'पाकिस्तान दुनिया के मसले सुलझा रहा है, लेकिन घर के दो बड़े मुद्दे अनसुलझे': मोहम्मद हनीफ़ का ब्लॉग

इमरान ख़ान को लंबी उम्र मिले, लेकिन उन्हें जेल में डालने वाले भी बहुत ताकतवर हैं.

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    • Author, मोहम्मद हनीफ़
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार और लेखक
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 4 मिनट

ऑस्ट्रेलिया के एक नहीं, दो नहीं, बल्कि सात क्रिकेट कप्तानों ने इमरान खान के साथ न्याय करने की अपील की है.

उनका कहना है कि अगर इमरान को जेल में ही रखना है तो उनके साथ इंसानों जैसा बर्ताव करें. उनका इलाज करवाएं, उनके परिवार को उनसे मिलने दें.

इससे पहले, दुनिया भर के लगभग 21 क्रिकेट कप्तानों ने भी ऐसी ही चिंताएं ज़ाहिर करते हुए अपील की थी. इमरान ख़ान के अपने बेटे भी लगातार यह आशंका जता रहें हैं कि उनके पिता को ये जेल में ही मार डालेंगे.

इमरान खान को लंबी उम्र मिले, लेकिन उन्हें जेल में डालने वाले भी बहुत ताकतवर हैं. तीन साल से जेल से उनकी एक भी तस्वीर बाहर नहीं आने दी गई.

जब बड़ी अदालत ने आदेश दिया कि यह कैदी बीमार है, इसे फलां प्राइवेट अस्पताल ले जाओ, तो सरकार उन्हें आधी रात को अंधेरे में सरकारी अस्पताल ले गई और यह कहकर वापस जेल में ले आई कि यह कैदी बिल्कुल ठीक है.

'इमरान ख़ान के आशिक'

जब इमरान ख़ान जेल गए तो उन्हें अपने कार्यकर्ताओं पर बहुत गर्व था. उन्हें यक़ीन था कि लाखों लोग सड़कों पर उतरेंगे और अदियाला जेल के दरवाजे तोड़कर उन्हें बाहर निकाल लेंगे.

इमरान ख़ान के पास कार्यकर्ता कम और आशिक ज़्यादा हैं , जो खुद को जुनूनी भी कहते हैं और अपने नेता के प्यार में मजनू बने घूम रहे हैं.

जब इमरान ख़ान जेल गए, तो उनके कुछ सबसे ख़ास सलाहकारों ने पहले ही माफ़ी मांग ली थी और अपने घरों में बैठ गए थे. इससे यह पता लग गया था कि ये पत्थर खाने वाले या जेल जाने वाले मजनू नहीं हैं , वे सिर्फ़ अच्छे दिनों के ही साथी थे.

जो बेचारे सच्चे आशिक थे , वे सड़कों पर आए और लाठियां खाईं. अब कभी-कभी वे कोसते हैं, तो कभी एक-दूसरे के ही ख़िलाफ़ हो जाते हैं.

दो मुद्दों अनसुलझे मुद्दे

पाकिस्तान दो बड़े मसलों को सुलझाने में नाकाम रहा है, एक महंगाई और दूसरा इमरान खान का मसला.

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अब एक बार फिर लॉन्ग मार्च (एक तरह का लंबा जुलूस) निकालने की घोषणा की गई है. सरकार ने पहले ही अपना डंडा दिखाना शुरू कर दिया है और आदेश दिया है कि कोई भी इस्लामाबाद आने की हिम्मत भी न करे.

ख़ान की पार्टी के नेता जहां भी 'लॉन्ग मार्च' की तैयारी के लिए पहुंचते हैं, पुलिस पहले ही पहुंच जाती है. एक नेता ने तो पुलिस को धमकी भी दी है कि ये जनता गुस्से में आकर आप सब को खा जाएगी.

सच बात तो यह है कि पाकिस्तान की सरकार दुनिया के बड़े मसलों को सुलझाने में तो लगी हुई है, लेकिन वह अपने देश के दो बड़े मसलों को सुलझाने में नाकाम रही है, एक महंगाई और दूसरा इमरान खान का मसला.

इंग्लिश में लोगों ने 'हंगर' और 'एंगर' को मिलाकर एक नया शब्द बनाया है- जिसे 'हैंगरी' कहते हैं.

एक भूखे इंसान का गुस्सा तो आपने देखा ही होगा. जब कोई दूध पीने वाला एक छोटा बच्चा भूखा होता है, तो उसके रोने की आवाज़ पूरे मोहल्ले तक पहुँच जाती है.

यहां भी लोगों का यही मानना ​​है कि पहले सरकार ने उनका सच्चा प्यार इमरान ख़ान छीन लिया और अब सरकार उनकी रोटी भी छीन रही है.

सत्ता इन भूखे प्रेमियों के नेता को तो छोड़ने के लिए अभी तैयार नहीं है. सरकार उनके प्यार के लिए तो कुछ नहीं कर सकती , लेकिन इनकी भूख का तो कुछ न कुछ करना ही होगा.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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