सोशल: 'जेएनयू में अगर टैंक लगें तो पुराने छात्रों को मिलें तोपें'

जगदेश कुमार
प्रकाशित

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में 23 जुलाई को पहली बार करगिल विजय दिवय मनाया गया.

इस मौके पर जेएनयू के वाइस चांसलर जगदेश कुमार ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और वीके सिंह से कहा, ''मैं आपसे विनती करता हूं कि जेएनयू में आर्मी टैंक रखवाने में मदद करें, जिसे कैंपस में सही जगह पर लगाया जा सके. ये टैंक छात्रों को भारतीय सेना के बलिदान की याद दिलाएगा.''

इस कार्यक्रम में क्रिकेटर गौतम गंभीर और रिटायर्ड मेजर जनरल जीडी बख्शी भी मौजूद थे.

वीके सिंह
इमेज कैप्शन, दिल्ली में रविवार को करगिल पराक्रम रैली भी निकाली गई

इस बयान की सोशल मीडिया पर भी चर्चा हो रही है.

निशांत यादव ने फ़ेसबुक पर लिखा, ''अगर कोई जेएनयू में टैंक रखने को तैयार न हो तो किसी मुच्छड़ जनरल को वाइस चांसलर ही बना दो. सारा टंटा ही ख़त्म.''

कोमल सिंह लिखती हैं, ''हां टैंक तो होना चाहिए. देशद्रोहियों में देशभक्ति की भावना जागेगी और देशभक्तों का डर भी.''

ट्विटर

पत्रकार स्मिता प्रकाश ने गुलाबी कवर से ढके टैंक की तस्वीरों को ट्वीट करते हुए लिखा- जेएनयू में टैंक के लिए कुछ डिजाइन.

@RoflGandhi_ तंज करते हुए लिखते हैं, ''अगर जेएनयू के वीसी को ये पता चल जाए कि गोला बारूद की कमी है तो संभव है कि वो आर्मी को किताबों से लैस करने का सुझाव दे दें क्योंकि ज्ञान ही सबसे बड़ा हथियार है.''

ट्विटर

फहीम अहमद लिखते हैं, ''आज की तारीख में जो लोग थोड़ा बहुत भी फेसबुक और वॉट्सऐप चला रहे हैं वो लोग भी जेएनयू जैसी महान संस्था के बारे में अपनी राय रख रहे हैं.''

मृत्युंजय प्रभाकर कहते हैं, ''ये तो पुराने छात्रों के साथ नाइंसाफी होगी. जेएनयू के पुराने छात्रों को एक-एक तोप मिलनी चाहिए. उसका मुंह घर की तरफ भी चलेगा.''

कीर्तिश के कार्टून

जगदीश्वर चतुर्वेदी लिखते हैं, ''JNU में लगता है भूत प्रेत विद्या पढ़ाई जाएगी.''

स्नेहलभाई पटेल ने लिखा- लगता है पढ़ाई सरहद पर होगी और युद्ध विश्वविद्यालय में.

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