होर्मुज़ के बाद अब मलक्का स्ट्रेट को लेकर क्यों हो रही है चिंता

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- Author, लुइस बारूचो
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
दुनिया के सबसे अहम जलमार्गों में से एक हॉर्मुज़ स्ट्रेट की जारी नाकाबंदी के बीच, वैश्विक व्यापार के लिए एक और अहम स्ट्रेट पर अब दुनिया का ध्यान जा रहा है.
और यह दक्षिण पूर्व एशिया में स्थित जलमार्ग है मलक्का स्ट्रेट.
दरअसल, बीते सोमवार को अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर के बाद ये बात सामने आई कि अमेरिका ने इंडोनेशियाई क्षेत्र के ऊपर सैन्य उड़ानों के लिए व्यापक अनुमति का प्रस्ताव रखा है.
इस प्रस्ताव को लेकर इंडोनेशियाई अधिकारियों ने पुष्टि की है और इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस पर फ़ैसला अभी लंबित है.
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का कदम वैश्विक भू-राजनीतिक पर प्रभाव डाल सकता है.
लेकिन मलक्का स्ट्रेट क्या है और यह क्यों अहम है?
वैश्विक महत्व

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मलक्का स्ट्रेट में घटनाओं पर अध्ययन करने वालीं अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ़ इलिनॉय उर्बाना-शैंपेन में पीएचडी शोधार्थी और क्षेत्रीय विशेषज्ञ अज़ीफ़ा अस्ट्रिना कहती हैं, "मलक्का स्ट्रेट अहम है क्योंकि यह हिंद महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ने वाला सबसे छोटा और सबसे प्रभावी समुद्री मार्ग है जो मध्य पूर्व, यूरोप और पूर्वी एशिया के बीच व्यापार के लिए इसे अनिवार्य बनाता है."
उनके अनुसार, "यह सीधे दक्षिण चीन सागर से जुड़ता है, जिसके रास्ते वैश्विक व्यापार का लगभग एक तिहाई हिस्सा गुजरता है."
इसका सबसे संकरा हिस्सा, केवल लगभग 2.8 किलोमीटर चौड़ा है जो सिंगापुर के पास फिलिप्स चैनल के क़रीब है.
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (ईआईए) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की पहली छमाही में हर दिन 23.2 मिलियन बैरल तेल मलक्का से गुजरा, जो वैश्विक समुद्री तेल परिवहन का लगभग 29% है. इसी दरम्यान में इस जलमार्ग से रोज़ाना लगभग 260 मिलियन घन मीटर तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) भी गुजरी.
ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ़ लीड्स में माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स के लेक्चरर गोकचे बालची के अनुसार, यह जलमार्ग "इलेक्ट्रॉनिक्स, उपभोक्ता सामान, औद्योगिक उत्पाद, मशीनरी और कारों" के लिए भी एक अहम रास्ता है.
उनके मुताबिक़, "दुनिया के कार व्यापार का लगभग 25% इसी रास्ते से गुजरता है. अनाज और सोयाबीन जैसे सूखे थोक माल भी इस स्ट्रेट से गुजरते हैं."
बालची ने आगे कहा, "जब आप भूगोल, ऊर्जा निर्भरता, सामान की मात्रा और विविधता को साथ मिलाकर देखते हैं, तो मलक्का स्ट्रेट, होर्मुज़ स्ट्रेट से अलग है. होर्मुज़ भी वैश्विक व्यापार के लिए अहम है, लेकिन मलक्का जितना बड़ा ट्रांस-शिपमेंट केंद्र नहीं है. इसकी भूमिका ऊर्जा से आगे बढ़कर कई तरह के सामानों के परिवहन तक फैली है."
अस्ट्रिना कहती हैं, "यह कहना सही होगा कि मलक्का वैश्विक अर्थव्यवस्था की प्रमुख धमनियों में से एक है."
समुद्री डकैती एक लगातार बनी रहने वाली चिंता है. सिंगापुर स्थित रीकैप इन्फॉर्मेशन शेयरिंग सेंटर के अनुसार, 2025 में मलक्का और सिंगापुर स्ट्रेट में समुद्री लूट की 108 घटनाएं दर्ज की गईं, जो 2007 के बाद सबसे अधिक हैं.
यह स्ट्रेट प्राकृतिक ख़तरों से भी संवेदनशील है, जिनमें सुनामी और ज्वालामुखी गतिविधियां शामिल हैं. उदाहरण के तौर पर दिसंबर 2004 की सुनामी ने इसके दक्षिणी प्रवेश के पास तटीय ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया था.
मलक्का स्ट्रेट इतना अहम क्यों?

विशेषज्ञों का कहना है कि मलक्का सिर्फ़ अपनी आर्थिक भूमिका के लिए ही अहम नहीं है बल्कि इसकी भू-राजनीतिक संवेदनशीलता भी बहुत अधिक है.
बालची कहते हैं, "इस इलाक़े के समुद्री क्षेत्र में दबदबे को लेकर चीन, अमेरिका या भारत के बीच किसी भी तरह का तनाव बढ़ना, इस स्ट्रेट से गुजरने वाले मार्ग को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है."
अस्ट्रिना का कहना है कि इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य पहुंच बढ़ने की संभावना के भी दीर्घकालिक असर हो सकते हैं, "मैं इसे संरचनात्मक रूप से अस्थिर करने वाला मानूंगी, भले ही यह तुरंत व्यापार को प्रभावित न करे."
उनका शोध बताता है कि मलक्का स्ट्रेट की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था, बड़ी शक्तियों के बीच होड़ को संभालने के लिए नहीं बनाई गई है.
वो कहती हैं, "यह गैर-पारंपरिक ख़तरों जैसे समुद्री लूट, तस्करी और समुद्री अपराध से निपटने के लिए बनाई गई है. इसलिए जब अमेरिका जैसी बड़ी शक्ति अपनी गतिविधियां बढ़ाती है, तो यह सुरक्षा व्यवस्था में एक ऐसा आयाम जोड़ देती है जिसे संभालने के लिए यह सिस्टम तैयार नहीं है."
वह कहती हैं कि हालांकि हाल फ़िलहाल इसमें बाधा आने की संभावना कम है, "मुझे अभी भी नहीं लगता कि वाणिज्यिक जहाजरानी प्रभावित होगी. व्यापार को जारी रखने के प्रोत्साहन बहुत मजबूत हैं."
उनके अनुसार, बड़ा जोखिम आगे है, "चिंता दीर्घकालिक तनाव बढ़ने को लेकर है. अगर चीन इसे एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते के पास अमेरिकी निगरानी या रणनीतिक स्थिति मजबूत करने के रूप में देखता है, तो वह प्रतिक्रिया दे सकता है, ज़रूरी नहीं कि व्यापार को बाधित करे बल्कि अपनी मौजूदगी या प्रभाव बढ़ाकर."
उनके अनुसार, "यहीं जोखिम है. आप एक सहयोगी, क़ानून लागू करने वाली केंद्रित सुरक्षा व्यवस्था से सैन्य रूप से अधिक होड़ वाले माहौल की ओर धीरे-धीरे बदलाव देख सकते हैं."
वह चेतावनी देती हैं कि सीधे टकराव के बिना भी इसका असर पड़ सकता है.
उनके अनुसार, "वैश्विक व्यापार के लिए असर बहुत सीधे नहीं दिखेगा, लेकिन बीमा प्रीमियम बढ़ सकते हैं, जोखिम की भावना बढ़ सकती है और उस रास्ते पर अस्थिरता बढ़ सकती है जिस पर वैश्विक अर्थव्यवस्था बहुत अधिक निर्भर है."
उन्होंने इंडोनेशिया की भूमिका को सीमित नज़रिए से देखने को लेकर भी आगाह करती हैं, "इसे इस तरह नहीं देखना चाहिए कि इंडोनेशिया किसी एक पक्ष के साथ खड़ा हो रहा है. इंडोनेशिया संतुलन की रणनीति अपनाता दिख रहा है, वह अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ा रहा है, साथ ही चीन के साथ मजबूत आर्थिक संबंध बनाए रखा है और रूस जैसे अन्य साझेदारों से भी जुड़ा है."
"बड़ी तस्वीर गठबंधन बनाने की नहीं है, बल्कि यह है कि बड़ी शक्तियों की होड़ अब उस क्षेत्र में एंट्री ले रही है, जिसे ऐतिहासिक रूप से वैश्विक व्यापार के लिए साझे रूप से संचालित किया जाता रहा है."
'मलक्का डायलेमा'

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साल 2003 में, तत्कालीन चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ ने 'मलक्का डायलेमा' यानी 'मलक्का दुविधा' शब्द गढ़ा था, जोकि चीन की इस जलमार्ग पर भारी निर्भरता को दिखाता है.
ईआईए और सीएसआईएस चाइनापावर प्रोजेक्ट के आंकड़ों के अनुसार, चीन के लगभग तीन-चौथाई तेल आयात और उसके समुद्री व्यापार का करीब 60% मूल्य का सामान इसी मलक्का स्ट्रेट और उससे जुड़े दक्षिण चीन सागर से गुजरता है.
बालची कहते हैं, "लेकिन सिर्फ़ चीन ही नहीं. जापान और दक्षिण कोरिया भी ऊर्जा के लिए इस स्ट्रेट पर बहुत अधिक निर्भर हैं, जहां उनके लगभग 90% तेल आयात इसी रास्ते से आते हैं."
वह ये भी कहते हैं कि यह जलमार्ग सिंगापुर के लिए भी बेहद अहम है, जहां दुनिया का दूसरा सबसे व्यस्त कंटेनर बंदरगाह है और यह जहाज़ों के ईंधन भरने का बड़ा केंद्र भी है.
अस्ट्रिना कहती हैं कि चीन के लिए निकट भविष्य में इस स्ट्रेट पर अपनी निर्भरता कम करना मुश्किल है.
उनके अनुसार, "मुझे नहीं लगता कि निकट भविष्य में चीन के पास इस निर्भरता को किसी तरीक़े से कम करने का कोई वास्तविक विकल्प है. चाहे पाइपलाइन हों या अन्य गलियारे, वैकल्पिक मार्ग कुछ हद तक मददगार हो सकते हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर मलक्का की जगह नहीं ले सकते."
बालची इस बात से सहमत हैं, "दो सबसे व्यवहारिक विकल्प, सुंडा स्ट्रेट और लोम्बोक स्ट्रेट, भी इंडोनेशिया के जलक्षेत्र में ही हैं."
पापुआ न्यू गिनी के पास टोरेस स्ट्रेट "एक उथला और संवेदनशील जलमार्ग है, जहां कोरल लीफ़ हैं और बड़े कमर्शियल जहाज़ यहां से नहीं गुजर सकते."
बालची कहते हैं कि दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया के रास्ते घूमकर जाना 'बहुत अधिक लागत और समय' लेगा.
अस्ट्रिना कहती हैं कि इन सीमाओं को देखते हुए चीन का ध्यान अपनी कमज़ोरी को ख़त्म करने के बजाय उसे मैनेज करने पर है.
उनके अनुसार, "यह दुविधा निर्भरता कम करने के बारे में नहीं है. यह इस बात पर है कि चीन इस निर्भरता को कैसे मैनेज करता है."
आस्ट्रिना का कहना है, "इसी वजह से हम देखते हैं कि चीन सिर्फ़ विविधता लाने पर ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में, ख़ासकर दक्षिण चीन सागर और अहम समुद्री मार्गों पर अपनी मौजूदगी और प्रभाव बढ़ाने पर भी ध्यान दे रहा है."
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