प्रोटेस्ट के दौरान हिरासत में लिए गए कई जर्नलिस्ट, पत्रकार संगठन क्या बोले और क्या है क़ानून

दिल्ली प्रदर्शन
इमेज कैप्शन, दिल्ली में 11 अक्तूबर को प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार को हिरासत में लिया गया
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े के ल‍िए दिल्ली में हो रहे प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ शन‍िवार और रव‍िवार को कई पत्रकारों को भी हिरासत में लिया गया.

कई पत्रकारों के साथ बदसलूकी की ख़बरें भी आई हैं.

कुछ पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की की गई और कुछ को अलग-अलग जगहों पर प्रोटेस्ट को कवर करने के दौरान हिरासत में लिया गया.

'द हिंदू' के मुताबिक़ जिन पत्रकारों को हिरासत में लिया गया उनमें हिन्दी अख़बार नवभारत टाइम्स, डिजिटल न्यूज प्लेटफ़ॉर्म स्क्रॉल, न्यूज़लॉन्ड्री जैसे न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म के पत्रकार से लेकर स्वतंत्र पत्रकार तक शामिल हैं. हालांकि बाद में पत्रकारों को छोड़ दिया गया.

एक वीडियो में न्यूज़ फ्लेटफ़ॉर्म इंडियन एक्सप्रेस हिन्दी के पत्रकार ये बताते दिख रहे हैं कि पुलिस उन्हें भी डिटेन करके ले जा रही है. हालांक‍ि द‍िल्‍ली पुल‍िस ने अब तक इन मामलों पर अलग से कोई बयान नहीं द‍िया है.

भारत का संविधान पत्रकारों के रिपोर्टिंग करने, सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछने और जनहित के मुद्दों को नागरिकों के सामने लाने के अधिकार की रक्षा करता है.

अनुच्छेद 19(1)(ए) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है और प्रेस की स्वतंत्रता को भी इसी अनुच्छेद का हिस्सा माना गया है.

इस प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कई पत्रकारों ने दावा किया को वो पेशेवर तरीक़े से अपना काम कर रहे थे.

उन्हें अपना काम करने से रोका गया और गैरक़ानूनी तौर पर हिरासत में लिया गया.

जबकि सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले ही कहा है कि पत्रकारों, वकीलों और दूसरे प्रोफ़ेशनलों को उनका काम करने से नहीं रोका जाना चाहिए.

पत्रकारों के साथ क्या हुआ

महिला पत्रकार हिरासत में
इमेज कैप्शन, 11 अक्तूबर को दिल्ली में प्रदर्शन को कवर करते समय एक महिला पत्रकार को पुलिस ने डिटेन किया, जिसके गले में प्रेस कार्ड दिखाई दे रहा है

स्क्रॉल की एग़्जीक्यूटिव एडिटर सुप्रिया शर्मा ने शन‍िवार को एक्स पर लिखा, '' स्क्रॉल.इन के राजनीतिक संपादक शोएब दानियाल और साथी पत्रकार आयुष तिवारी को हिरासत में ले लिया गया.''

''शोएब दानियाल को दक्षिण दिल्ली की एक रिहायशी कॉलोनी से हिरासत में लिया गया, जो जंतर-मंतर से काफ़ी दूर है.''

इसी तरह नवभारत टाइम्स के संपादक आशीष पांडे ने शन‍िवार को ही अख़बार के दो पत्रकारों ऋतिक जोशी और राहुल चरस को हिरासत में लेने की सूचना दी थी. हालांकि बाद में उन्होंने बताया कि उन्हें छोड़ दिया गया.

वीडियो कैप्शन, दिल्ली प्रदर्शन में पुलिस ने जिन्हें हिरासत में लिया, उनकी ऐसे ही रही मदद
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टाइम्स ऑफ़ इंडिया एक फ़ोटो जर्नलिस्ट ने बताया कि वह और उनके साथ दिल्ली के आरके आश्रम में आइसा का प्रोटेस्ट कवर कर रहे थे. जब पुलिस ने वहां से सबको हटा दिया और सिर्फ़ पत्रकार बचे थे तो वो उन्हें और उनके कई साथियों को गर्दन से पकड़कर घसीटते हुए ले गए और पुलिस वैन में घुसा दिया. वो चिल्लाते रहे कि पत्रकारों को अपना काम करने दीजिए. लेकिन वो नहीं माने.

फ़ोटो जर्नलिस्ट ने बताया कि एक जगह जब पुलिस वाले बैरिकेड हटाने उतरे तो वो वैन से उतरकर भाग गए.

वहीं नितन कटियार नाम के डिजिटल जर्नलिस्ट ने बताया कि उन्हें कनॉट प्लेट के सामने हिरासत में ले लिया गया. उन्होंने दावा क‍िया क‍ि प्रेस कार्ड दिखाने के बावजूद उन्हें हिरासत में ले लिया गया. उन्होंने इस दौरान लगी अपनी चोट भी दिखाई.

इंडियन एक्सप्रेस हिन्दी ने रव‍िवार को एक्स पर एक वीडियो डालते हुए दावा क‍िया कि परिचय पत्र दिखाने के बावजूद उसके तीन पत्रकारों को हिरासत में ले लिया गया. इन पत्रकारों को बस में ज़बरदस्ती बिठाकर ले जाया गया. बाद में उन्हें छत्रसाल स्टेडियम लेकर जाकर छोड़ दिया.

हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक़ आरके आश्रम से हिन्दुस्तान के पत्रकार आशीष सिंह समेत 12 पत्रकारों को हिरासत में लिया गया. ये लोग प्रोटेस्ट कवर कर रहे थे.

भारत समाचार की पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा को भी शनिवार को विरोध प्रदर्शनों को कवर करते समय हिरासत में ले लिया गया.

उन्होंने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें पांच-छह महिला पुलिसकर्मी उन्हें हिरासत में लेते समय उनके हाथ-पैर पकड़ते हुई दिखाई दे रही हैं.

पत्रकार
इमेज कैप्शन, 10 अक्तूबर को दिल्ली के प्रेस क्लब में सीजेपी की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पहुंचे स्वतंत्र पत्रकार

द कारवां के असिस्टेंट मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर रयान थॉमस ने आरोप लगाया कि रव‍िवार को हिरासत में लेकर उनकी बुरी तरह पिटाई की गई.

पुलिस ने रयान का फ़ोन छीनने और उन्हें अपने रिकॉर्ड किए गए वीडियो डिलीट करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की.

स्वतंत्र पत्रकार श्याम मीरा सिंह को पुलिस ने हिरासत में लिया है. पुलिस उन्हें वैन में भरकर ले जाती दिखी.

वरिष्ठ पत्रकार श्रीनिवासन जैन ने कुछ पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की ख़बर दी. उन्होंने एक्स पर बताया कि आरके आश्रम से सात पत्रकारों को हिरासत में लिया गया था.

उन्होंने लिखा कि एक महिला पत्रकार को अपना आईकार्ड दिखाने के बावजूद पुलिस बस में ठूंसकर ले गई .

राणा अयूब, अजीत अंजुम और श्रीनिवासन जैन जैसे कई वरिष्ठ पत्रकारों ने भी कवर करने से रोके जाने और कुछ पत्रकारों को डिटेन किए जाने की बात कही.

पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने पर बीबीसी का ख़ास कार्यक्रम यहां देखें.

दिल्ली प्रदर्शन
इमेज कैप्शन, 10 अक्तूबर को एक प्रदर्शनकारी को हिरासत में लेने की कोशिश करती महिला पुलिसकर्मी

आंदोलनकारी नेताओं, पत्रकारों और पत्रकार संगठनों ने पत्रकारों को हिरासत लिए जाने की घटनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया दी है.

इंडिया यूथ कांग्रेस ने एक्स पर लिखा, ''जब सुप्रीम शाह के आदेश चलते हैं, तो क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का कोई मतलब नहीं रह जाता? महिला पत्रकारों को पीटा गया, घसीटा गया और हिरासत में लिया गया. वह भी नवरात्रि के पहले दिन."

"आप लोगों को शर्म आनी चाहिए.अगर यह आज़ादी की लड़ाई 2.0 नहीं है, तो फिर क्या है?''

वीडियो कैप्शन, 10 अक्तूबर को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ से विरोध प्रदर्शन के दौरान पूरे दिन क्या हुआ?

नेहा बोरा ने एक्स पर लिखा, ''श्याम मीरा सिंह और दूसरे पत्रकारों के साथ जो कुछ हुआ, वह शर्मनाक है! यह सिर्फ़ शर्मनाक ही नहीं, बल्कि अदालत की अवमानना भी है!"

कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने लिखा, ''पत्रकारों को हिरासत में लिया जा रहा है. यूट्यूबर्स को घसीटकर ले जाया जा रहा है.अभिव्यक्ति की आज़ादी?!!"

पत्रकार रवीश कुमार ने लिखा, '' श्याम मीरा सिंह जो बता रहे हैं उसके लिए भयावह शब्द भी कम पड़ जाए. जब पुलिस ही आपको भीड़ के हवाले कर दे तब क्या करेंगे? यह तो भीड़ पुलिस को चला रही है. फिर कुछ दिनों बाद पुलिस क्या करेगी.''

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया (पीसीआई), इंडियन वीमेंस प्रेस कॉर्प्स (आईडब्ल्यूपीसी), दिल्ली यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट (डीयूजे) , चेन्नई प्रेस क्लब और केरला यूनियन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट (केयूडब्ल्यूजे) की दिल्ली शाखा ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों को पुलिस ने टार्गेट किया.

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने लिखा है कि वह जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट को कवर करने वाले पत्रकारों के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई पर 'सदमे में और निराश' है.

इसने लिखा है कि एक महिला पत्रकारों ने कहा कि उनके साथ छेड़खानी हुई. उनके सीने को छुआ गया और उन्हें इसके लिए एफ़आईआर कराने के लिए शनिवार को पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में घंटों बैठना पड़ा.

कई पत्रकारों, पोर्टल के पत्रकारों और स्वतंत्र पत्रकारों ने कहा कि परिचय पत्र दिखाने के बावजूद उनके साथ हिंसा की गई और हिरासत में लिया गया.

शनिवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था
इमेज कैप्शन, शनिवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था

डिजिटल मीडिया संगठनों के फ़ोरम डिजिपब न्यूज़ इंडिया फ़ाउंडेशन ने भी शनिवार को पत्रकारों, डिजिटल क्रिएटर्स और नागरिकों के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की निंदा की.

एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया ने एक महिला पत्रकार के साथ हुए कथित यौन उत्पीड़न को लेकर एक बयान जारी करते हुए मांग की कि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए कड़े दिशा निर्देश जारी किए जाएं.

प्रेस की आजादी के पैरोकार संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ने 16 पत्रकारों की सूची जारी करते हुए लिखा है कि इन लोगों को बर्बरतापूर्वक हिरासत में लिया गया.

इससे पहले उसने अलग से चार पत्रकारों के नाम बताए थे जिन्हें प्रोटेस्ट कवर करने के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया था. ये पत्रकार हैं-

अनुष्का भारद्वाज - बिजनेस स्टैंडर्ड

हृतिक जोशी और राहुल चरस - नवभारत टाइम्स

शोएब दानियाल - स्क्रॉल

अंशु - न्यूज लॉन्ड्री

सौरभ शर्मा - रॉयटर्स

जागृति त्रिशा- बूम

शिवांग शुक्ला -एमओ

नीरज झा - मॉलिटिक्सइंडिया

किंजल- ऑल्ट न्यूज़ (इन्हें अहमदाबाद में हिरासत में लिया गया)

अश्लेषा - स्क्रॉल (इन्हें पुणे में हिरासत में लिया गया)

इसके अलावा जाने माने पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता को भी दिल्ली में जबरन हिरासत में लिया गया.

आरएएसएफ़ ने लिखा कि जनहित के कार्यक्रमों को कवर करना कोई अपराध नहीं है. यह उनका काम है. प्रेस के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई अस्वीकार्य है.

आरएएसएफ़ ने न्यूज़लॉन्ड्री के पत्रकार अश्विनी कुमार सिंह, आस्था सव्यसाची, अनमोल प्रीतम और स्क्रॉल के पत्रकार आयुष तिवारी को भी हिरासत में लिए जाने का ज़िक्र किया है.

दूसरी ओर, द‍िल्‍ली पुल‍िस ने अब तक इन आरोपों पर अलग से कोई बयान नहीं द‍िया है. द‍िल्‍ली पुल‍िस का बयान आते ही इस ख़बर को अपडेट कर द‍िया जाएगा.

वीडियो कैप्शन, महिला पत्रकारों ने पुलिस पर लगाया यौन हमले का आरोप

क़ानून क्या कहता है

पत्रकारों को काम करते वक़्त हिरासत में लेने के मामले पर भारत का क़ानून क्या कहता है.

इस मामले पर बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील अमित सिंह ने 'द हिंदू' से कहा, "पुलिस सिर्फ़ इसलिए गिरफ़्तारी की अपनी ताक़त का इस्तेमाल नहीं कर सकती कि किसी पत्रकार ने ऐसी ख़बर प्रकाशित की है जो असहज करने वाली हो, सरकार से सवाल पूछे हैं या उसकी आलोचना की है.''

''इस तरह की कार्रवाई का क़ानूनी आधार होना चाहिए और क़ानून में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए.''

उन्होंने कहा, ''संविधान और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 में मनमानी गिरफ़्तारी से बचाव के प्रावधान हैं. इनमें गिरफ़्तारी के आधार जानने, वकील से सलाह लेने और सामान्य मामलों में गिरफ़्तारी के 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने का अधिकार शामिल है."

अमित कुमार उन वकीलों में शामिल हैं जो हिरासत में लिए जा रहे लोगों को मुफ़्त क़ानूनी सहायता देने के लिए खुद आगे आए हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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