BUDGET 2020: बजट समझने के लिए जान लें इन पांच बातों को

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण साल 2019 का बजट पेश करने जाते हुए.
इमेज कैप्शन, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण साल 2019 का बजट पेश करने जाते हुए.
    • Author, मेधावी अरोड़ा
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़
  • प्रकाशित
News image

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को इस साल का बजट पेश करने वाली है. इसमें आने वाले वित्तीय वर्ष में सरकार की आमदनी और खर्चे की जानकारी मिलेगी.

इस बजट का महत्व इसलिए भी है क्योंकि गिरती अर्थव्यवस्था के बीच मोदी सरकार 2.0 के पास आम जनता और कारोबारियों को बताने का बड़ा मौका होगा कि वो इस आर्थिक सुस्ती को गंभीरता से ले रही है और इससे निकलने के कदम उठा रही है.

लेकिन, बजट से पहले इससे संबंधित कुछ शब्दावलियों को भी समझना ज़रूरी है ताकि बजट समझा जा सके.

वित्ती मंत्री निर्मला सीतारमण

1. राजकोषीय घाटा

सरकार की कुल सालाना आमदनी के मुक़ाबले जब ख़र्च अधिक होता है तो उसे राजकोषीय घाटा कहते हैं. इसमें कर्ज़ शामिल नहीं होता.

साल 2017 में बजट की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि साल 2017-18 में राजकोषीय घाटा कुल जीडीपी का 3.2 फ़ीसदी होगा. ये इसके पिछले वित्तीय वर्ष के लक्ष्य 3.5 फ़ीसदी से कम था.

ऐसा अनुमान है कि बजट लोकलुभावन होगा जिसमें मतदाताओं को लुभाने के लिए सरकार अधिक खर्च की घोषणा करेगी और टैक्स की सीमा में भी बदलाव कर सकती है.

2. पर्सनल इनकम टैक्स में छूट की सीमा

वर्तमान में ढाई लाख रुपये तक की सालाना कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता है.

हालांकि, ये अनुमान है और उम्मीद लगाई जा रही है कि सरकार पर्सनल इनकम टैक्स की सीमा बढ़ाने की योजना बना रही है ताकि लोगों की खरीदने की क्षमता को बढ़ाया जा सके.

2000 और 500 रूपये के नोट

प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर

प्रत्यक्ष कर वो हैं जो देश के नागरिक सरकार को सीधे तौर पर देते हैं. इसमें टैक्स किसी व्यक्त की आय पर लगता है और इसे किसी अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता.

प्रत्यक्ष कर में इनकम टैक्स, वेल्थ टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स आते हैं.

अप्रत्यक्ष कर वो हैं जिनमें टैक्स का भार किसी अन्य व्यक्ति पर ट्रांसफर किया जा सकता है जैसे कोई सर्विस प्रोवाइडर और विनिर्माता, सेवा या उत्पाद पर टैक्स लगाता है.

अप्रत्यक्ष कर का उदाहरण जीएसटी है जिसने वैट, सेल्स टैक्स, सर्विस टैक्स, लग्ज़री टैक्स जैसे अलग-अलग टैक्स की जगह ले ली है.

4. वित्तीय वर्ष

भारत में वित्तीय वर्ष की शुरुआत एक अप्रैल से होती है जो अगले साल के 31 मार्च तक चलता है. इस साल का बजट वित्तीय वर्ष 2021 के लिए होगा जो एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 तक के लिए होगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

5. शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म गेन

वर्तमान में कोई भी व्यक्ति यदि शेयर बाज़ार में एक साल से कम समय के लिए पैसे लगा कर लाभ कमाता है तो उसे अल्पकालिक (शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन) पूंजीगत लाभ कहते हैं. इस पर 15 फ़ीसदी तक टैक्स लगता है.

शेयरों में जो पैसा एक साल से अधिक समय के लिए होता है उसे दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन) कहते हैं.

इक्विटी शेयरों और इक्विटी ओरिएंटेड फंड्स की यूनिट्स की बिक्री पर एक लाख से अधिक वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर 1 अप्रैल, 2018 को या उसके बाद हुए ट्रांस्फर पर 10 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है. पहले इस पर टैक्स नहीं लगता था.

ऐसी संभावना जताई जा रही है कि सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटन गेन की समय सीमा में बदलाव कर सकती है. इससे शेयरों को लंबे समय तक होल्ड करना होगा, ताकि उन पर होने वाला पूंजीगत लाभ कर मुक्त हो सके.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)