दिल्ली प्रदर्शन: थाने के भीतर क्या हुआ? वकीलों ने बताया कि पुलिस ने कैसा सलूक किया था

शनिवार को जंतर-मंतर के पास वकीलों का प्रदर्शन
इमेज कैप्शन, शनिवार को जंतर-मंतर के पास वकीलों का प्रदर्शन
    • Author, विनीत भल्ला
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

(नोट: इस ख़बर के कुछ हिस्से आपको विचलित कर सकते हैं)

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शनों के बीच दिल्ली में कई वकीलों ने आरोप लगाया है कि शनिवार और रविवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें मनमाने तरीक़े से हिरासत में लिया और उनके साथ मारपीट की.

प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई के बाद रविवार को सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई हुई. कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रतिबंधित इलाक़ों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी जाए.

कोर्ट ने कहा कि सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वकीलों और पत्रकारों को अपने पेशे से जुड़े काम करने से नहीं रोका जाएगा.

हालांकि, बीबीसी से बात करते हुए पांच वकीलों ने पुलिस की ओर से मारपीट और हिरासत में लिए जाने के अपने अनुभव बताए. इनमें से कुछ वकीलों को सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद भी हिरासत में लिया गया. बीबीसी ने संबंधित थानों के पुलिस अधिकारियों से फ़ोन पर संपर्क कर उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही लेकिन लगातार कोशिशों के बाद भी एक थाने से कोई जवाब नहीं मिला तो दूसरे थाने के एक अधिकारी ने इन आरोपों को नकार दिया.

शनिवार सुबह करीब 70 वकील सुप्रीम कोर्ट के बाहर अपने पेशे की बैंड और गाउन पहनकर जमा हुए थे. उनका इरादा जंतर-मंतर तक मार्च करने का था.

इस समूह में शामिल वरिष्ठ अधिवक्ता नंदिता राव ने बताया कि पुलिस ने उन्हें मंडी हाउस के पास रोक लिया. राव ने बीबीसी से कहा, "निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट के बाहर वर्दी में वकीलों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन पुलिस ने रोक दिया और हमें बिना किसी वजह के हिरासत में ले लिया गया."

'अपमानजनक अनुभव'

वरिष्ठ अधिवक्ता नंदिता राव ने बताया कि पुलिस हिरासत में उनके साथ अपमानजनक बरताव किया गया
इमेज कैप्शन, वरिष्ठ वकील नंदिता राव ने बताया कि पुलिस हिरासत में उनके साथ अपमानजनक बर्ताव किया गया

नंदिता राव को शारीरिक रूप से चोट नहीं पहुंची, लेकिन उन्होंने हिरासत में लिए जाने को "काफ़ी अपमानजनक" बताया.

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
दिनभर
Dinbhar: आवाज़ वही, अंदाज़ नया

देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.

एपिसोड

समाप्त

वकीलों के समूह को पुलिस की बस में यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स ले जाया गया. जब यह ख़बर आई कि भारत के मुख्य न्यायाधीश ने वकीलों को हिरासत में लिए जाने के मामले में दख़ल दिया है, तो राव और दूसरे लोगों को एक घंटे के भीतर रिहा कर दिया गया.

राव ने कहा, "हम कोई ग़ैरक़ानूनी काम नहीं कर रहे थे. असहमति जताना कोई अपराध नहीं है. सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि मौलिक अधिकार सरकार की ओर से दिया गया कोई तोहफ़ा नहीं हैं. ये सरकार की ज़िम्मेदारी हैं."

उसी समूह के साथ हिरासत में लिए गए एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड सुभाष चंद्रन केआर ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें डंडों से मारा. उन्होंने कहा, "युवाओं से लेकर बुज़ुर्गों तक, हर किसी के साथ बदसलूकी की गई." उन्होंने बताया कि उन्हें हिरासत में लेने वाले कुछ पुलिसकर्मियों ने अपनी वर्दी पर अनिवार्य नेम टैग नहीं लगा रखा था.

चंद्रन ने एक महिला प्रदर्शनकारी से जुड़ी परेशान करने वाली घटना का भी ज़िक्र किया. इसकी औपचारिक शिकायत दिल्ली पुलिस कमिश्नर से की गई है.

बीबीसी ने जिस लिखित शिकायत को देखा है, उसके मुताबिक़ पुलिस ने उस युवती को ज़बरदस्ती बस में धकेला. इससे उसकी शर्ट के बटन खुल गए. जब उसने महिला पुलिसकर्मियों से मदद मांगी, तो आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने मदद करने से इनकार कर दिया.

इसी दौरान बस ड्राइवर उसका वीडियो बनाने लगा. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर समेत पुलिसकर्मी "तमाशा देखते रहे" और मदद के लिए की गई अपील को नज़रअंदाज़ किया. इसके बाद हिरासत में लिए गए वकील विरोध में बस से उतर गए.

'पुलिस कार्रवाई में तेज़ी आती गई'

वीडियो कैप्शन, आईसा अध्यक्ष नेहा बोरा बोलीं, 'हमें हिरासत में लेने से नहीं रुकेगा आंदोलन'

जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, पूरे शहर में पुलिस की कार्रवाई और तेज़ होती दिखी.

शनिवार शाम वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फ़रासत को कई पुलिसकर्मियों की ओर से हाथ-पैर पकड़कर उठाकर ले जाने और उनकी शर्ट फटी होने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

फ़रासत ने बीबीसी को बताया कि वह सफदरजंग फ्लाईओवर के पास खड़े थे. वहां पुलिस ने प्रदर्शन के लिए जुटे लोगों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया. इनमें नेता योगेंद्र यादव भी शामिल थे. जब उन्होंने बीच में दख़ल देने की कोशिश की, तो पुलिस अधिकारियों ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया.

फ़रासत ने कहा, "पुलिस लोगों को उठा रही थी, पकड़ रही थी और फेंक रही थी. बात सिर्फ़ मेरी नहीं है. वे सड़क पर हर किसी के साथ इसी तरह पेश आ रहे थे."

फ़रासत और करीब एक दर्जन छात्रों को किसी औपचारिक हिरासत केंद्र ले जाने के बजाय पुलिस की बस में बैठाया गया और कई किलोमीटर दूर सड़क किनारे उतार दिया गया.

वायरल वीडियो के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी तस्वीरें शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ राज्य की ओर से इस्तेमाल की जा रही "ताक़त की प्रकृति" को दिखाती हैं.

'जहां सीसीटीवी नहीं थे वहां ले जाकर की पिटाई'

युवा वकील फिडल टॉम ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ बहुत मारपीट की
इमेज कैप्शन, युवा वकील फिडल टॉम ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ बहुत मारपीट की

युवा वकील फ़िडल टॉम को दोपहर में आईएनए मार्केट इलाक़े से हिरासत में लिया गया था. उन्हें मैदान गढ़ी की संजय कॉलोनी पुलिस चौकी ले जाया गया.

उनका आरोप है कि उन्होंने सादे कपड़े पहने एक व्यक्ति को पुलिस थाने के अंदर एक छात्र प्रदर्शनकारी की पिटाई करते देखा और इसका विरोध किया.

टॉम ने कहा, "मैंने उससे पूछा कि उसकी वर्दी कहां है और लोगों को पीटने का अधिकार उसे किसने दिया है."

इसके जवाब में आरोप है कि उस व्यक्ति ने टॉम को गले से पकड़ लिया और उन्हें ऐसी जगह घसीटकर ले गया जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं थे.

उन्होंने बताया, "उन्होंने मुझे ज़मीन पर गिरा दिया और करीब 10 पुलिसकर्मियों ने मुझे पीटना शुरू कर दिया. एक पुलिस अधिकारी ने अपने जूते से मेरे चेहरे पर पांच या छह बार लात मारी."

सफदरजंग अस्पताल का एक मेडिको-लीगल सर्टिफिकेट (एमएलसी), जो रविवार सुबह 3 बजे जारी किया गया और जिसे बीबीसी ने देखा है, उनके इस दावे की पुष्टि करता है.

मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि "कई चोटें संभवतः किसी कुंद वस्तु से बार-बार चोट लगने के कारण हुई हैं."

इसमें उनके चेहरे पर सूजन और खरोंच, पीठ पर कई जगह चोट के निशान और जांघों और बाजुओं पर सूजन वाले निशान शामिल हैं.

'फ़ोन का पासवर्ड ना देने पर पिटाई'

सफदरजंग अस्पताल का एक मेडिको-लीगल सर्टिफिकेट (एमएलसी) वकील फिडल टॉम के इस दावे की पुष्टि करता है कि उनको मारा पीटा गया
इमेज कैप्शन, सफ़दरजंग अस्पताल का एक मेडिको-लीगल सर्टिफिकेट (एमएलसी) वकील फिडल टॉम के इस दावे की पुष्टि करता है कि उनको मारा पीटा गया

लेकिन कथित बदसलूकी यहीं ख़त्म नहीं हुई. टॉम ने बताया कि पुलिस अधिकारियों ने उनसे फोन का पासवर्ड मांगा. जब उन्होंने इनकार किया, तो आरोप है कि वर्दी पहने एक पुलिस अधिकारी उनके ऊपर बैठ गया और उनके हाथों को मरोड़कर फिंगरप्रिंट की मदद से ज़बरदस्ती फोन अनलॉक किया.

इसके बाद उन्हें एक ऐसे कमरे में रखा गया, जहां एक अभियुक्त को ज़ंजीर से बांधकर रखा गया था. उन्हें रविवार रात 2 बजे ही रिहा किया गया.

बीबीसी ने संजय कॉलोनी पुलिस चौकी से प्रतिक्रिया लेने के लिए फोन करने की कोशिश की. लेकिन पुलिस चौकी के लिए सार्वजनिक रूप से दिया गया फोन नंबर बंद मिला.

इस बीच, रविवार को भी कुछ वकीलों को पुलिस की हिंसा का सामना करना पड़ा. ऐसा सुप्रीम कोर्ट के उसी दिन पहले दिए गए आदेश के बाद भी हुआ.

पुलिस की प्रतिक्रिया

वीडियो कैप्शन, 10 अक्तूबर को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ से विरोध प्रदर्शन के दौरान पूरे दिन क्या हुआ?

अधिवक्ता करिश्मित केसवानी ने बीबीसी को बताया कि मंडी मार्ग पुलिस स्टेशन में एक पुलिस अधिकारी ने उनके साथ मारपीट की. वह शाम 7:30 बजे कुछ हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को कानूनी मदद देने के लिए वहां गए थे.

केसवानी ने बीबीसी से कहा, "उसने मुझे धक्का दिया और मेरा हाथ पकड़ लिया. मैंने उसे साफ़ तौर पर बताया कि एक क़ानूनी पेशेवर के तौर पर वह मुझे छू नहीं सकता."

केसवानी के मुताबिक़, पुलिस ने शाम को हिरासत में ली गई महिलाओं को रिहा कर दिया था. लेकिन कई पुरुष प्रदर्शनकारियों को बिना किसी साफ़ वजह के देर रात तक हिरासत में रखा गया.

हालांकि, मंडी मार्ग पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने इन आरोपों से इनकार किया. अधिकारी ने अपना नाम बताने से इनकार कर दिया. उन्होंने दावा किया कि थाने में कोई हिंसा नहीं हुई और जिस कांस्टेबल पर आरोप है, वह गश्त की ड्यूटी पर था.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि थाने का इस्तेमाल सिर्फ़ कनॉट प्लेस पुलिस की ओर से लाए गए हिरासत में लिए गए लोगों को रखने के लिए किया जा रहा था. जब बीबीसी ने उनसे और जानकारी मांगी तो अधिकारी ने अचानक फोन काट दिया.

शॉर्ट वीडियो देखिए
वीडियो कैप्शन, पुलिस की भारी तैनाती पर क्या बोले स्टूडेंट

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने मंगलवार दोपहर कोर्ट परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने एक मिनट का मौन रखने का एलान किया. एससीबीए ने कहा है कि पुलिस की ओर से दुर्व्यवहार का सामना करने वाले साथी वकीलों के समर्थन में अधिवक्ता सफ़ेद रिबन पहनेंगे.

सोमवार दोपहर दिल्ली हाई कोर्ट में भी कई वकील जुटे. उन्होंने संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया.

कर्नाटक स्टेट यूथ लॉयर्स फोरम ने भी दिल्ली में वकीलों और छात्रों की कथित ग़ैरक़ानूनी गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ मंगलवार दोपहर बेंगलुरु में हाई कोर्ट के पास प्रदर्शन का एलान किया है.

एससीबीए और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन, दोनों ने दिल्ली पुलिस की ओर से वकीलों को कथित तौर पर हिरासत में लेने और उनके साथ मारपीट के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का रुख़ किया है.

इन याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना है. इनके साथ दिल्ली पुलिस की ओर से कथित ग़ैरक़ानूनी हिरासत और अदालत की अवमानना से जुड़ी दूसरी याचिकाओं पर भी सुनवाई हो सकती है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.