धोनी ने ऐसा कमाल किया कि बंद हो गई सेलेक्टर्स की बोलती

महेंद्र सिंह धोनी
    • Author, नीरज झा
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

श्रीलंका को भारत ने भले ही 5-0 से धो डाला हो लेकिन ये सिरीज़ सिर्फ भारत के जीत की कहानी के लिए नहीं जानी जाएगी. इस वनडे सिरीज़ से जो सबसे बड़ी बात निकल कर आयी है वो है धोनी का पुनर्जन्म - माही पार्ट 2.

सिरीज़ से पहले भारतीय टीम के चयन को लेकर अटकलों का बाज़ार गर्म था कि एमएस धोनी और युवराज सिंह को शायद विराट कोहली की नई लुक वाली टीम में जगह शायद ना मिले.

खैर, युवराज सिंह को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और धोनी को टीम में जगह मिलने को एक और मौका देने की बात कहकर सेलेक्शन कमिटी ने भी अपना पल्ला झाड़ लिया.

सेलेक्शन कमिटी के चेयरमैन एमएसके प्रसाद हैं. शायद आपको याद न हो तो बता दूं कि प्रसाद ने कुल खेले गए 6 टेस्ट मैच में करीब 12 के औसत से रन बनाये थे और वनडे में इनका औसत थोड़ा बेहतर है. करीब 15 के आसपास.

प्रसाद ने श्रीलंका दौरे के लिए धोनी को टीम में जगह तो दे दी लेकिन ये भी जता दिया कि अगर धोनी प्रदर्शन अच्छा नहीं कर पाएं तो दूसरे विकल्प की तलाश करनी होगी.

महेंद्र सिंह धोनी

श्रीलंका में उनके ऊपर बहुत दबाब था लेकिन धोनी बने ही हैं किसी और मिटटी के. उनका दूसरे, तीसरे और चौथे वनडे में स्कोर रहा 45*, 67* और 49*. ऐसा जवाब जिससे सारे आलोचक चारों खाने चित.

पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने सिरीज़ के बाद कहा कि ऐसे महान खिलाडियों को एक दिन अचानक आप ये नहीं कह सकते कि अब हो गया, आप अपनी राह देख लें.

उनके मुताबिक, धोनी ने हमेशा ही अपने प्रदर्शन से आलोचकों का मुंह बंद किया है. यहां पर ये बताना लाज़मी है कि धोनी के आलोचकों की लिस्ट में गांगुली सबसे ऊपर हैं. हालांकि गांगुली ने तारीफ़ में ये भी जोड़ दिया कि धोनी को बड़ी टीमों के ख़िलाफ़ भी अपने आपको साबित करना होगा.

भारत के सबसे सफलतम कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को जितना सब जानते हैं उसके हिसाब से वो कभी भी अपना जवाब शब्दों से नहीं देते बल्कि अपने बल्ले से देते हैं. अगर आपको याद हो तो 2012-13 में अपने घरेलू मैदान पर इंग्लैंड के हाथों मिली हार के बाद उनकी कप्तानी पर सवाल खड़े होने लगे थे.

जिन खिलाडियों को धोनी ने परफॉरमेंस की वजह से बाहर का रास्ता दिखाया था, उन्होंने धोनी के कप्तानी के ख़िलाफ़ बोलने का एक भी मौका नहीं छोड़ा. लेकिन माही ने इस दौर को ज़ल्द ही बीते दिनों की बात बना दिया और नई टीम के साथ शानदार प्रदर्शन किया.

सफलता की कहानी और रिकॉर्ड्स का बादशाह

धोनी

2006 में पाकिस्तान को उनके घर पर मात देने में धोनी की बड़ी भूमिका रही है. एक साल बाद पहले टी20 वर्ल्ड कप में धोनी एक सफल कप्तान के तौर पर उभरे. टीम को टेस्ट में नंबर एक बनाने से लेकर 2011 वर्ल्ड कप में जीत के सफ़र की यादें लोगों के दिलों में है.

धोनी ने अपनी कप्तानी में टीम को 28 साल बाद 2011 वर्ल्ड कप में जीत दिलाई और फ़ाइनल में धोनी का वो छक्का तो शायद ही कोई भूले. इसी छक्के को लेकर सुनील गावस्कर ने कहा था - जब मेरी आखिरी साँसें चल रही होंगी और कोई एक चीज जिसे मैं देखना चाहूंगा वो होगा फाइनल में धोनी का मैच विनिंग छक्का. धोनी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ फिनिशर्स में गिना जाता है.

बात अगर रिकॉर्ड्स की करें तो धोनी काफ़ी अव्वल रहे हैं. नंबर 6 नंबर पर बैटिंग करते हुए अगर जीते हुए मैचों में उनके औसत को देखें तो वो सबसे आगे हैं- कोहली से भी आगे. आज जब टी20 का चलन बढ़ रहा है ऐसे में 300 एकदिवसीय मैच खेलने के आंकड़े के आसपास आना भी बहुत बड़ी उपलब्धि है.

पूरी दुनिया में सिर्फ 19 खिलाडियों ने ही इस आंकड़े को छुआ है, भारत में तो सिर्फ गिनती के पांच नाम है - सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, मोहम्मद अजहरुद्दीन और युवराज सिंह. और अगर सिर्फ विकेटकीपर्स की बात करें तो कुमार संगकारा के बाद वो दूसरे ऐसे खिलाडी है.

करियर में सबसे अधिक बार नाबाद रहने का रिकॉर्ड भी उन्होंने अपने नाम कर लिया. भले ही वो श्रीलंका के विकेटकीपर बल्लेबाज कुमार संगकारा के वनडे में 14,234 रन का रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाए लेकिन विकेटकीपर के तौर पर वो उनसे कहीं आगे हैं.

श्रीलंका के ख़िलाफ़ आख़िरी मैच में वह संगकारा को पीछे छोड़ते हुए वनडे में 100 स्टंपिंग करने वाले पहले विकेटकीपर बन गए और ख़ास बात ये है कि उन्होंने संगकारा के मुक़ाबले 105 मैच कम खेले हैं.

2019 वर्ल्ड कप के लिए तैयार है धोनी

महेंद्र सिंह धोनी

रनों की अगर बात करें तो माही वनडे में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले भारतीय खिलाडियों में चौथे नंबर पर हैं. उन्होंने मोहम्मद अज़हरुद्दीन सरीखे बल्लेबाज़ को भी पीछे छोड़ दिया है.

उनसे ऊपर सिर्फ तीन बल्लेबाज़ हैं - राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली, और सचिन तेंदुलकर. और शायद यही वजह है कि धोनी को टीम में लाने वाले सेलेक्टर किरण मोरे चाहते हैं कि उन्हें 2019 वर्ल्ड कप के स्क्वॉड में जगह मिलनी चाहिए.

कुछ महीने पहले ही पूर्व भारतीय कप्तान धोनी ने अपने रिटायरमेंट के बारे में सारे अटकलों को ख़ारिज करते हुए कहा था कि वह अगले विश्व कप का हिस्सा जरूर होंगे क्योंकि वो पूरी तरह से फिट हैं.

अफवाहें थीं कि टेस्ट क्रिकेट से पहले ही रिटायरमेंट लेने वाले धोनी इस साल आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के बाद लिमिटेड ओवर फॉर्मेट को भी अलविदा कह देंगे. लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और धोनी के श्रीलंका में इस प्रदर्शन के बाद उनके आलोचकों में चुप्पी है.

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