'बोल्ड' मसान में कोई कट नहीं करेंगे

    • Author, श्वेता पांडेय
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

नीरज घेवान के निर्देशन में बनी फ़ि‍ल्‍म ‘मसान’ ने कान्‍स फ़िल्‍म फ़ेस्‍टिवल में अपने नाम दो पुरस्‍कार क‍िए और कम बजट के इस फ़िल्म की हर ओर प्रशंसा हो रही है.

बोल्ड विषय पर बनी इस फ़िल्म ने दुनियाभर के दर्शकों से प्रशंसा बटोरी है और इसका ट्रेलर हाल ही में मुंबई में जारी क‍िया गया.

फ़िल्म 24 जुलाई को रिलीज़ होगी.

इसके अलग-अलग पहलूओं पर पर हमसे कई बातें साझा की निर्देशक नीरज घेवान से.

कान्स का एहसान

नीरज मानते हैं कि फ़िल्म भले ही कितनी अच्छी हो लेकिन अगर विदेशों में इसे सराहना नहीं मिलती तो शायद भारत में इसे कोई पूछता भी नहीं.

बॉलीवुड के पीआर कल्चर पर वो कहते हैं, “कान्‍स की वजह से जो सुर्ख‍ियां मसान ने बटोरी हैं, भारत में उतनी पब्लिसिटी के लिए काफ़ी पैसा लगाना पड़ता."

भारत में स्टार कल्चर के चलते छोटे बजट की फ़िल्मों का बुरा हश्र कोई नई बात नहीं है और इसलिए ही मसान के अलावा, काका मुत्तई और किल्ला जैसी फ़िल्मों को निर्माता निर्देशक पहले फ़िल्म समारोहों में ले जाते हैं और फिर भारत में रीलीज़ करते हैं.

नीरज के मुताबिक़ विदेश में फ़िल्म ले जाने से अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर कई ख़रीदार मिल जाते हैं.

कहानी

नीरज के मुताबिक़ मसान एक ही साल में बन कर तैयार हो गई थी लेकिन रिलीज़ में उन्होनें वक्त लिया.

वो बताते हैं, “गुड़गांव में नौकरी के दौरान मेरे एक सहकर्मी ने मुझे बनारस के घाट और वहां होने वाले दाहसंस्‍कार के बारे में बताया था. इसके बाद मैंने उन लोगों के बारे में सोचा, जो दिनभर इन शवों को जलाते होंगे. जीवन के प्रत‍ि उनके नज़र‍िए को ध्‍यान में रखकर छोटी-सी कहानी लिख ली.”

नीरज कॉरपोरेट जगत से आते हैं और वो एक वेबसाइट पर फ़ि‍ल्‍मों के बारे में लिखते थे, जहां अनुराग कश्‍यप भी लिखा करते थे.

अनुराग से वहीं दोनों की पहचान हुई और नीरज नौकरी को अलव‍िदा कहकर फ़िल्‍म ‘गैंग्‍स ऑफ़ वासेपुर’ के दौरान अनुराग के ए डी (असिस्‍टेंट डायरेक्‍टर) बन गए और सिलिसला चल पड़ा.

ग़लती

फ़िल्‍म फ़ेस्‍टिवल की शोभा बढ़ाने वाली फ़िल्‍मों के बारे में अक्सर कहा जाता है क‍ि वो व्‍यवसाय‍िक तौर पर कमज़ोर होती हैं लेकिन नीरज ऐसा नहीं मानते.

तो क्या भारतीय दर्शकों के लिए ‘मसान’ में कुछ बदलाव किए जाएंगे क्योंकि यह एक बोल्ड मुद्दें पर बनी फ़िल्म है ऐसे में नीरज कहते हैं, “कान्‍स से ज्‍़यादा भारतीय दर्शकों को देखने को म‍िलेगा. मैंने इसे थोड़ा और इमोशनल बना दिया है. क्‍योंकि हम भावुक क़िस्‍म के लोग हैं.”

नीरज बॉलीवुड में महज पांच साल पुराने हैं. उनके खाते में इससे पहले ‘शॉर्ट’ नाम की शॉर्ट फ़ि‍ल्‍म दर्ज़ है. अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर ख्‍यात‍ि पाने वाली ‘मसान’ के बाद लोगों को बेहतर उम्मीदें हैं.

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