जेपी आंदोलन और अन्ना के अनशन तक, कहानी रामलीला मैदान की

इमेज स्रोत, ANI
मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शनों के बीच दिल्ली पुलिस का नया फ़रमान चर्चा का विषय बना हुआ है.
कई ऐतिहासिक प्रदर्शनों का गवाह रहे जंतर-मंतर पर अब कोई प्रदर्शन नहीं कर पाएगा.
दिल्ली पुलिस ने इस संबंध में आदेश जारी कर कहा है कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन की जगह की सूची से हटा दिया गया है. पुलिस ने दिल्ली में प्रदर्शनों के लिए तीन जगह तय किए हैं. ये हैं रामलीला मैदान, बुराड़ी और सीबीडी ग्राउंड. इनमें सबसे ज़्यादा चर्चित रहा है दिल्ली का रामलीला मैदान.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ 12 एकड़ में फैले इस ग्राउंड में 50,000 लोग जमा हो सकते हैं. साथ ही एक दिन के लिए इसकी बुकिंग में कुल मिलाकर 1.21 लाख रुपए लगते हैं. इसमें रिफ़ंडेबल सिक्योरिटी डिपॉज़िट और टैक्स शामिल हैं.
इंडिया टुडे ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि इस साल ये मैदान सिर्फ़ तीन दिनों के लिए ख़ाली है. ये हैं- 29, 30 और 31 दिसंबर.
रामलीला मैदान की बुकिंग दिल्ली नगर निगम के हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट के ज़रिए होती है. इसके अलावा दिल्ली पुलिस की ओर से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफ़ेकेट' की ज़रूरत होती है. बिना उसके रामलीला मैदान की बुकिंग नहीं हो सकती है.
अधिकारियों के मुताबिक़ मैदान का एक छोटा हिस्सा मुफ़्त में मिल सकता है, लेकिन वहाँ सिर्फ़ 150 लोग ही जमा हो सकते हैं.
रामलीला मैदान का इतिहास

इमेज स्रोत, Getty Images
रामलीला मैदान आज़ादी की लड़ाई, पाकिस्तान पर जीत, इमरजेंसी, राम मंदिर आंदोलन और जन लोकपाल को लेकर आंदोलन जैसे अनगिनत ऐतिहासिक हलचलों का गवाह रहा है.
समय के साथ-साथ पुरानी दिल्ली के कई संगठनों ने इस मैदान में राम लीलाओं का आयोजन करना शुरू कर दिया. इसी कारण इसकी पहचान रामलीला मैदान के रूप में हो गई.
उस दौर की दिल्ली में इससे बड़ी और खुली जगह कोई नहीं थी, इसलिए रैली जैसे बड़े आयोजनों और आम जनता से सीधे संवाद के लिए ये मैदान राजनेताओं का पसंदीदा मैदान बन गया.
इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान से युद्ध की जीत का जश्न इसी मैदान पर मनाया था.
आज़ादी की लड़ाई के दौरान महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल और दूसरे नेताओं के लिए विरोध जताने का ये सबसे पसंदीदा मैदान बन गया था.
इसी मैदान पर मोहम्मद अली जिन्ना से जवाहर लाल नेहरू तक और बाबा रामदेव से लेकर अन्ना हज़ारे तक आंदोलन कर चुके हैं.
'सिंहासन ख़ाली करो कि जनता आती है'

इमेज स्रोत, EPA/Shutterstock
रामलीला मैदान का इस्तेमाल सरकारी रैलियों और सत्ता के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने जैसी दोनों ही परिस्थितियों में किया गया.
दिसंबर 1952 में रामलीला मैदान में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को लेकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सत्याग्रह किया था. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने साल 1956 और 57 में मैदान में विशाल जनसभाएँ कीं.
जयप्रकाश नारायण ने इसी मैदान से कांग्रेस सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी. 28 जनवरी, 1961 को ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ ने रामलीला मैदान में ही एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था.
26 जनवरी, 1963 में प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की उपस्थिति में लता मंगेशकर ने एक कार्यक्रम पेश किया था. वर्ष 1965 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ लड़ाई में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने इसी मैदान पर एक विशाल जनसभा में 'जय जवान, जय किसान' का नारा एक बार फिर दोहराया था.
साल 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश के गठन और पाकिस्तान से युद्ध जीतने का जश्न मनाने के लिए इसी मैदान में एक बड़ी रैली की थी और जहाँ उन्हें जनता का भारी समर्थन मिला था.
25 जून 1975 को इसी मैदान पर लोक नायक जय प्रकाश नारायण ने विपक्षी नेताओं के साथ ये ऐलान कर दिया था कि इंदिरा गांधी की तानाशाही सरकार को उखाड़ फेंका जाए.

इमेज स्रोत, Getty Images
फरवरी 1977 में विपक्षी पार्टियों ने एक बार फिर इसी मैदान को अपनी आवाज़ जनता तक पहुँचाने के लिए चुना.
जनता पार्टी के बैनर तले बाबू जगजीवन राम के नेतृत्व में कांग्रेस छोड़कर आए मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह और चंद्रशेखर के साथ अटल बिहारी वाजपेयी इसी मैदान के मंच पर एक साथ नज़र आए.
1980 और 90 के दशक के दौरान विरोध प्रदर्शनों की जगह बोट क्लब बन गई थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के कार्यकाल के दौरान बोट क्लब पर प्रदर्शन पर रोक की वजह से इसी मैदान को भारतीय जनता पार्टी ने राम मंदिर आंदोलन के लिए चुना.
यहाँ पर कांग्रेस, बीजेपी सहित अन्य दलों, संगठनों व धार्मिक संगठनों के कई कार्यक्रम होते रहे हैं.
वर्ष 2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में मज़बूत लोकपाल क़ानून की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन शुरू किया. उस समय रामलीला मैदान लंबे समय तक सुर्ख़ियों में रहा. इसी आंदोलन से अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी का गठन हुआ और फिर दिल्ली में उनकी सरकार भी बनी.
वर्ष 2011 में ही बाबा रामदेव ने काले धन और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ रामलीला मैदान में अपना अनशन किया था, लेकिन दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद उन्हें वहाँ से हटना पड़ा था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.




























