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दिल्ली में ढहाई गई मस्जिद, डर और ख़ौफ़ में इलाके के मुसलमान
पूर्वोतर दिल्ली के अम्बे विहार में 400 से 500 लोगों की भीड़ ने एक 'मस्जिद' को ढहा दिया है.
घटना पिछले बुधवार यानी सात जून की है जब दिल्ली पुलिस के पीसीआर पर सूचना दी गई कि एक भीड़ सोनिया विहार के अम्बे कॉलोनी में मस्जिद को ढहा रही है.
मुश्ताक़ अहमद का घर ढहाई गई मस्जिद के दो घरों के बाद है.
मुश्ताक़ अहमद कहते हैं, "हमने पहली रमज़ान से वहां नमाज़ शुरू की थी. तरावीह (रमज़ान में अदा की जाने वाली ख़ास नमाज़) भी वहां अदा हो रही थी कि हमारे कुछ भाइयों ने एक दिन उसे ढहा दिया. यही सच है."
दिलों में डर
रेडीमेड कपड़ों की फ़ैक्ट्री में छोटा-मोटा धंधा करने वाले मुश्ताक़ हालांकि अपनी बात कहना चाहते हैं, लेकिन मिल रही धमकियों से पूरा ख़ानदान बेहद डरा हुआ है.
अहमद की पत्नी आमीना बिना प्लास्टर के दीवारों वाले कमरे में लगी चौकी के पास खड़ी हैं.
आमीना को इस बात का ग़म नहीं कि मस्जिद ढहा दी गई, लेकिन उन्हें 'पाक क़ुरान की बेहुरमती (बेईज्ज़ती) किए जाने का बेहद ग़म है.'
वो कहती हैं कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं कि मामला ठंडा हो जाने के बाद उन्हें अंजाम भुगतना होगा.
बताया जा रहा है कि कुछ मुसलमान अम्बे कॉलोनी छोड़ रहे हैं.
शाहरुख़ (बदला हुआ नाम) को अपनी हेयर कटिंग सैलून बंद करनी पड़ी है. उनके मकान मालिक ने उन्हें दुकान ख़ाली करने का नोटिस दे दिया जिसके बाद अब वो उसे घर पर ही शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं.
आमीना के पड़ोस में दो हिंदू परिवार हैं, लेकिन इस वक़्त वो वहां मौजूद नहीं हैं, बताया गया,''सब काम पर गए हैं.'
कब बनी मस्जिद?
यमुना पुश्ता के इलाक़े में बसे सभी लोग कमज़ोर आर्थिक तबक़े से तालुक्क़ रखते हैं और सुबह होते ही काम पर निकल जाते हैं.
उस बुधवार भी कुछ ऐसा ही हुआ था. विमलेश मौर्य ने भी मस्जिद तोड़ने वाली भीड़ को देखा था, वो कहती हैं, "400 से 500 लोगों की भीड़ थी. लोग काम पर गए हुए थे. मैं नहीं बता सकती कहां से आई थी, लेकिन उन लोगों ने मस्जिद गिरा दी."
हालांकि विमलेश साथ-साथ ये भी कहती हैं कि मुसलमान भाई क़ुरान पाक की क़सम ले कर घिरी दीवार पर चटाई डाल दी और नमाज़ पढ़ने लगे.
मुश्ताक़ और कॉलोनी के दूसरे मुसलमान के मुताबिक़ कि मस्जिद बनाने का काम चंद माह पहले ही शुरू हुआ था और नमाज़ भी वहां अदा करने का काम रमज़ान में ही शुरू हुआ था.
मुसलमान वहां एक छोटा मदरसा भी चला रहे थे जहां बच्चों को धार्मिक शिक्षा दी जा रही थी.
मुश्ताक़ कहते हैं कि मस्जिद की ज़मीन के लिए वहीं रहने वाले अकबर अली नाम के व्यक्ति से बातचीत हुई थी कि उन्हें धीरे-धीरे पैसे दे दिए जाएंगे.
मगर इलाक़े में दूसरी तरह की अफ़वाहों का बाज़ार भी चल रहा है.
कृष्णपाल शर्मा कुछ महीने पहले ही बागपत से बेटे के पास आए हैं और उन्हें बताया गया है कि ज़मीन किसी साधू की थी और ज़मीन में शिव लिंग भी मौजूद था, लेकिन साधू हरिद्वार गया और ज़मीन पर नमाज़ पढ़ी जाने लगी.
शब्बीर कहते हैं कि अगर हमारे भाइयों को एतराज़ था तो उन्होंने पहले क्यों नहीं कहा और अब मस्जिद को क्यों ढहाया गया है.
व्हाट्सएप पर मस्जिद का विरोध
विमलेश सीधे तौर पर कहती हैं कि गांव के लोगों को एतराज़ है कि वहां मस्जिद बने.
इस बीच अम्बे कॉलोनी की गली नंबर दो के प्लॉट नंबर 149 को लेकर अफ़वाहें जारी हैं - व्हाट्सऐप पर शेयर किये जा रहे मैसेजेज़ में हिंदुओं से कहा जा रहा है कि वहां 8-10 घर ही मुसलमानों के हैं तो फिर वो मस्जिद क्यों बना रहे हैं.
हिंदुओं से कहा जा रहा है कि इस इस्लामिक प्रकिया को रोका जाना चाहिए.
पुलिस ने मामले में ज़मीन के मालिक - अकबर अली की शिकायत पर आठ लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है और दो लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है.
दर्जन भर पुलिस की टुकड़ी मस्जिद के पास मौजूद एक ख़ाली प्लॉट में खाट और कुर्सियां डालकर चौकीदारी पर लगी है.
पूर्वोतर दिल्ली के अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर देवेंद्र आर्य ने कहा कि पुलिस शाम के वक्त - ख़ासतौर पर इफ़्तार के वक्त वहां रास्तों और गलियों का दौरा कर रही है.
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