बिहार: खगड़िया में बिना बेहोश किए महिलाओं का नसबंदी ऑपरेशन, क्या है पूरा मामला

कुमारी प्रतिमा
इमेज कैप्शन, कुमारी प्रतिमा
    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

बिहार के खगड़िया ज़िले के अलौली प्रखंड का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र आजकल सवालों के घेरे में है.

12 नवंबर को यहां 23 महिलाओं की नसबंदी का ऑपरेशन हुआ था, जिसके बाद एक मरीज़ कुमारी प्रतिमा का वीडियो वायरल हो गया था.

प्रतिमा का कहना था कि बिना एनेस्थीसिया दिए उनका ऑपरेशन कर दिया गया.

स्थानीय मीडिया में कुमारी प्रतिमा के इस बयान के बाद से ही ज़िले का प्रशासनिक अमला मामले की जांच में लगा हुआ है.

खगड़िया के ज़िलाधिकारी आलोक रंजन घोष ने बताया, "इस मामले में सिविल सर्जन ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी है. जिसके बाद कई अन्य बिंदुओं पर भी उनसे रिपोर्ट मांगी गई है. हम लोगों ने गुणवत्ता की जांच को लेकर कमिटी की बैठक बुलाई है. इसमें स्त्री रोग विशेषज्ञ सहित कई चिकित्सक शामिल होते हैं. सिविल सर्जन की सप्लीमेंट्री रिपोर्ट और कमिटी की बैठक के बाद ही इस मामले में कार्रवाई की जाएगी."

इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी संज्ञान लेते हुए ज़िम्मेदार डॉक्टर्स और एनजीओ पर कार्रवाई की मांग की है.

बीबीसी हिंदी ने इस मामले में चार महिला मरीज़ों कुमारी प्रतिमा, पूजा देवी, कुमकुम देवी और पूजा कुमारी से बात की है. दो महिलाओं ने जहां ये कहा कि उन्हें असहनीय दर्द हुआ वहीं बाक़ी दो महिलाओं ने ऑपरेशन को संतोषजनक बताया.

स्वास्थ्य केंद्र

'मना करने पर भी डॉक्टर ने ऑपरेशन किया'

30 साल की कुमारी प्रतिमा अलौली के वार्ड संख्या 8 में ब्यूटी पार्लर चलाती हैं. अलौली जैसी छोटी सी जगह में वो इस पेशे के चलते जाना पहचाना नाम हैं. लेकिन आजकल उनके चर्चा में आने की वजह एक वीडियो है.

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तीन बच्चों की मां प्रतिमा ने भी 12 नवंबर को अलौली सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में ऑपरेशन कराया था.

बीबीसी हिंदी से बातचीत में वो बताती हैं, "दोपहर दो बजे हम रिक्शे से स्वास्थ्य केन्द्र गए थे. वहां जाने पर बाजू में सुई दी थी जिसका मुझ पर कोई असर नहीं हुआ. उसके बाद हम ऑपरेशन थिएटर में गए. वहां चार बेड थे जिसमें दो बेड पर महिलाएं दर्द से चिल्ला रही थीं. हमने नर्स से पूछा तो उसने कहा कि वो महिला नशा करती हैं, इसलिए उसको दर्द हो रहा है. तुम नशा नहीं करती हो, तो तुम्हें दर्द नहीं होगा."

वो आगे बताती हैं, "लेकिन जब डॉक्टर ऑपरेशन करने लगे तो मुझे असहनीय दर्द उठा. मैंने डॉक्टर साहब से ऑपरेशन बंद करने के लिए कहा और दर्द के मारे चीखने लग. इस पर डॉक्टर ने चार-पांच आदमी को बुलाया और मुझे पकड़कर ऑपरेशन कर दिया. और बाद में कमर पर सुई लगा दी." प्रतिमा के तीनों बच्चे नॉर्मल डिलीवरी से हुए है और एपेन्डिक्स का ऑपरेशन हो चुका है. वो कहती हैं, "मुझे मालूम है दर्द क्या होता है. मुझे दर्द वाली सुई ऑपरेशन से पहले नहीं दी गई थी."

खेती किसानी करने वाले प्रतिमा के पति राजीव कहते हैं, "हम तो सरकारी अस्पताल सोचकर गए थे. हमें नहीं मालूम था एनजीओ वाला ऑपरेशन करता है. ये तो मरते-मरते बची है और इसका इलाज अब प्राइवेट चलेगा."

कुमारी प्रतिमा अपने पति राजीव के साथ
इमेज कैप्शन, कुमारी प्रतिमा अपने पति राजीव के साथ

पति ने ऑपरेशन कराने को बोला, दर्द हम झेल रहे

पूजा देवी के पति कृष्णानंद चौधरी हरियाणा में मज़दूरी करते हैं. पूजा को दो महीने पहले एक लड़की नार्मल डिलीवरी से हुई है.

लड़की की पैदाइश के बाद कृष्णानंद ने पूजा से ऑपरेशन करा लेने के लिए कहा. अलौली के जोगिया की रहने वाली पूजा से इलाके की आशा ने भी संपर्क किया.

वो बताती हैं, "हमको सबने बोला कोई दिक्कत नहीं होगी. तो हम ऑपरेशन कराने टेम्पो से चले गए. वहां पहुंचे तो हमको बाजू पर सुई दी जिसके बाद हमको नींद आने लगी. बाद में ऑपरेशन थियेटर में जब डॉक्टर ने चीरा तो बहुत ज्यादा दर्द हुआ. हम मम्मी-मम्मी चिल्लाते रहे लेकिन किसी ने नहीं सुनी. पति ने तो कह दिया ऑपरेशन करा लो, लेकिन दर्द हम अकेले झेल रहे."

पूजा देवी
इमेज कैप्शन, पूजा देवी

कुछ लोगों को नहीं हुई कोई दिक्कत

अलौली के बहादुरपुर की कुमकुम देवी और पूजा कुमारी को अपने ऑपरेशन से कोई शिकायत नहीं.

कुमकम बताती हैं, "हम ई रिक्शा से अस्पताल गए और वापस घर भी ई रिक्शा से आए. अस्पताल जाने पर बाजू में और फिर पेट पर सुई दी गई. नीचे का पूरा हिस्सा सुन्न हो गया था. डॉक्टर साहब सबकी आवाज सुनाई दे रही थी. लेकिन हमको कोई दिक्कत नहीं हुई."

वहीं पूजा ने भी बीबीसी हिंदी से फोन पर कहा, "हमको कोई दर्द नहीं हुआ. हम ठीक ठाक हैं."

इलाके की आशा कार्यकर्ता पुतुल कुमारी ने बताया, "ऑपरेशन सब ठीक से हुआ था. हमारे रहते हमने कोई गड़बड़ होते तो नहीं देखी."

कुमकुम देवी
इमेज कैप्शन, कुमकुम देवी

बिना बेहोशी में ऑपरेशन से दहशत

वहीं इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद नसबंदी ऑपरेशन को लेकर स्थानीय लोगों में शंका की स्थिति बन गई है.

अलौली के रामपुर पंचायत की उषा देवी अपनी दोनों बहुओं नूतन और प्रियंका देवी की नसबंदी कराना चाहती थीं, लेकिन अब वो कहती हैं, "बिना मताएं, ऑपरेशन कौन कराएगा. जब सरकार ठीक से ऑपरेशन करेगी, तभी कराया जाएगा."

बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति के एक पत्र के मुताबिक, "जहां पर भी चिकित्सा के सीमित संसाधन मौजूद हैं, वहां 'लोकल एनेस्थीसिया', 'जनरल एनेस्थीसिया' से बेहतर है."

लोकल एनेस्थीसिया में शरीर के सिर्फ़ उसी हिस्से को सुन्न किया जाता है जहां पर ऑपरेट करना होता है.

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की साल 2014 में महिला बंध्याकरण मैन्युएल में भी इस बात का ज़िक्र है.

सिविल सर्जन अमरनाथ झा भी बताते हैं, "हमारे यहां एनेस्थीसिया देने वाले डॉक्टरों की भी भारी कमी है. इसके चलते अंदरूनी इलाकों में लोकल एनेस्थीसिया देने पर ही जोर है. जेनरल एनेस्थीसिया के लिए ट्रेन्ड एमडी एनेस्थीसियोलॉजिस्ट चाहिए."

उषा देवी
इमेज कैप्शन, उषा देवी

'हमने नियमों का पालन किया'

महिला नसबंदी के लिए अब किसी एक ज़िले में वहां की आबादी, प्रजनन दर और नसबंदी के लिए योग्य दंपत्ति की संख्या के आधार पर ही लक्ष्य तय होता है.

नसबंदी का ऑपरेशन करने की ज़िम्मेदारी अधिकृत एनजीओ की होती है. प्रत्येक ऑपरेशन पर एनजीओ को 2,150 रुपये मिलते है. जबकि नसबंदी कराने वाली महिला को 2,000 रुपये और अगर ये पोस्टपार्टम है तो महिला मरीज़ को 3,000 रुपये मिलते हैं.

खगड़िया में एफआरएसएच और जीडीआई (ग्लोबल डेलवेपमेंट इनीशिएटिव) नामक दो एनजीओ को नसबंदी कार्यक्रम से जुड़े ऑपरेशन के लिए अधिकृत किया गया है. अलौली सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के लिए जीडीआई अधिकृत है. जीडीआई पहले भी अलौली में नसबंदी के 118 ऑपरेशन कर चुकी है.

संस्था के स्टेट प्रोग्राम मैनेजर चंद्रभूषण ने बीबीसी हिंदी को बताया, "इस ऑपरेशन से 45 मिनट पहले मरीज को उसकी बाजू पर एनेस्थीसिया देते हैं. ऑपरेशन थियेटर में ऑपरेट होने वाले हिस्से पर लोकल एनेस्थीसिया दिया जाता है. अलौली में भी जो ऑपरेशन हुए उसमें दोनों एनेस्थीसिया दिए गए हैं."

जिलाधिकारी अलोक रंजन घोष
इमेज कैप्शन, जिलाधिकारी अलोक रंजन घोष

6,328 महिलाओं, 10 पुरूषों ने ऑपरेशन कराया

नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे -5 की रिपोर्ट के मुताबिक 15 से 49 साल की महिलाओं के बीच बिहार में नसबंदी 34.8 प्रतिशत है जबकि एनएफएचएस -4 में ये 20.8 प्रतिशत थी.

वहीं खगड़िया ज़िले की बात करें तो एनएफएचएस-5 में ये 27.4 प्रतिशत थी. अप्रैल 2021 से मार्च 2022 तक खगड़िया में 6,328 महिलाओं ने नसबंदी का ऑपरेशन कराया था, वहीं पुरुषों की बात करें तो ज़िले में इनकी संख्या सिर्फ़ 10 थी.

वैसे ये पहली बार नहीं है जब बिहार में महिला नसबंदी चर्चा में हो. साल 2012 में राज्य के अररिया ज़िले में सिर्फ़ दो घंटे में 53 महिलाओं की नसबंदी का आपरेशन कर दिया गया था.

साल 2012 में ही गर्भाशय घोटाला भी सामने आया था जिसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ उठाने के लिए आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं का जबरन गर्भाशय निकालने का मामला सामने आया था.

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