'एक महीने बाद भी समझ नहीं आ रहा जीएसटी'

गुड्स एवं सर्विस टैक्स यानी जीएसटी को लागू हुए एक महीना हो चुका है. रविवार को रेडियो पर प्रसारित 'मन 'की बात' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पूरे देश के लिए लागू की गई समान कर व्यवस्था का लाभ ग़रीब लोगों को ज़्यादा हुआ है.

हालांकि लागू होने के बाद से अब तक जीएसटी पर सब कुछ साफ़ नहीं है. बाज़ार जाने वाले लोगों को अबतक यह समझ नहीं आ पा रहा है कि इसके लागू होने से क्या सस्ता हुआ है और क्या महंगा? थोक मंडियां वीरान पड़ी हुई हैं. खुदरा विक्रेता अभी जीएसटी का सॉफ्टवेयर लगाने में व्यस्त हैं. खरीदारी करने वाले लोग भी अभी तक समझ नहीं पा रहे हैं कि जीएसटी के आने से उनके बज़ट पर क्या फर्क़ पड़ा है.

जीएसटी में उलझे हैं व्यापारी

पुरानी दिल्ली की खारी बावली में आज उतनी भीड़ नहीं थी जबकि राखी का त्यौहार बस कुछ ही दिनों में आने वाला है. इस खुदरा मंडी के व्यापार मंडल के भरत अरोड़ा बताते हैं कि ऐसा पहली बार हुआ है जब मंडी की ज़्यादातर आढ़तें खाली पड़ी हुई हैं.

अरोड़ा कहते हैं, "सारे व्यापारी जीएसटी के चक्कर में लगे हैं. कोई 'सॉफ्टवेयर इंजीनियर' के चक्कर लगा रहा है तो कोई 'चार्टर्ड अकाउंटेंट' के. हमें अभी तक यह समझ नहीं आ रहा है कि क्या होने वाला है. वैसे जीएसटी के तहत जो कर प्रणाली तैयार की गई है उसमे कई ख़ामियां हैं. मिसाल के तौर पर ख़ुदरा चावल पर कोई कर नहीं है, वहीं अगर पैक कर उसे बेचा जाए तो उसपर जीएसटी लागू होगा. कई और मसले हैं जो 'प्रोसेस्ड' खाने से सम्बंधित हैं, उनपर भी असमंजस बना हुआ है."

खरीद क्षमता में आई कमी

व्यापारियों का कहना है कि कई ऐसी खाद्य सामग्रियां हैं जिनपर पहले कोई कर नहीं था मगर अब उनपर 5 फ़ीसदी से लेकर 12 फ़ीसदी तक कर लगाया गया है, इसकी वज़ह से लोगों की खरीदने की क्षमता में कमी आई है.

मगर टैक्स एक्सपर्ट देवेंद्र कुमार मिश्रा मानते हैं कि जीएसटी का लागू होना बहुत आधारभूत परिवर्तन है. उनका मानना है कि शुरुआती दौर में कठिनाई इसलिए हो रही है क्योंकि यह व्यवस्था पूरी तरह तकनीक पर आधारित है.

मिश्रा कहते हैं, "यह नई व्यवस्था का पहला महीना है. लोग इसे समझने की कोशिश कर रहे हैं. इसे लागू करने की कोशिश कर रहे हैं. यही वजह है कि उन्हें थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. वैसे 'एक्साइज़ ड्यूटी' और 'वैट' यानी 'वैल्यू एडेड टैक्स' को मिलाकर जीएसटी बनाया गया है. इसकी चार दरें निर्धारित की गई हैं. सरकार के लिए भी ये बड़ा प्रयोग है. सब 'वेट एंड वाच' की मुद्रा में हैं."

जा रही हैं नौकरियां

यह भी कहा जा रहा है कि जीएसटी की वज़ह से व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है जिसे पाटने के लिए उन्होंने यहां काम करने वालों की संख्या में कमी करनी शुरू कर दी है. पुरानी दिल्ली हो या नई दिल्ली के बड़े बाज़ारों के शोरूम और दुकानों में काम करने वाले, लोगों की नौकरियां भी जा रही हैं.

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