‘बाबूजी’ बने रहने का अफ़सोस है..

आलोकनाथ कहते हैं कि संस्कारी बाबूजी के तौर पर ही सही उनकी अपनी अलग जगह तो है.
इमेज कैप्शन, आलोकनाथ कहते हैं कि संस्कारी बाबूजी के तौर पर ही सही उनकी अपनी अलग जगह तो है.
    • Author, स्वाति बक्शी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

‘संस्कारी बाबूजी’ उर्फ़ <link type="page"><caption> आलोकनाथ ट्विटर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2014/06/140626_aloknath_twitter_pkp.shtml" platform="highweb"/></link> पर आए और सुर्ख़ियां बन गईं, लेकिन जिस बाबूजी ने उन्हें पहचान दी क्या उस छवि में बंध जाने का आज उन्हें अफ़सोस है?

आलोकनाथ कहते हैं, अफ़सोस ज़रूर है इस बात का. कभी-कभी अपने मन को मारना पड़ता है. उसके पीछे एक लंबी दास्तां है. मैं सच कहूं तो बहुत ही साधारण मिडिल क्लास परिवार से मुंबई गया था. दिल्ली में थियेटर बहुत किया, लेकिन पैसा नहीं मिला.’’

वो बताते हैं कि ‘‘मुंबई पहुंचे तो पता चला कि यहां एक्टिंग नहीं चेहरे चलते हैं..फिर 'बुनियाद' धारावाहिक मिला रमेश सिप्पी के साथ. उसके बाद वैसे ही रोल मिलते चले गए. फिर क्या करते. मैं नहीं करता तो कोई और करता. महँगा शहर था, मैंने सोचा जो है वही करो. लेकिन अफ़सोस नहीं है. जो हुआ सो हुआ. कम से कम बाबूजी ने पहचान तो दी. अपनी एक जगह तो दी. ज़िंदगी पूरी है.’’

मज़ाक

'हम आपके हैं कौन' फ़िल्म में आलोकनाथ का किरदार ख़ासा लोकप्रिय रहा.
इमेज कैप्शन, 'हम आपके हैं कौन' फ़िल्म में आलोकनाथ का किरदार ख़ासा लोकप्रिय रहा.

ट्विटर पर 'संस्कारी बाबूजी' के नाम पर बने मज़ाक वो कहते हैं कि वे इस मज़ाक का भी मज़ा उठाते हैं, लेकिन कहीं उन्हें इस बात से ठेस भी पहुंची है.

आलोकनाथ कहते हैं, ''शुरू में मुझे इस बात का दुख हुआ कि मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है. मैने ऐसा क्या कर दिया है. लेकिन धीरे-धीरे इसका फ़ायदा होने लगा. मुझे उधार की लोकप्रियता मिल गई. एक शख़्स जो चुपचाप अपनी ज़िंदगी जी रहा था, उसका एक अलग चेहरा लोगों के सामने आया. इसका फ़र्क मेरे काम पर भी पड़ा.’’

इसका असर यह हुआ कि आलोकनाथ कॉमेडी की तरफ़ झुक गए हैं और अब जल्द ही टीवी पर उनका एक नया कॉमेडी धारावाहिक आने वाला है.

हालांकि साल 2008 के बाद वो किसी फ़िल्म में नज़र नहीं आए.

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