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2019 के लिए अटल-आंबेडकर पर 'टिकाई' अमित शाह ने बिसात
"हमारे चहेते प्रधानमंत्री अटल जी के घुटने का ऑपरेशन 10 अक्तूबर को होना है और हम उनके स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं. पार्टी ने दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए 10 सूत्रीय एक्शन प्लान बनाया है. यूपी, बंगाल, पंजाब, केरल, असम और तमिलनाडु के विधान सभा चुनाव की तैयारी में लग जाना है."
ये आह्वान साल 2000 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण ने नागपुर में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में दिया था.
आते हैं साल 2003 में जब रायपुर में हुई भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी और जसवंत सिंह के सामने मौजूदा उप-राष्ट्रपति और तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने एक दहाड़ लगाई थी.
वेंकैया नायडू ने कहा था, "भाजपा में एकता है. भाजपा में स्पष्टता है. लोग भाजपा और सहयोगी दलों को एक और बड़ा मौका देना चाहते हैं."
अगले ही साल यानी 2004 के आम चुनावों में भाजपा नेतृत्व वाले सत्ताधारी एनडीए गठबंधन को क़रारी हार के बाद गद्दी छोड़नी पड़ी थी.
कल और आज
लौटते हैं सीधे 14 साल बाद 8 सितंबर, 2018 को शुरू हुई भाजपा की एक और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की तरफ़.
"नरेंद्र मोदी में हमारे पास दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता है." हुंकार भरी भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने.
ज़ाहिर है, इशारा 2019 के आम चुनावों और इसी साल होने वाले राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत पांच विधान सभा चुनावों की तरफ़ है.
दिल्ली के एक नामचीन पांच सितारा होटल के बगल में आंबेडकर इंटरनैशनल सेंटर हैं जिसका उद्घाटन पिछले साल खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने किया था.
आंबेडकर सेंटर आज भाजपा के भगवे रंग के बैनरों से सजा हुआ है और हर तरफ़ दिवंगत नेता अटल बिहारी वाजपेयी की तस्वीर लटक रही है.
भीतर के हॉल में वाजपेयी की कविताओं के अलावा परवेज़ मुशर्रफ़ से हुई उनकी मुलाक़ात, संयुक्त राष्ट्र में दिया गया उनका भाषण और दर्जनों रैलियों को सम्बोधित करने वाली तस्वीरें लगाई गई हैं.
अंदर से लेकर बाहर सड़क तक लगे लगभग हर बैनर पर सबसे बड़ी तस्वीर नरेंद्र मोदी की है, ठीक बगल में विराजमान हैं मौजूदा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की फ़ोटो.
राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज और नितिन गडकरी नेताओं की तस्वीर भी इसी बैनर पर है, लेकिन पहली दो तस्वीरों की आधी.
थोड़ा ढूढ़ने पर कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी की तस्वीर भी एक बैनर पर दिखी. लेकिन उस तस्वीर पर सिर्फ़ यही दो 'मार्गदर्शक' नेता थे, कोई और नहीं.
दलितों पर फ़ोकस
शनिवार सुबह अमित शाह ने यहाँ पहुँचने के साथ ही भीमराव आंबेडकर की विशाल प्रतिमा पर फूल चढ़ाए और प्रणाम किया.
पिछले तमाम वर्षों में पार्टी की ये बैठक अगर दिल्ली में होती थी तो जगह तालकटोरा या जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम या फिर एनडीएमसी सेंटर ही रहती थी.
भीमराव आंबेडकर के नाम से जुड़े इस भव्य भवन में बैठक का होना महज़ इत्तेफ़ाक़ बिलकुल नहीं है.
गुजरात में दलितों के ऊपर हुए हिंसक हमलों से लेकर उत्तर प्रदेश में मायवती पर एक वरिष्ठ भाजपा नेता की अभद्र टिपण्णी पर माफ़ी मांगने तक.
पिछले दो वर्षों में देश के महराष्ट्र राज्य से लेकर गुजरात और उत्तर प्रदेश तक दलित समुदाय के विशालकाय विरोध प्रदर्शनों का निशाना भी झेलना पड़ा है.
इस बीच भाजपा सरकार ने एससी-एसटी एट्रोसिटी प्रिवेंशन एक्ट को फिर से मूल स्वरूप में लाने के लिए क़ानून बनाने की घोषणा की है.
एससी-एसटी एक्ट 1989 का एक स्पेशल एक्ट है जिसे बनाने की वजह थी भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धाराओं के बावजूद एससी-एसटी के ख़िलाफ जाति के आधार पर होने वाले अपराधों का कम न होना.
इसमें तत्काल मुक़दमा दायर होने और मुक़दमा दायर होने के बाद तत्काल गिरफ़्तारी का प्रावधान है और अग्रिम ज़मानत निषेध है.
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने इस साल एक फ़ैसले में इन तीनों प्रावधानों को निरस्त कर दिया था. सरकार अब नया क़ानून लाकर अत्याचार निरोधक क़ानून को मूल रूप में बहाल करने की योजना बना चुकी है.
ज़ाहिर है, निशाना दलित और पिछड़े वर्ग का अहम वोट है.
नंबर गेम शुरू
आगामी पांच विधान सभा चुनावों में से तीन राज्यों, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान, में पार्टी सत्ता में हैं.
ज़ाहिर है, अगर 2019 के आम चुनावों में भाजपा को मौजूदा सीटें बरकरार भी रखनी होंगी तो कर्नाटक समेत इन तीनों राज्यों का नतीजा बहुत महत्वपूर्ण रहेगा.
राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पहले दिन पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने सभी प्रदेश अध्यक्षों और राष्ट्रीय पदाधिकारियों को "संगठन पर ध्यान देने के लिए कहा है."
अपना मनपसंद नारा, "बूथ जीता, तो चुनाव जीता" दोहराते हुए अमित शाह ने सभी को 'चेताया' है कि चुनाव में हर वोटिंग बूथ पर विशेष ध्यान देना है.
अमित शाह ने आज हुई बैठक में आगामी लोक सभा चुनावों के टारगेट भी तय कर दिए हैं.
मिसाल के तौर पर, पश्चिम बंगाल में पार्टी ने 2014 में 42 में से दो सीटें जीतीं थीं जबकि अगला टारगेट 22 का मिला है.
हमेशा की तरह इस बार भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में इस बात पर ज़ोर देने की कोशिश हो रही है कि सत्ताधारी मोदी सरकार की 'लाभकारी योजनाएं' मतदताओं तक कैसे पहुंचाईं जाएं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार शाम बैठक ख़त्म होने के पहले सभी को सम्बोधन करेंगे.
लेकिन इस सब के बीच एक और बड़ी चीज़ होने जा रही है.
2014 के आम चुनावों के बाद से पार्टी का संगठन चला रहे अध्यक्ष अमित शाह का कार्यकाल अगले साल होने वाले लोक सभा चुनावों तक फिर बढ़ने वाला हैं.
यानी भारतीय जनता पार्टी की कमान उन्हीं के पास है जिनके पास 2014 में थी.
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