कोटद्वार विवाद: ज़मानत के बाद बोले मोहम्मद दीपक, 'मुझे फंसाया गया, दबाव में हुई कार्रवाई'

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- Author, आसिफ़ अली
- पदनाम, देहरादून से बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लिए
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
कोटद्वार विवाद में एसडीएम कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद मोहम्मद दीपक ने पुलिस कार्रवाई और ख़ुद पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बातचीत में उन्होंने पूरे मामले को राजनीति से प्रेरित बताया और ख़ुद को फंसाए जाने का आरोप लगाया है.
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल ज़िले के कोटद्वार में व्यापारी संजीव टोंक की शिकायत पर दीपक कुमार उर्फ़ 'मोहम्मद दीपक' को ज़िला पुलिस ने गिरफ़्तार किया था.
व्यापारी का आरोप है कि सोशल मीडिया पर उनकी एक टिप्पणी से नाराज़ होकर दीपक उनकी दुकान पर आए, उनके साथ गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी.
कोटद्वार एएसपी मनोज ठाकुर के मुताबिक़, "व्यापारी के साथ धक्का-मुक्की और गाली-गलौज की शिकायत मिली थी, जिस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए मामला रजिस्टर्ड किया गया. सुरक्षा के लिहाज से अभियुक्त दीपक कुमार को धारा 151 के तहत गिरफ़्तार किया गया."
'पुराने विवाद के बाद से बनाया जा रहा निशाना'

मोहम्मद दीपक के अनुसार, यह पूरा विवाद अचानक नहीं हुआ है. उन्होंने दावा किया कि इस वर्ष 26 जनवरी की घटना के बाद से ही कुछ लोग उन पर छींटाकशी (कमेंट) कर रहे थे.
जनवरी में एक मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में बजरंग दल के सदस्यों के विरोध के बाद दीपक कुमार चर्चा में आए थे. उस समय उन्होंने अपना नाम 'मोहम्मद दीपक' बताया था. अब व्यापारी की शिकायत पर हुई उनकी गिरफ़्तारी के बाद यह मामला फिर चर्चा में है.
उन्होंने बताया, "शिकायतकर्ता नजीबाबाद (यूपी) के रहने वाले हैं और कोटद्वार में उसी इलाक़े में काम करते हैं जहाँ पहले मेरा जिम था. 26 जनवरी की घटना के बाद से उन्होंने मुझसे बातचीत बंद कर दी थी और जब भी मैं वहाँ से गुजरता था, वह मुझ पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करते थे."
पुलिस ने शिकायतकर्ता व्यापारी की तहरीर पर मामला दर्ज कर दीपक को गिरफ़्तार किया था, जिन्हें 50 हज़ार रुपये के मुचलके और दो ज़मानतियों की शर्त पर ज़मानत मिल गई है.
दीपक ने दावा किया, "कई बार नज़रअंदाज़ करने और समझाने के बावजूद जब उसका (शिकायतकर्ता व्यापारी) यह रवैया नहीं बदला, तो मैंने केवल जाकर इस बात का विरोध किया और बात की थी. मैंने कोई हिंसा या मारपीट नहीं की."
उन्होंने आरोप लगाया, "थाने में 80 से 100 लोग जमा हो गए थे और माहौल बनाया जा रहा था. ऊपरी दबाव और भीड़ के प्रदर्शन के कारण पुलिस ने मेरे ख़िलाफ़ यह कदम उठाया. शांति भंग जैसी मामूली धारा के मामले में मुझे कल दोपहर 3 बजे से आज शाम 7 बजे तक बैठाकर रखा गया."
इसी मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की अलग-अलग धाराओं के तहत मुक़दमा दर्ज किया है और बाद में दीपक को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस की धारा 170 के तहत गिरफ़्तार किया.
पुलिस ने क्या बताया?

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पौड़ी पुलिस के मुताबिक़, व्यापारी संजीव टोंक ने गुरुवार, एक अक्तूबर को कोटद्वार कोतवाली में शिकायत दी थी. पुलिस के मुताबिक़, शिकायत में दीपक कुमार उर्फ़ अक्की उर्फ़ मोहम्मद दीपक पर अभद्रता, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए गए थे.
पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(2) और 352 के तहत मुक़दमा दर्ज किया. पुलिस के प्रेस नोट के मुताबिक़, जांच के दौरान धारा 196 और 115 भी जोड़ी गईं.
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज के साथ उपलब्ध तस्वीरों और वीडियो साक्ष्यों की भी पड़ताल की गई.
पुलिस के मुताबिक़, घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज़ और उपलब्ध तस्वीरों से पहली नज़र में यह सामने आया कि मोहम्मद दीपक ने शिकायतकर्ता के साथ गाली-गलौज की और धमकी दी.
पुलिस ने अपने बयान में कहा कि समाज में शत्रुता फैलाने, धमकी देने या शांति व्यवस्था भंग करने की कोशिश करने वालों के ख़िलाफ़ क़ानून के मुताबिक़ कार्रवाई जारी रहेगी.
शिकायतकर्ता कारोबारी का क्या कहना है?

कारोबारी संजीव टोंक का कहना है कि विवाद सोशल मीडिया पर की गई एक टिप्पणी से शुरू हुआ था.
व्यापारी के मुताबिक़, दीपक ने दुकान पर पहुंचकर उनके साथ गाली-गलौज की और उन्हें कोटद्वार में नहीं रहने देने की बात कहते हुए जान से मारने की धमकी दी.
उनका कहना है कि घटना के दौरान स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव किया, जिसके कारण मामला आगे नहीं बढ़ा.
टोंक के मुताबिक़, घटना के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की. इसके बाद स्थानीय व्यापार मंडल ने भी मामले में हस्तक्षेप किया और पुलिस ने मुक़दमा दर्ज कर कार्रवाई की.
इस तरह शिकायतकर्ता के मुताबिक़, सोशल मीडिया पर एक टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद बाद में उनकी दुकान तक पहुंचा.
दीपक के वकील ने क्या बताया?

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दीपक के वकील एडवोकेट अरविंद कुमार वर्मा ने कारोबारी के आरोपों को ख़ारिज किया है.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बातचीत में वर्मा ने कहा कि दीपक का कोटद्वार की 'भाई जी की सेल वाली गली' में पुराना निवास रहा है और उनकी मां की भी वहीं चाय की दुकान है.
वकील के मुताबिक़, पास में दुकान चलाने वाले एक अन्य व्यापारी से दीपक की पुरानी जान-पहचान है.
वर्मा का कहना है कि एक अक्तूबर को दोनों के बीच किसी बात को लेकर सामान्य बातचीत हुई और इसी दौरान कहासुनी हो गई.
उन्होंने कहा कि दीपक ने सिर्फ़ इतना कहा था कि यह उसका व्यक्तिगत मामला है और इसमें किसी को बेवजह हस्तक्षेप या टोका-टाकी नहीं करनी चाहिए.
वकील का दावा है कि वहां न तो मारपीट हुई और न ही गाली-गलौज या जान से मारने की धमकी दी गई.
वर्मा का आरोप है कि इसके बाद व्यापार मंडल ने माहौल बनाकर पुलिस में शिकायत दी और उसी के आधार पर दीपक के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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