नज़रिया: राहुल और अखिलेश को आमंत्रित कर क्या संघ अपनी छवि बदलना चाहता है?

आरएसएस, मोहन भागवत, दिल्ली में आरएसएस का कार्यक्रम
    • Author, स्वाति चतुर्वेदी
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को आमंत्रित किया था.

यह संघ का शुरुआती प्रयोग था जो नागपुर से निकल कर अब दिल्ली पहुंच चुका है.

दिल्ली के विज्ञान भवन में आरएसएस का तीन दिवसीय मंथन चल रहा है, जिसमें संघ के लोग देश के भविष्य पर चर्चा कर रहे हैं.

चर्चा का विषय है- 'भारत का भविष्यः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण.' इसके पहले दिन यानी सोमवार को सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपना दृष्टिकोण रखा.

इस तीन दिन की चर्चा में संघ के कई एजेंडे शामिल हैं. संघ से जुड़े लोगों का कहना है कि आरएसएस अब हिचकना नहीं चाहता और यह देश को खुल कर संदेश देना चाहता है कि वो विचारधारा के केंद्र में है.

वो यह भी स्पष्ट तौर पर बताना चाहता है कि उसका भाजपा की राजनीति और नीतियों पर कब्जा है.

आरएसएस, मोहन भागवत, दिल्ली में आरएसएस का कार्यक्रम

राहुल, भाजपा और संघ

आरएसएस ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और दूसरे विपक्षी दलों के नेताओं को अपने आयोजनों में आमंत्रित कर, उन लोगों को कड़ा संदेश देने की कोशिश की है जो आरएसएस को एक 'एक्सक्लूसिव' संगठन बताते हैं.

जिन लोगों पर संगठन ने मानहानि का मुकदमा किया है, उन्हें आमंत्रित कर वो एक चतुर राजनीति खेलना चाहता है.

राहुल गांधी, भाजपा और संघ पर नफ़रत की राजनीति करने के आरोप लगाते रहे हैं. राहुल गांधी यह भी कहते रहे हैं कि वो उनकी नफ़रत का जवाब प्यार से देंगे.

उन्होंने सबको चकित करते हुए संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गले लगा कर यह संदेश देने की कोशिश भी की थी.

आरएसएस ने राहुल के उसी कथन को परखने के लिए मोहन भागवत को सुनने की चुनौती देने की कोशिश की थी.

आरएसएस, मोहन भागवत, दिल्ली में आरएसएस का कार्यक्रम

मोदी और शाह को भी संदेश

कांग्रेस पार्टी आरएसएस के आमंत्रण पर चुप्पी साधे हुए है. उसका कहना है कि राहुल गांधी उनके कार्यक्रम में ज़रूर जाते अगर उन्हें वहां बोलने को कहा जाता. वो उस विचारधारा को सिर्फ सुनने क्यों जाएंगे जिसका वो विरोध करते हैं.

उनका यह बहाना बहुत पल्ले नहीं पड़ता.

वहीं अखिलेश यादव का कहना है कि वो आरएसएस को बहुत कम जानते हैं. उन्हें जो मालूम है वो यह है कि सरदार पटेल ने संघ पर प्रतिबंध लगाया था और वो स्वयं इससे दूर रहना चाहते हैं.

प्रणब मुखर्जी, आरआरएस, नागपुर

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के आरएसएस के गढ़ नागपुर में भाषण के बाद, कांग्रेस ने उनकी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी को मैदान में उतारा और कहा कि भाषण भुला दिए जाएंगे और तस्वीरें रह जाएंगी.

विज्ञान भवन में चल रही चर्चा एक तय योजना की दूसरी कड़ी है. पहली कड़ी का आयोजन मुंबई में हुआ था, जिसमें भी सरसंघचालक मोहन भागवत बोले थे.

संघ न सिर्फ़ देश और अपने विरोधियों को संदेश देना चाहता है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को भी यह बताना चाहता है कि संगठन की ताक़त पार्टी से कितनी बड़ी है.

इससे पहले मोहन भागवत ने अमित शाह के 'कांग्रेस मुक्त भारत' के नारे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यह राजनीतिक मुहावरे हैं न कि संघ की भाषा का हिस्सा.

आरएसएस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी नाराज़ दिखा था जब उन्होंने सरसंघचालक मोहन भागवत की मुरली मनोहर जोशी को राष्ट्रपति बनाए जाने की इच्छा को नज़रअंदाज कर दिया था.

आरएसएस, मोहन भागवत, दिल्ली में आरएसएस का कार्यक्रम

धारणा बदलने की कोशिश करता संघ

आरएसएस धीरे-धीरे ख़ुद को बदल रहा है. हाल ही में संगठन ने अपने पहनावे में बदलाव किया था.

संघ के एक बड़े नेता का कहना है कि भागवत बार-बार इस बात को दोहराते हैं कि "जो भारत को अपनी मातृभूमि मानता है, वो सभी अपने हैं. हमलोग स्पष्ट रूप से हिंसा के ख़िलाफ़ हैं."

संघ चाहता है कि लोग इन बातों से रूबरू हों. पर क्या आरएसएस संदेश देने में कामयाब हो रहा है?

मोहन भागवत हाल ही में विश्व हिंदू सम्मेलन के कार्यक्रम के लिए शिकागो गए थे, जहां उन्होंने कहा था कि "जंगली कुत्ते एक शेर पर हमला कर रहे हैं." उनके इस बयान की आलोचना हुई.

भाजपा की केंद्र में सरकार है और वो देश के 22 राज्यों में राज कर रही है.

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता, जो आरएसएस से जुड़े रहे हैं, कहते हैं कि हमारी असल सफलता यह है कि हम लोगों को यह संदेश देने में कामयाब रहे हैं कि देश पर राज वो ही करेगा जो बहुसंख्यकों की राजनीति करता हो. हम लोगों ने देश की सोच बदली है. भारत एक हिंदू प्रधान देश है.

अब 2019 यह तय करेगा कि यह देश भीमराव आंबेडकर के दर्शन से चलेगा या फिर आरएसएस के हिंदू दर्शन से.

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