ये है समलैंगिक ऋषि- विन के प्रेम विवाह की कहानी..

gay marriage in Yavatmal
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जब मियां-बीवी राज़ी तो क्या करेगा काज़ी...ये पुरानी कहावत अक्सर हम लोग सुनते रहे हैं. लेकिन भारत में किसी समलैंगिक शादी के लिए ऐसा कम ही लोगों को कहते सुना जा सकता है.

30 दिसंबर 2017 को महाराष्ट्र के यवतमाल ज़िले में ऋषि साठावणे ने अपने पार्टनर विन के साथ एक निजी समारोह में शादी की रस्में की. हालांकि समलैंगिक शादियों को लेकर भारत का कानून कुछ नहीं कहता लेकिन फिर भी शादी की शुरूआती मीडिया कवरेज से ऋषि काफी परेशान हुए.

ये बताना भी ज़रूरी है कि ऋषि अमरीका के नागरिक हैं और अमरीका में समलैंगिक शादियों को क़ानूनी दर्जा हासिल है. ऋषि ने खुद अपनी फेसबुक पोस्ट के ज़रिए अपनी प्रेम कहानी और शादी को लेकर स्पष्टीकरण दिया है.

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'मीडिया ने की गलत रिपोर्टिंग'

"महाराष्ट्र के यवतमाल में 30 दिसंबर 2017 को मैंने और मेरे पार्टनर विन ने शादी की. इस मौके पर मेरे माता-पिता, रिश्तेदार, स्कूल-कॉलेज के दोस्त, हमारे टीचर्स, समलैंगिक दोस्त, हमारे मेहमानों के बच्चे और यवतमाल के हमारे क़रीबी लोग मौजूद थे.

मीडिया में काफी गलत कवरेज की गई, कुछ रिपोर्टर्स ने मेरे दोस्तों की फेसबुक पोस्ट से शादी के बारे में जाना और रिपोर्ट छापने की जल्दी में ज़्यादातर ने हम से हमारी कहानी जानने की ज़रूरत ही नहीं समझी और ना हमसे हमारी तस्वीरें छापने की इजाज़त ही ली. इन रिपोर्ट्स को समसनीखेज़ बनाकर छापा गया जिनमें गलत जानकारी भी दी गयी. इस मीडिया कवरेज से मुझे काफ़ी दुख पहुंचा.

कई लोगों ने हमारी शादी के जायज़ होने पर सवाल उठाए. भारतीय दंड संहिता 377 के मुताबिक समलैंगिक शारीरिक संबंध बनाना और कई दूसरे शारीरिक संबंध बनाना गैर-कानूनी है. लेकिन ऐसा तो कोई कानून नहीं है जिसमें शादी की भी मनाही है. समलैंगिक शादी को लेकर भारतीय कानून में कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया है. ना ये कानूनी है और ना गैर-कानूनी. ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है जो समलैंगिक लोगों को हिंदू रस्मों के मुताबिक शादी करने से रोके.

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हमारी एक साधारण सी कहानी है जहां दो लोग प्यार में पड़ते हैं, उन्हें उनके दोस्तों और परिवार का सहयोग मिलता है, और वे एक निजी समारोह में अपने करीबी लोगों के सामने एक-दूसरे का साथ निभाने का वादा करते हैं. जो लोग समारोह में आए, उन्होंने हमारे ज़िंदगी भर साथ रहने के फैसले में दिल से हमारा साथ दिया.

मैं ये इसलिए लिख रहा हूं ताकि तथ्य सामने आ सकें.

मैं, ऋषिकेष साठावणे, 1974 में पैदा हुआ और यवतमाल में पला-बढ़ा. बारहवीं क्लास में मेरिट से पास हुआ और फिर एक साल आईआईटी के लिए तैयारी की और खुशकिस्मती थी कि अगले साल आईआईटी में दाखिला भी हो गया. मैंने आईआईटी बॉम्बे से इंजिनियरिंग फ़िज़िक्स में बीटेक डिग्री ली है और उसके बाद अमरीका से मास्टर डिग्री हासिल की. मैं एमबीए भी कर चुका हूं.

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मेरे पति विन, वियतनाम के हो ची मिन शहर में पैदा हुए और जब वो 8 साल के थे तब उनका परिवार 1990 में अमरीका आ गया. उन्होंने अपनी पढाई कैलिफोर्निया से की. फिलहाल वो अंग्रेज़ी और गणित पढाते हैं.

कई साल माता-पिता स्वीकार नहीं कर पाए

जब मैं बड़ा हो रहा था, मुझे पता था कि मैं अलग हूं लेकिन इस अहसास को समझना मुश्किल था क्योंकि मैं किसी को नहीं जानता था जो मेरी तरह ही महसूस करता हो. मैंने अपनी पढाई पर ध्यान लगाने का फैसला किया और स्कूल में एक अच्छा विद्यार्थी रहा. आईआईटी के दौरान एक मनोविज्ञान की क्लास में कहीं समलैंगिकता का ज़िक्र हुआ पर तब मुझे नहीं लगा कि मैं समलैंगिक हूं. लेकिन जब एक बार आईओवा स्टेट यूनिवर्सिटी में 'गे सप्पोर्ट ग्रुप' में दूसरे आत्मविश्वासी समलैंगिकों से बात करने का मौका मिला तो मुझे समझ आया कि मैं भी समलैंगिक हूं.

मैंने तुरंत 1997 में अपने माता-पिता को इसके बारे में बताया. अगले कुछ सालों तक वो कभी अस्वीकार करते, कभी अपराधबोध महसूस करते, कभी हताश होते, कभी रोने लगते और ना जाने क्या-क्या. उन्हें लगता था कि अगर मैं किसी लड़की से शादी कर लूंगा तो सब ठीक हो जाएगा. लेकिन मैं किसी और लड़की की ज़िंदगी बर्बाद नहीं करना चाहता था. मेरी बहन ने भी मेरे माता-पिता को समझाने में काफ़ी मदद की.

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परिवार ने लिया गे-प्राइड में हिस्सा

शुरूआत में सख़्ती से विरोध करने के बाद आखिरकार मेरे माता-पिता भी समझ गए और उन्होंने मुझे स्वीकार कर लिया. अमरीका में दक्षिण भारतीयों के लिए सबसे पुराना एक LGBTQ ग्रुप है - ट्रीकोन और समलैंगिक लोगों के परिवारों और दोस्तों के लिए एक ग्रुप है - PFLAG. इन दोनों संस्थाओं ने मुझे मेरे परिवार को सच बताने में काफी मदद की.

जब मेरे परिवार वाले 2007 में अमरीका आए तो थोड़ी झिझक से ही सही लेकिन उन्होंने ट्रीकोन के साथ सेन फ्रेंसिस्को की 'गे प्राइड परेड' में हिस्सा लिया. मुझे लगा कि मैं कितना खुशकिस्मत हूं कि मुझे इतना प्यार करने वाला और साथ देने वाला परिवार मिला है.

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विन और मैं एक गे डेटिंग वेबसाइट पर अक्तूबर 2016 में मिले थे और फिर 2 दिन बाद डिनर के लिए मिले. हम उसके बाद कई बार मिले और दिसंबर 2016 में ऑस्ट्रेलिया में रोड ट्रिप पर जाने का फैसला किया. रोडट्रिप के आखिर में हम सिडनी में विन के भाई की शादी में गए जहां उसके परिवार ने मेरे साथ उसके पार्टनर के तौर पर ही बर्ताव किया. मुझ पर इसका काफी अच्छा असर हुआ.

अमरीका वापस आकर हम मिलते रहे और हमारा प्यार परवान चढता रहा. मैंने अप्रैल 2017 में विन के सामने शादी का प्रस्ताव रखा. मेरे परिवार वालों ने हमारी सगाई के लिए जून में पार्टी रखी.

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बच्चे गोद लेने की कोशिश में

हमारी शादी 30 दिसंबर 2017 को हुई. सबसे पहले करीबी दोस्तों और परिवार के साथ हल्दी की रस्म हुई. बाद में मेहमानों के आने पर रिसेप्शन शुरू हुई, ग्रुप फोटो लिए गए. हमने कुछ हिंदू विवाह की रस्में भी की जैसे एक-दूसरे को मालाएं पहनाना, अंगूठी पहनाना. मंगलाष्टक को यूट्यूब पर बजाया. हम लोग नाचे, तस्वीरें खिंचवाई, बहुत सारे मेहमानों ने हमारे लिए अच्छी बातें बोलीं. मेरे ख़्याल से सौ के करीब लोग हमारी शादी में आए थे.

मेरे और विन के अलावा सिर्फ एक व्यक्ति अमरीका से था, 6 लोग मुंबई से, 4 पुणे से, 3 दिल्ली से. बाकी सब लोग यवतमाल से ही थे जो या तो वहीं रह रहे थे या पहले कभी रहे थे. शुक्रिया मेरे स्कूल के दोस्तों का जो इतनी संख्या में हमारा साथ देने आए. मेरे रिश्तेदारों, स्कूल के शिक्षकों और बाकी दोस्तों का भी शुक्रिया जो मेरे खास दिन पर मेरे साथ रहे. यवतमाल इतना प्रगतिशील है जितना कोई सोच भी नहीं सकता. बाकी और भी कई लोग थे जो उस दिन नहीं आ सके. कई लोगों ने बाद में मुझे कहा कि वे भी आना चाहते थे लेकिन उन्हें पता नहीं था.

कुछ दिन मुंबई में रह कर हम वापस अमरीका लौट आएं हैं. हमारे लिए शादी करना इसलिए भी ज़रूरी था क्योंकि हम दोनों बच्चे गोद लेने की कोशिश कर रहे हैं. हम तो पिछले साल से ही फोस्टर किड प्रोग्राम की क्लास भी लेना शुरू कर चुके हैं. थोड़ी सी और ट्रेनिंग के बाद हम जल्द ही बच्चों को गोद ले पाएंगे."

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