इसराइल ने ईरान के तेल ठिकानों को निशाना बनाया तो दुनिया पर क्या असर हो सकता है?

ईरान की इस्फ़ाहन तेल रिफ़ाइनरी
    • Author, चंदन कुमार जजवाड़े
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

ईरान और इसराइल के बीच बढ़ते ताज़ा तनाव का सबसे ज़्यादा असर कच्चे तेल के बाज़ार पर पड़ने की आशंका है. इसकी वज़ह से दुनिया भर में तेल की कीमत काफ़ी बढ़ सकती है.

यह आशंका अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बयान के बाद ज़्यादा बढ़ गई है.

जो बाइडन ने कहा है कि ईरान के तेल ठिकानों को इसराइल निशाना बना सकता है और अमेरिका में इस संभावित हमले पर चर्चा हुई है. बाइडन से पूछा गया कि क्या अमेरिका ईरान के तेल ठिकानों पर इसराइली हमले का समर्थन करेगा?

बाइडन ने जवाब दिया,''हम इस पर चर्चा कर रहे हैं.'' बाइडन के इस बयान के बाद कच्चे तेल की कीमत पांच फ़ीसदी बढ़ गई है.

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इसराइल- ईरान तनाव के ताज़ा हालात

ईरान की इस्फ़ाहन तेल रिफ़ाइनरी
इमेज कैप्शन, मध्य-पूर्व में जारी तनाव के माहौल में ईरान के तेल भंडार पर हमले की आशंका जताई जा रही है

ईरान ने इसी सप्ताह मंगलवार की देर रात इसराइल की ओर सैकड़ों मिसाइलें दागीं थीं. उसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है.

इसराइल के विदेश मंत्रालय के मुताबिक़ ईरान ने इसराइल पर 181 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं और इसमें एक फ़लस्तीनी व्यक्ति की मौत हुई.

पाँच महीने पहले यानी अप्रैल में ईरान ने इसराइल पर क़रीब 110 बैलिस्टिक मिसाइल और 30 क्रूज़ मिसाइलों से हमला किया था.

ईरान के ताज़ा मिसाइल हमले के बाद बंकर में इसराइली सुरक्षा कैबिनेट की एक बैठक हुई, जिसमें इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा, ''ईरान ने आज एक बड़ी गलती की है और उसे इसकी क़ीमत चुकानी होगी.''

जुलाई महीने में तेहरान में हमास के पॉलिटिकल विंग के प्रमुख इस्माइल हनिया की हत्या हो गई थी.

ईरान इसके पीछे इसराइल का हाथ बताता है. हालांकि इस हत्या के फौरन बाद ईरान ने इसराइल के ख़िलाफ़ कोई आक्रामक कदम नहीं उठाया था.

उसके बाद इस साल 27 सितंबर को लेबनान में हिज़्बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह की मौत एक इसराइली हमले में हुई थी.

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ये दोनों ही नेता ईरान समर्थक माने जाते थे. माना जाता है कि उनकी हत्या के बाद ईरान पर भी अपने ही देश के अंदर से इसका जवाब देने का दबाव था.

ईरान का कहना है कि उसने इन दोनों हत्याओं का बदला लेने के लिए ही इसराइल पर मिसाइलें दागीं हैं.

बुधवार को इसराइली मीडिया में छप रही ख़बरों के अनुसार, इसराइल कुछ ही दिनों के भीतर ईरान के कुछ अहम रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाएगा. इन हमलों में ईरान के तेल के अहम ठिकानों पर हमले की भी अटकलें हैं.

जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कनफ्लिक्ट रिजॉल्यूशन की फ़ैकल्टी मेंबर प्रो. रेशमी काज़ी कहती हैं, "मध्य-पूर्व में जिस तरह का तनाव बना हुआ है, उसमें अगर ईरान के तेल कुओं और भंडार पर हमला होता है तो इसका असर बड़े पैमाने पर होगा."

रेशमा काज़ी के मुताबिक़ इससे न केवल तेल की सप्लाई पर असर पड़ेगा बल्कि रणनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण कई रास्ते बंद हो सकते हैं. इससे अन्य चीजों की ढुलाई के लिए भी लंबा रास्ता लेना पड़ेगा, जिससे लागत और महंगाई बढ़ेगी.

रेशमा काज़ी मानती हैं कि कुल मिलाकर इसका सीधा असर भारत समेत दुनिया भर में आम लोगों पर पड़ेगा.

फ़ारस की खाड़ी होते हुए तेल का ट्रांसपोर्ट
इमेज कैप्शन, फ़ारस की खाड़ी पर कच्चे तेल का बड़ा कारोबार निर्भर करता है
भारत में गुवाहटी रिफ़ाइनरी के पास मौजूद तेल टैंकर (सांकेतिक तस्वीर)
इमेज कैप्शन, ईरान के तेल भंडार पर इसराइल के हमले से तेल कीमतों में उछाल की संभावना है

दुनिया के तेल बाज़ार में ईरान की अहमियत

ईरान दुनिया में तेल का सातवां सबसे बड़ा उत्पादक देश है. यह अपने तेल उत्पादन का क़रीब आधा निर्यात करता है. इसके प्रमुख बाज़ारों में चीन शामिल है.

हालांकि चीन में तेल की कम मांग और सऊदी अरब से तेल की पर्याप्त सप्लाई ने इस साल तेल की कीमतों को बढ़ने से काफ़ी हद तक रोके रखा है.

दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल भंडार ईरान के पास है. जबकि ईरान में दुनिया का दूसरे सबसे बड़ा गैस भंडार है.

पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) में ईरान तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और प्रति दिन लगभग 30 लाख बैरल तेल का उत्पादन करता है. ये कुल वैश्विक उत्पादन का लगभग तीन फीसदी है.

इस बात की आशंका है कि अगर इसराइल ने ईरान के तेल ठिकानों को निशाना बनाया और उसे नष्ट किया तो इससे तेल की सप्लाई पर असर पड़ेगा और दुनिया भर में तेल की क़ीमतों में बड़ा इज़ाफा हो सकता है.

रक्षा विश्लेषक राहुल बेदी कहते हैं, "इसराइल के लिए ईरान के तेल कुओं और ठिकानों पर हमला करता है तो ज़ाहिर तौर पर इसका असर दुनिया भर के तेल बाज़ार पर पड़ेगा."

राहुल बेदी मानते हैं कि आर्थिक पाबंदियों की वजह से चीन इस वक़्त ईरान से सबसे ज़्यादा तेल ख़रीदता है, जबकि भारत फ़िलहाल रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल ख़रीद रहा है.

लेकिन ईरान से तेल नहीं मिलने पर चीन में अन्य देशों से इसकी मांग बढ़ेगी और इसका असर तेल की क़ीमतों पर होगा.

सांकेतिक तस्वीर

भारत पर कितना असर

इसराइल पर ईरान के हमले के बाद से मध्य-पूर्व में संघर्ष बढ़ने की आशंका गहरा गई है, जिसका सीधा असर तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है.

इस असर को इस बात से भी समझ सकते हैं कि जब हसन नसरल्लाह की हत्या के बाद सिर्फ़ ईरान के मिसाइल हमला करने की आशंका जताई जा रही थी, उसी समय अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की कीमतें क़रीब तीन फ़ीसदी बढ़ गई थीं.

ऐसे में अगर इसराइल ने ईरान के तेल ठिकानों को निशाना बनाया तो इसका व्यापक असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ार पर हो सकता है.

'ब्रेंट क्रूड' अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमत बताने वाला बेंचमार्क है. इसके मुताबिक़ अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के ईरानी तेल ठिकानों पर दिए गए बयान के बाद कच्चे तेल की क़ीमतों में पांच फ़ीसदी तक बढ़ोतरी हो चुकी है.

'ब्रेंट क्रूड' के मुताबिक़ सोमवार को इसराइल पर ईरान के मिसाइल हमलों के बाद कच्चे तेल की क़ीमतों में अब तक 10 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है और यह क़रीब 77 डॉलर प्रति बैरल हो गया है. हालाँकि यह अभी भी इस साल की अधिकतम कीमत से कम है.

राहुल बेदी कहते हैं, "इस मामले में भारत के पक्ष में एक बात हो सकती है कि ईरान से सप्लाई कम होने पर भारत रूस के ख़रीदे हुए तेल को दूसरे देशों को ज़्यादा दाम पर बेच सकता है. लेकिन इसका भारत पर कैसा जियो-पॉलिटिकल दबाव होगा, यह अभी नहीं कहा जा सकता है."

फ़रवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था. अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए. उससे निपटने के लिए रूस ने भारत समेत दुनिया के कई देशों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से कम क़ीमत पर कच्चा तेल बेचने की पेशकश की थी.

पिछले साल मई में यूरोपीय संघ के विदेश नीति मामलों के प्रमुख जोसेप बुरेल ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें इस बात की जानकारी है कि भारत बड़े पैमाने पर रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है और उसे प्रोसेस कर आगे यूरोप को निर्यात कर रहा है.

उन्होंने इसे पाबंदियों को तोड़ने जैसा बताया था और कहा कि सदस्य देशों को इसे रोकने के लिए कदम उठाने की ज़रूरत है.

वहीं रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों में साल 2022 में भारत का यूरोप के तेल उत्पादों का निर्यात 70 फीसदी तक बढ़ा है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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