँ तक आना पड़ा.
लखनऊ से आए एक युवा किसान शैलेंद्र मिश्र का कहना था, "एक्सप्रेस वे पर पहले तो पुलिस वालों ने हमें रोककर चाय पिलाई, फिर हमसे कहा कि आप लोग गाड़ी से झंडे उतार लीजिए और वापस चले जाइए. हम लोगों ने झंडे लगी गाड़ी को वापस भेज दिया और फिर किसी तरह से बसों में बैठकर यहाँ तक आए."
इसके अलावा रामपुर, संभल, फ़िरोज़ाबाद, आगरा और अन्य ज़िलों के किसानों ने भी यही शिकायत की.
हालांकि पुलिस का कहना है कि किसी भी किसान को रोका नहीं जा रहा है लेकिन जगह-जगह धरने पर बैठे किसानों की यही शिकायत है कि उन्हें आगे नहीं जाने दिया जा रहा है, तभी वो लोग वहाँ बैठे हैं.
राजनीतिक दलों के नेताओं को भी नोटिस
लखनऊ में टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार के वरिष्ठ पत्रकार सुभाष मिश्र कहते हैं कि किसानों से बॉन्ड भराने जैसी कार्रवाई कुछ उसी तरह की है जैसे कि सीएए विरोधी प्रदर्शनों के बाद तमाम लोगों से ज़बरन वसूली जैसे नोटिस भेजे गए और प्रदर्शन से पहले भी कुछ लोगों को नोटिस भेजे गए थे.
उनके मुताबिक़, "किसान आंदोलन जहाँ भी हो रहा है, अब तक तो किसी तरह की कोई शांति भंग जैसी स्थिति नहीं आई. ऐसे में किसान नेताओं को नोटिस जारी करना समझ से परे है. प्रशासन का नोटिस जारी करने का सीधा मतलब है कि लोग डरें, जैसा कि पहले भी हो चुका है. 50 लाख रुपये के बॉन्ड का नोटिस जारी करने से पहले देखा तो होता कि यह नोटिस किसे जारी किया जा रहा है."
संभल में न सिर्फ़ किसानों को बल्कि कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं को भी इस तरह के नोटिस जारी किए गए हैं लेकिन और लोगों को दी गई नोटिस में मुचलके की राशि कम है. 50 लाख रुपये के बॉन्ड संबंधी नोटिस छह किसान नेताओं को ही दिए गए हैं.
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