तृणमूल कांग्रेस के अंदर क्या बग़ावत का है डर, बीजेपी क्या कर सकती है?

ममता बनर्जी

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, ममता बनर्जी ने राज्य की क़ानून-व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा है
प्रकाशित
पढ़ने का समय: 7 मिनट

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में टीएमसी की हार के बाद रोज़ाना कोई न कोई ऐसा घटनाक्रम सामने आ रहा है जिसने पार्टी को सुर्ख़ियों में बनाए रखा है.

बीते शनिवार को जहां सोनारपुर में पार्टी महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर स्थानीय लोगों ने हमला किया और उन पर अंडे फेंके.

वहीं रविवार को टीएमसी के एक और सांसद कल्याण बनर्जी ने ख़ुद पर हमला किए जाने का दावा किया.

सोमवार को एक और मामला सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अपने दो विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निकाल दिया.

इसके बाद पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर राज्य की क़ानून-व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा.

छोड़िए YouTube पोस्ट
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त

टीएमसी विधायकों को क्यों निकाला गया?

टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने इन विधायकों के निष्कासन की जानकारी दी है.

उन्होंने बताया कि इन दोनों विधायकों को ईमेल और व्हाट्सएप के ज़रिए इस फ़ैसले की जानकारी दे दी गई है. साथ ही विधानसभा अध्यक्ष को भी इसकी सूचना दे दी गई है.

विधानसभा के जाली हस्ताक्षर कांड के सिलसिले में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को सचिवालय में पत्रकारों को संबोधित किया.

इस दौरान उन्होंने बताया कि तृणमूल कांग्रेस के इन दोनों विधायकों ने ही विधानसभा अध्यक्ष से इस घटना के बारे में लिखित शिकायत की थी.

उसके बाद ही विधानसभा सचिवालय ने हेयर स्ट्रीट थाने में शिकायत दर्ज की.

मुख्यमंत्री शुभेंदु ने बताया कि यह शिकायत मिलने के बाद उन्होंने सीआईडी को इसकी जांच के आदेश दिए थे.

दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में शोभनदेव चट्टोपाध्याय के चयन के समर्थन वाले टीएमसी विधायकों के पत्र में कथित तौर पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षर फ़र्ज़ी होने का आरोप है.

ममता बनर्जी

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, ममता बनर्जी की टीएमसी को हालिया चुनाव में 80 सीटें मिली हैं
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
दिनभर: पूरा दिन,पूरी ख़बर (Dinbhar)

वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.

एपिसोड

समाप्त

कई विधायकों के हस्ताक्षर संदिग्ध होने और उपस्थित न होने के बावजूद पत्र में उनके नाम होने के कारण विधानसभा सचिवालय ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी.

इस मामले की जांच अब सीआईडी कर रही है. आरोप है कि कुछ विधायकों के फ़र्ज़ी हस्ताक्षर किए गए. वो लोग उस दिन विधानसभा में मौजूद भी नहीं थे.

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रेस कॉन्फ़्रेंस ख़त्म होने के 15 मिनट के भीतर ही तृणमूल कांग्रेस ने हावड़ा में उलूबेड़िया पूर्व के विधायक ऋतब्रत बनर्जी और कोलकाता में एंटाली के विधायक संदीपन साहा को पार्टी से निकालने का फैसला किया.

पार्टी से निकाले जाने के बाद संदीपन ने पत्रकारों से कहा, "पार्टी अनैतिक काम करने वालों का समर्थन करती है. हमें तो पता ही नहीं था कि उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर को प्रस्ताव पर हस्ताक्षर का रूप दे दिया जाएगा."

ऋतब्रत बनर्जी को सीपीएम ने वर्ष 2014 में राज्यसभा में भेजा था. उनकी सदस्यता की मियाद 2020 तक थी. लेकिन 2017 में उनको पार्टी से निकाल दिया गया था.

तीन साल तक वो पार्टीविहीन सांसद रहे. बाद में तृणमूल ने उनको पहले उपचुनाव में डेढ़ साल के लिए राज्यसभा भेजा था और फिर बीते महीने हुए चुनाव में उनको उम्मीदवार बनाया था.

पार्टी से निकाले गए टीएमसी विधायक ऋतब्रत ( एकदम दाएं) और उनके बाद विधायक संदीपन साहा

इमेज स्रोत, Sanjay Das

इमेज कैप्शन, पार्टी से निकाले गए टीएमसी विधायक ऋतब्रत ( एकदम दाएं) और उनके बाद विधायक संदीपन साहा

पश्चिम बंगाल में आख़िर क्यों लगातार हंगामा चल रहा है?

शुभज्योति घोष कहते हैं कि पश्चिम बंगाल में नई सरकार को बने तीन हफ़्ते से ज़्यादा समय हो चुका है और जो भी घटनाक्रम लगातार सामने आ रहे हैं वो काफ़ी दिलचस्प हैं.

वो कहते हैं, "तृणमूल कांग्रेस को कांग्रेस पार्टी के बाद सबसे ताक़तवर विपक्ष माना जाता था, अब ऐसा लगता है कि उनका घर टूट रहा है. वहीं बीजेपी की ओर हम देखें तो रोज़ाना नए फ़ैसले लिए जा रहे हैं, जिसको लेकर विवाद भी हो रहा है. हालांकि सबसे चौंकाने वाली बात तृणमूल कांग्रेस को लेकर ही है कि उसमें क्यों दरार पड़ती जा रही है."

हाल में कई कार्यकर्ताओं के टीएमसी को छोड़ने का मामला सामने आया है. इसकी वजहें क्या नज़र आती हैं? इस सवाल पर शुभज्योति घोष कहते हैं कि तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी पर आधारित पार्टी है और वो किसी राजनीतिक वाद में कभी भी नहीं रही है.

वीडियो कैप्शन, मुस्लिम बहुल इलाक़ों के लोग क्या कह रहे हैं ?

वो कहते हैं, "ममता बनर्जी की कामयाबी से ही पार्टी कार्यकर्ता इतनी दूर तक आ पाए. जब ममता बनर्जी करारी हार के बाद अपनी भवानीपुर सीट ही खो बैठीं तो पार्टी की एकजुटता में टूट साफ़ दिखने लगी. आज की तारीख़ में भी ममता बनर्जी के पास लोकसभा और राज्यसभा में 42 सांसद हैं और 80 विधायक हैं, 41 फ़ीसदी वोट हैं. फिर भी जो प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है वो एक तरह से ममता बनर्जी को ही निशाना बना रही है कि आपने अभिषेक बनर्जी के ख़िलाफ़ कुछ नहीं किया और परिवार को लेकर आंखें मूंदें रखीं."

"इतिहास में पार्टियों के बुरे दिन आते रहे हैं लेकिन इस तरह की टूट देखने को नहीं मिली है. साथ ही पश्चिम बंगाल की राजनीतिक संस्कृति ऐसी बन चुकी है कि जो भी पार्टी सत्ता में आती है उसके पास पुलिस-प्रशासन के अलावा दैनिक सामाजिक जीवन भी नियंत्रण में आ जाता है."

"टीएमसी के कार्यकाल में देखने को मिला है जब विपक्षी विधायक टीएमसी में आ जाते थे. अमित शाह का जैसे कांग्रेस मुक्त भारत का स्वप्न था वैसे ही ममता बनर्जी ने विरोधी मुक्त बंगाल बनाने की कोशिश की. अब ऐसा लगता है कि उसी की क़ीमत उन्हें चुकानी पड़ रही है क्योंकि टीएमसी के टिकट पर जो चुनाव जीतकर 80 विधायक आए हैं, उन्हें लग रहा है कि वो राजनीति में अप्रासंगिक हो जाएंगे."

बीजेपी के 13 विधायकों ने कैबिनेट मंत्री के पद की शपथ ली है

इमेज स्रोत, Sanjay Das

इमेज कैप्शन, बीजेपी के 13 विधायकों ने कैबिनेट मंत्री के पद की शपथ ली है

टीएमसी क्या टूट जाएगी?

क्या टीएमसी में टूट होगी या वर्तमान हालात सिर्फ़ नाराज़गी भर है? इस सवाल पर शुभज्योति कहते हैं, "बीजेपी नेताओं से जो मेरी बात हुई है तो उनका कहना है कि वो टीएमसी नेताओं को तुरंत पार्टी में नहीं लेंगे. लेकिन एक इशारा दिया है कि अगर दो तिहाई से ज़्यादा विधायक ममता से अलग होकर पार्टी बना लेते हैं तो उसको अपना समर्थन देंगे."

टीएमसी नेताओं अभिषेक और कल्याण बनर्जी पर कथित हमलों के बाद से बीजेपी की ओर से कोई कड़ा बयान नहीं आया. इस पर शुभज्योति घोष कहते हैं कि बीजेपी ने कोई निंदा नहीं की क्योंकि उसे लगता है कि जनता में नेताओं को लेकर ग़ुस्सा है, बीजेपी इसी का फ़ायदा ले रही है.

वीडियो कैप्शन, बंगाल में ममता की हार पर क्या बोले बंगाल के लोग?

सोमवार को ही पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ और पार्टी के 35 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली.

इनमें से 13 विधायकों ने कैबिनेट मंत्री के पद की शपथ ली है, बाक़ी राज्य मंत्री बने हैं. इसके साथ ही राज्य में मंत्रियों की संख्या 41 हो गई है.

शुभज्योति घोष कहते हैं कि नौ मई को जब शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी तब पांच ही नेताओं को मंत्री बनाया गया था, उसमें भी हर क्षेत्र और समुदाय से लोगों को लेने की कोशिश की गई थी, नए 35 चेहरों के मामले में भी यही कोशिश की गई है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)