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हॉस्टल खाली, पढ़ाई ठप्प, छात्राएं दहशत में
राजकीय अम्बेडकर आवासीय बालिका उच्च विद्याल, दिग्घी (वैशाली) में सन्नाटा पसरा है. 345 छात्राएं इस आवासीय स्कूल में रहती है लेकिन अब वहां कोई नहीं है. स्कूल की शिक्षिका अनीता कुमारी कहती है, "हमने गार्जियन को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन वो नहीं माने और 9 जनवरी तक तकरीबन पूरा हॉस्टल खाली हो गया."
दरअसल इस स्कूल की दसवीं की एक छात्रा का शव हॉस्टल के पास 8 जनवरी की सुबह मिला. जिसके बाद से ही छात्राओं में दहशत पसर गई.
दलित बच्चियों के लिए 1991 में खुले इस आवासीय स्कूल में पढ़ने वाली एक छात्रा कहती है, "मैं और मेरी तीन बहनें यहां पढ़ती है. कभी डर नहीं लगा. लेकिन उसकी मौत देखकर अब स्कूल जाने के नाम से रूह कांपती है. हम सब को पापा घर ले आए है और अब परीक्षा देने ही जाएगें."
छात्रा की मौत के बारे में बहुत साफ़ तौर पर पता नहीं चल पा रहा है. शिक्षक मिथिलेश सिंह के मुताबिक, "क्या हुआ, कैसे हुआ, हमें कुछ मालूम नहीं."
वही बीबीसी से कुछ छात्राओं ने बातचीत में बताया कि सुबह 6 बजे के आसपास हॉस्टल की कुछ छात्राओं को छात्रावास ब्लॉक 2 के गेट के पास छात्रा का शव पड़ा मिला. उसने फ्रॉक पहनी थी और उसके शरीर का निचला भाग खून से लथपथ था.
पांचवी में पढ़ने वाली एक छात्रा ने बताया, "सुबह मालूम चला तो दीदीयां गई और उनके (मृत छात्रा) कपड़े बदल दिए गए. उनको एक चौकी पर लेटाया गया जिसके बाद प्रिंसिपल मैडम को खबर की गई जो बाद में आई और बहुत जोर जोर से रोने लगी."
इस आवासीय स्कूल को देखने के बाद छात्राओं की सुरक्षा में बड़ी चूक से इंकार नहीं किया जा सकता. छात्रावास ब्लाक 2 जिसमें कक्षा 6 से 10 तक की छात्राएं रहती है वहां रात 11 बजे बिजली चली जाना सामान्य बात है.
छात्राओं को हॉस्टल में पानी पीने की कोई सुविधा नही है. यानी अगर किसी को रात में पानी चाहिए तो उसे स्कूल की दूसरी बिल्डिंग में जाना होगा. दसवीं की एक छात्रा ने बताया कि हॉस्टल से पीने के पानी की प्रबंध वाली बिल्डिंग की दूरी 9 मिनट की है.
स्कूल में तीन गार्ड की तैनाती है जिसमें से एक वैशाली डीएम के आवास पर प्रतिनियुक्त है. महिला की तैनाती थी जो खुद दिव्यांग है.
एक छात्रा ने बताया, "हॉस्टल के गेट में कभी ताला नहीं लगाया जाता था. गार्ड को लेकर हम लोग कई बार बोले कि ऐसा गार्ड दो जो हमारी रक्षा करे. जो गार्ड हैं वो तो अपनी रक्षा खुद नहीं कर सकते."
हालांकि कोई भी छात्रा स्कूल में किसी तरह की छेड़खानी या किसी अनहोनी घटना से इंकार करती है. लेकिन ठीक हॉस्टल के पीछे मिट्टी खोदकर एक सुरंग बनाई गई थी जिसे घटना के बाद पाट दिया गया है.
स्थानीय पत्रकार सुनील के मुताबिक, "देखने से ये सुरंग ऐसी लगती थी कि वहां से लोगों का आना जाना बहुत ज्यादा होता है."
घटना के बाद कल्याण पदाधिकारी का नया प्रभार संभाल रहे उपेन्द्र कुमार यादव ने कहा, "हमारी पहली प्राथमिकता बच्चियों को स्कूल वापस लाना है. दूसरा स्कूल में सीसीटीवी कैमरा, हॉस्टल में पानी के लिए मशीन, महिला और पुरूष सुरक्षा गार्ड की तैनाती होगी. बाकी शिक्षिकाएं स्कूल परिसर में ही रहे ये भी जरूरी किया जा रहा है."
इस बीच मृत छात्रा की मां के मुताबिक, "दो दिन पहले ही उसने फोन करके कहा था कि उसके टीचर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालते है. मैं स्कूल उसको घर वापस लाने भी गई थी लेकिन मुझे भगा दिया. उसकी मौत की ख़बर पर मैं स्कूल गई तो मैने उसके शरीर पर चोट के गहरे निशान, छाती पर घाव देखा. उसके निजी अंग में कपड़ा ठूंसा गया था. ये सब स्कूल की मिलीभगत से हुआ."
वहीं वैशाली एस पी राकेश कुमार के मुताबिक, "बच्ची के शरीर पर जांघ और उसके निजी अंग के पास फ्रैक्चर जैसी चोट है. बाकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बलात्कार की बात पुष्ट नहीं होती. बच्ची के कपड़े फारेंसिक जांच के लिए भेज रहे है. इस मामले में स्कूल के दोनों गार्ड की गिरफ्तारी हो चुकी है. बाकी प्राचार्य इंदु देवी से पूछताछ की जा रही है."
मृत बच्ची के बारे में उसकी सहेलियां बताती है कि वो खेल कूद से लेकर पढ़ाई में 'एक्सपर्ट' थी. उसका यूं चले जाना एक सपने का अंत है. लेकिन ये सिर्फ उस बच्ची के सपने का अंत नहीं है बल्कि अंत तो बहुत सारे सपनों का है क्योंकि बच्चियों ने सपनों को पंख देने वाली जगह यानी स्कूल छोड़ दिया है.
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