यूपी पुलिस को लोग क्यों कहने लगे 'कंबल चोर'- सोशल

लखनऊ
प्रकाशित
पढ़ने का समय: 2 मिनट

उत्तर प्रदेश के लखनऊ के घंटाघर पर नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ महिलाएं आंदोलन कर रही हैं.

शनिवार की रात को यूपी पुलिस के अधिकारियों ने महिलाओं को धरना स्थल से हटाने की कोशिश की.

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इस दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों में यूपी पुलिस के अधिकारी प्रदर्शनकारियों के कंबल और बर्तन ले जाते दिखे हैं.

इसके बाद रविवार की सुबह ट्विटर पर KAMBALCHOR_UPPOLICE ट्रेंड करने लगा. इसको लेकर लोगों ने यूपी पुलिस की ख़ूब आलोचना की है.

सोशल मीडिया पर एक यूज़र ने लिखा है, ''पुलिस ने कंबल और रज़ाई छीन लिए फिर भी महिलाएं सर्द रात में डटी हुई हैं.''

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एक अन्य यूज़र ने यूपी पुलिस को टैग करते हुए लिखा है अपने पुलिसकर्मियों के लिए कंबल और भोजन की व्यवस्था क्यों नहीं करते, शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन करने वालों को लूट रहे हैं.

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वहीं एक अन्य यूज़र ने लिखा है कि यूपी पुलिस कांवड़ियों पर फूल बरसाती है लेकिन प्रदर्शनकारियों से कंबल छीन लेती है.

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यूपी पुलिस

इसके बाद पुलिस ने एक बयान जारी करके अपनी सफाई दी है. इस सफाई में अफ़वाह न फैलाने की अपील के साथ कहा गया है, "घंटाघर पार्क में अवैध रूप से चल रहे धरना प्रदर्शन में कुछ संगठनों ने कंबल बाँटे थे. आसपास के लोग बड़ी संख्या में जो धरने में शामिल नहीं थे, वो भी कंबल लेने आ रहे थे. पुलिस ने कंबल और संगठन के लोगों को हटाया और कंबलों को विधिक तरीके से कब्ज़े में लिया."

इसके बाद महिलाओं की मदद के लिए सिख समुदाय के लोगों का एक जत्था पहुंचा. सिख समुदाय के लोग खाने पीने का सामान लेकर पहुंचे और आगे भी प्रदर्शन करने वाली महिलाओं का साथ देने का भरोसा जताया.

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शनिवार को पूर्व नौकरशाह कन्नन गोपीनाथन को CAA विरोधी विचार गोष्ठी में इलाहाबाद पुलिस ने बोलने नहीं दिया था. उन्हें इलाहाबाद एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने दिया था और जबरन दिल्ली वापस भेज दिया था.

देश भर में नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध के सिलसिले में उत्तर प्रदेश में विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में 18 लोगों की मौत हो चुकी है.

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