क्या आप मिलावटी खाना खा रहे हैं?

    • Author, क्रिस बारानियूक
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
  • प्रकाशित

खाने के सामान में मिलावट का धंधा बड़ी तेज़ी से फैल रहा है. आज हम खाने पीने का जो भी सामान बाज़ार से ख़रीदते हैं, इनमें से काफ़ी खाने में कोई न कोई मिलावट होती है और जिससे हमारी जेब और सेहत दोनों को नुक़सान होता है.

एक अंदाज़े के मुताबिक़ आज खाने-पीने के सामान का खुदरा कारोबार 4 खरब डॉलर का है. अगले चार साल में इसके दोगुना होने की उम्मीद है. इसलिए इसमें अपना मुनाफ़ा बढ़ाने के लिए मिलावटखोर, कमोबेश हर चीज़ में मिलावट करते हैं.

खाने-पीने की चीज़ों में मिलावट रोकने के लिए दुनिया के तमाम देशों में अलग-अलग पैमाने पर काम हो रहा है.

ब्रिटेन के बेलफास्ट शहर में खाने की चीज़ों में मिलावट पकड़ने की एक लैब है. इसका नाम है इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल फूड सिक्योरिटी. ये लैब बेलफास्ट की क्वींस यूनिवर्सिटी का हिस्सा है. मिलावटखोरों के ख़िलाफ़ ये मुहिम छेड़ रखी है इंस्टीट्यूट के निदेशक क्रिस इलियट ने.

क्रिस, उत्तरी आयरलैंड के देहाती इलाक़े में पैदा हुए थे. उन्हें पता है कि खाने लायक़ चीज़ें कैसे उगाई जा सकती हैं. इसलिए उन्हें ये भी पता है कि खाने-पीने के सामान में किस तरह से मिलावट की जाती है.

2013 में उन्होंने ब्रिटेन में उस वक़्त सनसनी मचा दी थी, जब उन्होंने पाया था कि जो बर्गर बीफ से बने कहकर बेचे जा रहे थे, असल में उन में घोड़े का मांस था. इस पर्दाफ़ाश के बाद ब्रिटिश सरकार ने क्रिस को खाने-पीने के सामान में मिलावट पर एक रिपोर्ट तैयार करने को कहा था.

ये रिपोर्ट तैयार करते वक़्त ही क्रिस को अंदाज़ा हुआ कि मिलावट का काला धंधा बड़े पैमाने पर हो रहा है. खाने-पीने की हर चीज़ में मिलावट की जा रही है. और इस तरह अपराधी आपसे अरबों डॉलर कमा रहे हैं. साथ ही वो आपकी सेहत को भी नुक़सान पहुंचा रहे हैं.

इसके बाद ही क्रिस इलियट ने मिलावट के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ दी. उनकी लैब में कई तरह के उपकरण हैं, जिनसे खाने पीने के सामान में मिलावट पकड़ी जाती है. जैसे कि उनका एक शागिर्द टेरी, एक लेज़र उपकरण से ओरेगानो में मिलावट का पता लगाता है. पता ये चला की जो पत्तियां आपको ओरेगानो कहकर बेची जा रही हैं, उनमें तो आधी पत्तियां किसी और पौधे की है.

क्रिस इलियट ने अपने साथियों के साथ मिलकर कई ऐसी मशीनें बनाई हैं, जो बीफ, मछली के मांस और मसालों से लेकर दूध तक में मिलावट को पकड़ सकते हैं. उनके पास एक ऐसी मशीन है जिसकी मदद से ये पता लगाया जा सकता है कि किसी मछली को जाल से पकड़ा गया या फिर कांटे की मदद से फंसाया गया.

इसी तरह दूध की मिलावट पकड़ने के लिए भी एक मशीन है. ये मशीन ये पता लगाती है कि दूध में असली प्रोटीन है या मिलावटी. असल में ब्रिटेन समेत सभी यूरोपीय देशों में दूध के प्रोटीन से ही उसकी क़ीमत तय होती है. इसीलिए प्रोटीन की तादाद ज़्यादा दिखाने के लिए उसमें कभी चावल का तो कभी कोई दूसरा प्रोटीन मिलाकर बेचा जाता है.

ये दो तरह से नुक़सान पहुंचाता है. एक तो आपकी सेहत को नुक़सान होता है. वहीं दूसरे आप सस्ता सामान ऊंची क़ीमत पर खरीदते हैं.

भारत जैसे देशों में जहां मौसम गर्म है, दूध को बचाए रखने के लिए प्रेज़र्वेटिव मिलाए जाते हैं. ये एक तरह से ज़हर होते हैं हमारी सेहत के लिए.

क्रिस इलियट बताते हैं कि हर तरह के खाने के सामान में मिलावट की जा सकती है. जैसे कि मसालों का रंग चटख करने के लिए उनमें केमिकल मिलाए जाते हैं. ताकि वो ज़्यादा लुभावने लगें. इसी तरह दूध में कई बार सीसा या कैडमियम जैसे मेटल भी मिलते हैं, जिन्हें क्रिस की टीम एक्स-रे इमेजिंग तकनीक से पकड़ती है.

अक्सर सामान की पैकिंग में लंबे चौड़े दावे किए जाते हैं. मगर अंदर जो सामान पैक होता है वो अच्छी क्वालिटी का नहीं होता. ख़ास तौर से मीट. कई मछलियों का मांस महंगा होता है. वहीं कई सस्ते में मिल जाती हैं. अक्सर इसके कारोबारी, मछली के मांस को अच्छा बताकर बेचते हैं. जबकि असल में पैकिंग में सस्ती वाली मछली का मांस होता है.

क्रिस इलियट के पास एक ऐसा चाकू है, जो मांस के टुकड़े को काटने पर बता देता है कि फलां मांस किस नस्ल की मछली का है. ये चाकू, लंदन के इम्पीरियल कॉलेज के ज़ोल्टन टाकाट्स ने ईजाद किया था. अब क्रिस की टीम मिलावट पकड़ने में इसका बख़ूबी इस्तेमाल कर रही है.

क्रिस कहते हैं कि बढ़ती आबादी के चलते हमारी खाने की सप्लाई चेन बहुत पेचीदा होती जा रही है. खाने की चीज़ जहां पैदा होती है, वहां से खाने वाले की टेबल तक आते-आते वो कई हाथों से गुज़रती है. जितने लोग उसमें जुड़ते हैं, उतना ही मिलावट का डर बढ़ता जाता है. क्योंकि हर इंसान अपना मुनाफ़ा बढ़ाने की जुगत में रहता है. ऐसे में वो आपकी सेहत से खिलवाड़ करने से बाज़ नहीं आता.

यूरोपीय देशों में मिलावट को पकड़ने का काम करने वाले क्रिस वान स्टीनकिस्ट कहते हैं कि पैसे के लिए अपराधी कुछ भी करने पर आमादा हैं. इसे रोकने के लिए ज़रूरी है कि क्रिस इलियट जैसे लोगों की ज़रूरत है.

वहीं क्रिस कहते हैं कि खाने में मिलावट को पूरी तरह से रोक पाना नामुमकिन है. लेकिन इसे कम किया जा सकता है. इसीलिए उनकी कोशिश है कि मिलावट पकड़ने की मशीनें, फूड इंस्पेक्टर्स के हाथ में हों. जो किसी भी दुकान में जाकर सामान की पड़ताल कर सकें.

क्रिस कहते हैं कि वो मिलावटखोरों को रोक भले न पाएं, लेकिन उनकी राह मुश्किल ज़रूर कर देंगे.

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