पश्चिम बंगाल: 400 कैंटीनों में पाँच रुपये में मछली-भात, शुभेंदु अधिकारी ने और क्या कहा?

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पश्चिम बंगाल में अब पांच रुपये में मछली-चावल मिलेगा. मंगलवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसके अलावा भी कई फ़ैसलों का एलान किया.
अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार 27 मई से अन्नपूर्णा योजना के लिए फ़ॉर्म जारी करना शुरू करेगी.
इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने तीन हज़ार रुपये दिए जाएंगे.
अधिकारी ने यह भी कहा कि स्कूलों, कॉलेजों और धार्मिक स्थलों के एक किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानों को अनुमति नहीं दी जाएगी.
हफ़्ते में दो बार 5 रुपये में मछली-चावल
पश्चिम बंगाल के नदिया ज़िले के कल्याणी में एक प्रशासनिक बैठक के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पत्रकारों से बात कर रहे थे.
उन्होंने कहा, "अन्नपूर्णा योजना के फॉर्म कल से राज्य सचिवालय से जारी किए जाएंगे. सभी भारतीय योजना का लाभ प्राप्त करने के पात्र हैं."
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने लगभग 400 विशेष कैंटीनों में सप्ताह में दो बार पांच रुपये की रियायती दर पर मछली-चावल उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है.
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार आयुष विभाग को स्वास्थ्य विभाग से अलग करके एक अलग डिपार्टमेंट बनाएगी.
चुनाव में भी उछला था मछली का मुद्दा

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बीबीसी संवाददाता सौतिक बिस्वास के मुताबिक बंगाल में मछली सिर्फ़ भोजन नहीं है, यह वहां के खानपान की धड़कन है, जो यादों, परंपराओं और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बसी हुई है. यह पहचान और अपनेपन, दोनों का प्रतीक है.
हाल ही हुए पश्चिम बंगाल चुनावों में भी यही भावनात्मक जुड़ाव राजनीतिक मंच का हिस्सा बन गया था. उम्मीदवारों ने मछली को राजनीतिक प्रतीक की तरह इस्तेमाल किया.
बीजेपी को अक्सर शाकाहार से जोड़ा जाता रहा है. कुछ बीजेपी शासित कुछ राज्यों में समय-समय पर मांस की बिक्री पर लगी पाबंदियों और गौ-रक्षा से जुड़े अभियानों ने इस धारणा को और मज़बूत किया है.
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में मछली थाली से निकलकर चुनाव प्रचार के केंद्र में आ गई थी. इसे सांस्कृतिक पहचान के सबूत और बाहरी दख़ल के आरोपों के जवाब के रूप में पेश किया गया था.
तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी ने चेतावनी दी थी कि मुख्य विपक्षी बीजेपी "बंगाल के जीवन जीने के तरीके" के लिए ख़तरा है. उन्होंने मछली और चावल को बंगाल की ऐसी पहचान बताया था, जिस पर कोई समझौता नहीं हो सकता.
उन्होंने एक चुनावी सभा में कहा था, "बीजेपी आपको मछली खाने नहीं देगी. न ही वे आपको मांस या अंडे खाने देंगे."
लेकिन बीजेपी ने भी उतनी ही तीखी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी ने इन आरोपों को ख़ारिज करने के साथ-साथ पलटवार किया था.
बंगाल में प्रचार कर रहीं बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने इस दावे को "झूठ" बताया और कहा कि "बंगाल, मछली और चावल उसकी संस्कृति का हिस्सा हैं, जो कभी ख़त्म नहीं होंगे."
चुनाव प्रचार के दौरान मोदी ने भी मछली को राजनीतिक मुद्दा बनाया और इसे सरकार की नाकामी के प्रतीक के रूप में पेश किया.
मोदी ने कहा, "15 साल सत्ता में रहने के बाद भी तृणमूल कांग्रेस आपको मछली जैसी बुनियादी चीज़ तक नहीं दे पाई है. यहां तक कि मछली भी राज्य के बाहर से मंगानी पड़ रही है."
ममता बनर्जी ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा कि बंगाल में मछली की 80% ज़रूरत स्थानीय स्तर पर पूरी हो जाती है.
उन्होंने एक चुनावी सभा में कहा, "आप बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे अपने शासित राज्यों में मछली खाने की अनुमति नहीं देते और दिल्ली में मछली की दुकानों पर हमले करवाते हैं. क्या आपको शर्म नहीं आती?"
चुनाव से कुछ दिन पहले बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं ने मछली खाने की पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर की थीं.
अवैध आप्रवासियों पर क्या कहा?

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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने अवैध आप्रवासियों पर सख़्ती दिखाते हुए कहा, "हर ज़िले में एक होल्डिंग सेंटर होना चाहिए. उसके बाद लोगों को डर के कारण सीमा पार कर जाना चाहिए. यह मौजूदा विदेशी अधिनियम के तहत है; यह कोई नया कानून नहीं है. इन लोगों को यहां से जाना चाहिए."
"चूंकि ये बांग्लादेशी नागरिक हैं, इसलिए इन्हें वापस लेना बांग्लादेश की जिम्मेदारी है. जब हमने यहां यह मुद्दा उठाया, तो मैंने सोशल मीडिया और यूट्यूब पर देखा कि उनके प्रवक्ता ने कहा था कि वे बांग्लादेशी नागरिकों को वापस ले लेंगे. इसलिए अगर ये लोग बांग्लादेशी हैं, तो इन्हें वापस ले जाया जाना चाहिए."
उन्होंने कहा, "हालांकि, हमने पुलिस को यह भी कहा है कि इन्हें जेल में भेजने की ज़रूरत नहीं है. ये देश के पैसे से खाना खाएंगे, कपड़े और दवाइयां भी लेंगे. क्या ये हमारे दामाद हैं? इन्हें जल्दी से यहां से जाना चाहिए, नहीं तो सरकार जो ज़रूरी होगा, वह करेगी."
केंद्र सरकार के साथ मिलकर मनाएंगे योग दिवस

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समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कार्यक्रम की भी घोषणा की.
उन्होंने कहा, "भारत सरकार ने 5 जून से 21 जून तक एक राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है. पश्चिम बंगाल सरकार भी इसमें भाग लेगी."
"5 जून को पूरे राज्य के हर ब्लॉक और नगरपालिका में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसके तहत माताओं के नाम पर पेड़ लगाए जाएंगे. सभी विधायकों को वन और पर्यावरण विभाग की ओर से फलदार पौधे दिए जाएंगे."
मुख्यमंत्री ने कहा, "भारत सरकार ने 12 जून से 20 जून के बीच तीन दिन जनकल्याण शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया है. हमने इसके लिए 15, 16 और 17 जून की तारीख चुनी है. प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि ये शिविर स्कूलों में न लगाए जाएं, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो."
उन्होंने बताया कि विधायक और सांसद इन कार्यक्रमों के मुख्य अतिथि होंगे और इनके उद्घाटन करेंगे. इनमें जनता को केंद्र और राज्य सरकार की मौजूदा और आने वाली योजनाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी और जागरूक किया जाएगा.
इसके अलावा 21 जून (अंतरराष्ट्रीय योग दिवस) पर, बंगाल सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाला आयुष विभाग खेल विभाग के साथ मिलकर कार्यक्रम आयोजित करेगा.
मुख्यमंत्री ने कहा, "हम पहले इस पहल से अलग थे, लेकिन अब हमने खुद को पूरी तरह इसमें शामिल कर लिया है. इस अवसर को उत्सव के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाएगा. जहां-जहां आयुष विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार सार्वजनिक योग सत्र होंगे, वहां मुख्य कार्यक्रम से पहले दो दिन का अभ्यास भी किया जाएगा."
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