'सत्ताभोग ठुकराकर जनता के बीच आया हूं': शरद यादव

शरद यादव, महागठबंधन, नीतीश कुमार, जेडीयू, आरजेडी, लालू यादव
    • Author, वात्सल्य राय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
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जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव बिहार में महागठबंधन के टूटने से खुश नहीं हैं. बीजेपी के साथ आने का नीतीश कुमार का फैसला उन्हें रास तो नहीं आया था मगर उन्होंने इस पर काफी वक्त तक चुप्पी साधे रखी. लेकिन अब वो खुलकर अपनी असहमति जाहिर कर रहे हैं.

उनका कहना है कि महागठबंधन टूटने के बाद उनके सामने दो रास्ते थे. या तो वे सत्ता का भोग करते या जनता के बीच जाकर उसके टूटे भरोसे को जीतने की कोशिश करते और उन्होंने दूसरा रास्ता चुना.

इन दिनों वह तीन दिन के लिए बिहार दौरे पर हैं. उनका कहना है कि वो महागठबंधन के मतदाताओं को एकजुट करना चाहते हैं. इसी सिलसिले में वह गुरुवार को पटना पहुंचे. शरद यादव की मुज़फ़्फ़रपुर, मधुबनी और मधेपुरा जाने की योजना है. हालांकि उनकी पार्टी इसे उनका व्यक्तिगत फैसला बताकर इससे दूरी बनाती नज़र आ रही है.

'यह अंधेर जैसी स्थिति है'

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शरद यादव का कहना है कि महागठबंधन पर 11 करोड़ लोगों ने भरोसा किया था और इससे टूटने से लोगों के भरोसे को चोट पहुंची है. उन्होंने कहा,''वोटर और वोट ही लोकतंत्र के इंजन हैं और इन्हें तोड़ना लोकतंत्र को तबाह करना है. ''

उन्होंने कहा, ''अब गठबंधन का मेनिफेस्टो बीजेपी के मेनिफेस्टो से मिल गया है, जिसका हम पहले विरोध कर रहे थे. यह अंधेर जैसी स्थिति है. ये हालात पैदा करने की भूमिका हमारे जेडीयू के साथियों ने ही निभाई है. इससे जनता के विश्वास को जो चोट पहुंची है, मैं उसे ही जोड़ने आया हूं. यह विश्वास टूटना नहीं चाहिए.''

'जनता सबसे बड़ी मास्टर'

यह पूछे जाने पर कि उनके फैसले का जेडीयू के अंदर ही विरोध क्यों हो रहा है, शरद यादव ने कहा,''मैं किसी के विरोध या बयानबाज़ी का जवाब नहीं देता. मैं अकेले ही निकला हूं और जनता सबसे बड़ी मास्टर है. मैं जनता के बीच अकेले आया हूं, मैंने तो पहले से ऐसा कोई प्रोग्राम भी नहीं बनाया था.''

उन्होंने कहा,''मैं पार्टी के शीर्ष नेताओं को हमेशा यही समझाता रहा कि गठबंधन विश्वास है और किसी भी हालत में इस पर आंच नहीं आनी चाहिए.''

शरद यादव ने यह भी बताया कि वो पहले एनडीए से अलग होने के खिलाफ़ थे लेकिन पार्टी की एकता की लिए उन्हें मानना पड़ा, जो एक ग़लत कदम था. उन्होंने कहा,''महागठबंधन में सबसे सक्रिय भूमिका तीन लोगों ने निभाई- नीतीश जी ने, लालू जी ने और मैंने. इसलिए लोगों का भरोसा टूटना मुझे तकलीफ़ देता है.''

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'जो जिनसे मिला, वो उनके मित्र'

अरुण जेटली जैसे एनडीए के बड़े नेताओं से मिलने के बारे में पूछने पर वो कहते हैं कि वो जिनसे भी मिले, वे राजनीति में उनके मित्र रहे हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वो लोगों के बीच न जाएं.

उधर जेडीयू के प्रदेश प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार का मानना है कि पार्टी फिलहाल 'वेट ऐंड वॉच' की स्थिति में है. उन्होंने कहा,''शरद यादव जी मुगालते में हैं. यह पूरी यात्रा लालू यादव के रिमोट कंट्रोल से चल रही है. पार्टी इस यात्रा पर नज़र रखेगी. वो बदल गए हैं, इसके लिए उन्हें मुबारकबाद.''

मुख्यमंत्री नीतीश ने कुमार लालू यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव की बेनामी संपत्ति मामले पर राष्ट्रीय जनता दल से अलग होकर पद से इस्तीफा दे दिया था और इसके बाद बीजेपी के समर्थन से सरकार बनाई थी.

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